जून 2026 में IndiGo ने भारतीय डोमेस्टिक एयरलाइंस सेक्टर में रिकॉर्ड **66.3%** मार्केट शेयर हासिल किया है, जबकि Air India ग्रुप का शेयर घटकर **23.9%** रह गया। यह बदलाव दोनों कंपनियों की अलग-अलग कैपेसिटी स्ट्रेटेजी का नतीजा है।
Detailed Coverage
IndiGo की उड़ान, Air India की गिरावट
इंटरग्लोबल एविएशन (InterGlobe Aviation) के स्वामित्व वाली IndiGo ने जून 2026 में भारतीय घरेलू विमानन क्षेत्र में अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है। डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, IndiGo का डोमेस्टिक पैसेंजर मार्केट में दबदबा अब 66.3% हो गया है। वहीं, टाटा के स्वामित्व वाले एयर इंडिया ग्रुप (Air India group) का मार्केट शेयर इसी अवधि में घटकर 23.9% पर आ गया है।
क्षमता और ऑपरेशनल स्ट्रेटेजी का खेल
मार्केट पोजीशन में इस बड़े बदलाव की मुख्य वजह दोनों कंपनियों की अलग-अलग ऑपरेशनल स्ट्रेटेजी है। अप्रैल और मई में जहां IndiGo ने अपनी डोमेस्टिक फ्लाइट्स 12% बढ़ाईं, वहीं एयर इंडिया ग्रुप ने इसी दौरान अपनी फ्लाइट्स 7% घटा दीं। इसके चलते एयर इंडिया ग्रुप ने लगभग 3,900 कम फ्लाइट्स ऑपरेट कीं, जिसका सीधा फायदा IndiGo को मिला और उसने ज्यादा पैसेंजर्स को अपनी ओर खींचा। IndiGo की ऑपरेशनल विश्वसनीयता भी एक अहम फैक्टर रही, जून में 89.4% ऑन-टाइम परफॉरमेंस के साथ कंपनी ने सिर्फ 0.2% फ्लाइट्स कैंसिल कीं। वहीं, एयर इंडिया ग्रुप का ऑन-टाइम परफॉरमेंस 85.9% रहा।
अन्य प्लेयर्स की स्थिति
छोटे प्लेयर्स की बात करें तो अकासा एयर (Akasa Air) 6.4% मार्केट शेयर के साथ तीसरे स्थान पर अपनी जगह बनाने में कामयाब रही है। अप्रैल-मई में 16% डोमेस्टिक डिपार्चर बढ़ाकर कंपनी ने अपनी ग्रोथ को सपोर्ट दिया है। दूसरी ओर, स्पाइसजेट (SpiceJet) 1.9% मार्केट शेयर के साथ दबाव में है। कंपनी लगातार वित्तीय और ऑपरेशनल दिक्कतों का सामना कर रही है, जिसका असर उसके 33.5% के बेहद कम ऑन-टाइम परफॉरमेंस में भी दिखाई देता है।
आगे क्या?
कुल मिलाकर, डोमेस्टिक पैसेंजर ट्रैफिक इस साल की पहली छमाही में 1.44% बढ़कर 8.64 करोड़ तक पहुँच गया है। एयर इंडिया ग्रुप ने सितंबर से अपनी डोमेस्टिक और इंटरनेशनल कैपेसिटी को काफी हद तक बहाल करने की योजना बनाई है। निवेशकों की नज़र अब इस बात पर होगी कि एयर इंडिया अपनी इस योजना को कितनी सफलतापूर्वक लागू कर पाता है और मार्केट शेयर वापस हासिल कर पाता है या नहीं। वहीं, IndiGo के लिए चुनौती यह होगी कि वह अपनी आक्रामक कैपेसिटी ग्रोथ को लागत प्रबंधन और ऑपरेशनल एफिशिएंसी के साथ कैसे संतुलित करती है, खासकर तब जब इंडस्ट्री में नई क्षमताएं लगातार जुड़ रही हैं।
