फ्यूल की आसमान छूती कीमतों का असर: IndiGo का बड़ा ऐलान
IndiGo, भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन, 2 अप्रैल, 2026 से अपनी डोमेस्टिक और इंटरनेशनल उड़ानों के लिए फ्यूल सरचार्ज पॉलिसी में बदलाव कर रही है। यह कदम कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी तेजी के चलते उठाया गया है। वैश्विक संघर्ष और शिपिंग रूट में आई बाधाओं के कारण लागत बढ़ रही है, जो एयरलाइन के ऑपरेशनल खर्चों का 30-40% हिस्सा होती है और इस सेक्टर पर भारी दबाव बना रही है।
डोमेस्टिक और इंटरनेशनल रूट्स पर अलग-अलग सरचार्ज
डोमेस्टिक फ्लाइट्स के लिए, IndiGo 500 किलोमीटर तक की दूरी के लिए ₹275 से लेकर 2,000 किलोमीटर से ज़्यादा की यात्रा के लिए ₹950 तक का फ्यूल सरचार्ज लेगी। सरकार ने डोमेस्टिक जेट फ्यूल की कीमतों पर करीब 8.56% की कैप लगाई है, जिसके चलते यह दर दिल्ली में लगभग ₹1.04 लाख प्रति किलोलीटर तक पहुंच गई है। वहीं, इंटरनेशनल रूट्स पर यात्रियों को तेल की पूरी मार्केट-ड्रिवन बढ़त का असर झेलना पड़ेगा। एयरलाइन ने यह भी साफ किया है कि ये सरचार्ज बढ़ी हुई लागत का केवल एक हिस्सा ही कवर कर पाएंगे।
एविएशन सेक्टर पर बढ़ता दबाव, कंपटीटर्स भी उठा रहे कदम
IndiGo अकेली एयरलाइन नहीं है जो यह कदम उठा रही है। इस सेक्टर की दूसरी प्रमुख एयरलाइन्स भी इसी तरह के कदम उठा रही हैं। Air India ने 12 मार्च से फ्यूल सरचार्ज लगाना शुरू किया है, जो डोमेस्टिक टिकटों के लिए ₹399 है, जबकि इंटरनेशनल के लिए दरें अलग-अलग हैं। Akasa Air ने 15 मार्च से ₹199 से लेकर ₹1300 तक का सरचार्ज लागू किया है। कुल मिलाकर, भारतीय एविएशन सेक्टर एक मुश्किल दौर से गुज़र रहा है। रेटिंग एजेंसी ICRA ने इंडस्ट्री के लिए अपना आउटलुक 'नेगेटिव' कर दिया है और FY2026 के लिए ₹17,000-₹18,000 करोड़ का घाटा होने का अनुमान लगाया है। यह बढ़ते फ्यूल खर्चों और कमजोर होते रुपये के चलते है। फिलहाल ब्रेंट क्रूड ऑयल लगभग $105 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है।
फ्यूल सरचार्ज की क्लैरिटी और नए CEO की नियुक्ति से चमके IndiGo के शेयर
लेकिन, कंपनी के लिए एक अच्छी खबर यह भी है कि 1 अप्रैल, 2026 को IndiGo (InterGlobe Aviation Ltd.) के शेयर 8-10% तक उछल गए। इस तेजी के पीछे दो मुख्य वजहें रहीं - फ्यूल सरचार्ज की नई पॉलिसी से मिली साफ तस्वीर (pricing clarity) और पूर्व IATA चीफ विलियम वाल्श (William Walsh) के 3 अगस्त, 2026 से नए CEO बनने की घोषणा। शेयर लगभग ₹4,283 पर कारोबार कर रहे थे, जो 52-हफ्ते के निचले स्तर ₹3,894.80 से काफी ऊपर है। IndiGo का मार्केट कैप करीब ₹1.6-1.7 ट्रिलियन है।
एनालिस्ट्स की चिंताएं और भविष्य की चुनौतियां
हालांकि, इस स्टॉक रैली के बावजूद, एनालिस्ट्स (Analysts) अभी भी कुछ चिंताओं से घिरे हुए हैं। रेटिंग एजेंसी Moody's ने कहा है कि निकट भविष्य में कंपनी के मुनाफे (Profit) पर दबाव रह सकता है, खासकर इसलिए क्योंकि IndiGo के पास फ्यूल हेजिंग (Fuel Hedging) की सुविधा नहीं है, जो इसे कीमतों के उतार-चढ़ाव के प्रति ज़्यादा संवेदनशील बनाती है। वहीं, Goldman Sachs ने लागत में बढ़ोतरी और मध्य पूर्व से यात्रा की उम्मीदों में कमी का हवाला देते हुए FY2028 तक के लिए कंपनी के कमाई के अनुमानों (Earnings Estimates) को घटा दिया है। शॉर्ट-टर्म में FY27 के लिए भी कम मुनाफे की आशंका है। इसके अलावा, सप्लाई चेन की दिक्कतों के चलते जहाजों (Planes) की कम उपलब्धता भी लागत बढ़ा रही है। इन चुनौतियों के बावजूद, IndiGo की मजबूत वित्तीय स्थिति और कुशल संचालन इसे बाज़ार में अपने कमजोर प्रतिद्वंद्वियों से आगे निकलने में मदद कर सकते हैं, लेकिन कुल मिलाकर एविएशन इंडस्ट्री का आउटलुक अभी भी 'नेगेटिव' बना हुआ है।