IndiGo ने अपनी लॉन्ग-हॉल भविष्य की योजनाओं के लिए आगामी Navi Mumbai International Airport को एक रणनीतिक केंद्र के रूप में चुना है। हालांकि, एयरलाइन का विस्तार उसके हालिया वित्तीय नतीजों के साये में है, जिसमें ईंधन की बढ़ती लागत के चलते सितंबर तिमाही में **₹18.79 बिलियन** का नेट लॉस हुआ है।
भविष्य की रणनीति और Navi Mumbai का महत्व
IndiGo के CEO विली वॉल्श ने आगामी Navi Mumbai International Airport को एयरलाइन के भविष्य के इंटरनेशनल नेटवर्क की आधारशिला बताया है। कंपनी अपनी लॉन्ग-हॉल महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए अपने संचालन का एक हिस्सा इस नए एयरपोर्ट पर शिफ्ट करने की योजना बना रही है। यह ट्रांजिशन मुंबई के Chhatrapati Shivaji Maharaj International Airport के टर्मिनल-1 में चल रहे रिनोवेशन के दौरान फ्लाइट कैपेसिटी को मैनेज करने के लिए भी एक जरूरी कदम है।
वित्तीय मोर्चे पर दबाव
यह विस्तार की योजना कंपनी के बैलेंस शीट के लिए एक कठिन समय में आई है। 30 सितंबर, 2026 को समाप्त तिमाही के नतीजों में कंपनी ने ₹18.79 बिलियन का नेट लॉस दर्ज किया है। इसके पीछे मुख्य कारण ईंधन की कीमतों में भारी उछाल है, जहां प्रति सीट फ्यूल कॉस्ट पिछले साल के मुकाबले 68.9% बढ़ गई है। इसके अलावा, रुपये की गिरावट और 7.1% बढ़ा हुआ कर्ज कंपनी के मुनाफे पर भारी पड़ रहा है। 2 नवंबर, 2026 तक कंपनी का शेयर लगभग ₹4,920 के स्तर पर ट्रेड कर रहा है।
CEO का चुनौतीपूर्ण बयान
CEO विली वॉल्श ने सेक्टर की मुश्किलों पर खुलकर बात की है। उन्होंने कहा कि एयरपोर्ट के भारी चार्ज और टैक्स, जो एक तरह से एकाधिकार (Monopoly) का रूप ले चुके हैं, एयरलाइंस के विस्तार में बड़ी बाधा हैं। निवेशक अब इस बात पर नजर गड़ाए हुए हैं कि क्या एयरपोर्ट ऑपरेटर्स के साथ मिलकर कंपनी कोई सस्टेनेबल कॉस्ट स्ट्रक्चर तैयार कर पाएगी, खासकर जब 2028 की दूसरी तिमाही में कंपनी के बेड़े में वाइड-बॉडी Airbus A350 विमान शामिल होने वाले हैं।
शेयरधारकों के लिए अब मुख्य फोकस यह है कि कंपनी कैसे अपने कर्ज को मैनेज करती है और ग्लोबल स्तर पर ईंधन की अस्थिर कीमतों के बीच मुनाफे को वापस कैसे पटरी पर लाती है।
