रेगुलेटरी जांच का दायरा बढ़ा
कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) ने इंटरग्लोब एविएशन लिमिटेड (IndiGo) के खिलाफ एक विस्तृत जांच का आदेश दिया है। यह जांच दिसंबर 2025 में हुई मास फ्लाइट कैंसलेशन के मामले में की जा रही है। नियामक संस्था का आरोप है कि एयरलाइन ने अनुचित तरीके अपनाए और अपने प्रभुत्व (dominant position) का दुरुपयोग करते हुए कृत्रिम कमी (artificial scarcity) पैदा की। यह कदम भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन पर नियामक शिकंजे को कसता है, जिसकी डोमेस्टिक एविएशन मार्केट में ऐतिहासिक रूप से मजबूत पकड़ रही है।
जूरिसडिक्शन (Jurisdiction) की दलील खारिज
CCI ने IndiGo की उस दलील को खारिज कर दिया है कि यह मामला उसके अधिकार क्षेत्र (jurisdiction) में नहीं आता। रेगुलेटर ने एंटी-मार्केट डोमिनेंस कानूनों (antitrust laws) के तहत अपनी अथॉरिटी का हवाला दिया। जांच इस बात की पड़ताल करेगी कि क्या IndiGo के कार्य, जिसमें उसके बेड़े (fleet) का एक बड़ा हिस्सा ग्राउंडेड (grounded) रखा गया, एक प्रमुख कंपनी द्वारा सेवाओं के प्रावधान को प्रतिबंधित करने के बराबर है।
मार्केट डोमिनेंस (Market Dominance) पर सवाल
IndiGo का डोमेस्टिक एविएशन मार्केट शेयर 60% से 63% के बीच अनुमानित है, जो CCI की जांच का मुख्य बिंदु है। दिसंबर में कंपनी की ऑपरेशनल दिक्कतें नए क्रू रोस्टरिंग नियमों (crew rostering rules) के कारण और बढ़ गईं, जिसमें पायलटों के लिए बढ़ा हुआ आराम का समय (rest periods) अनिवार्य किया गया। अन्य एयरलाइंस जैसे एयर इंडिया (Air India) ने बेहतर योजना के साथ इसे संभाला।
मार्केट शेयर में बदलाव
इस जांच के समय, IndiGo का डोमेस्टिक मार्केट शेयर दिसंबर 2025 में घटकर 59.6% रह गया, जो नवंबर में 63.6% था। इसके विपरीत, एयर इंडिया ग्रुप (Air India Group) ने अपना शेयर बढ़ाकर 29.6% कर लिया। अकासा एयर (Akasa Air) और स्पाइसजेट (SpiceJet) ने भी थोड़ा फायदा उठाया। यह दिखाता है कि कैसे एक प्रमुख खिलाड़ी की ऑपरेशनल चूक प्रतिद्वंद्वियों के लिए अवसर पैदा कर सकती है।
वित्तीय आंकड़े और एनालिस्ट्स (Analysts) की राय
इंटरग्लोब एविएशन का P/E रेश्यो (P/E ratio) फरवरी 2026 की शुरुआत में लगभग 28.3x से 59.55x के बीच बताया गया है, और मार्केट कैपिटलाइजेशन (market capitalization) करीब ₹1,91,000 करोड़ है। विश्लेषकों (analysts) का कंसेंसस (consensus) ज्यादातर सकारात्मक है, जिसमें 'बाय' (Buy) रेटिंग और औसत प्राइस टारगेट (price target) लगभग ₹5,777 है, लेकिन इस नियामक कार्रवाई से अनिश्चितता का एक नया स्तर जुड़ गया है।
ऑपरेशनल कारण और भविष्य के निहितार्थ
फ्लाइट कैंसलेशन के पीछे मुख्य कारण स्ट्रिक्टर फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन्स (FDTL) और नए क्रू रोस्टरिंग नियमों को अपनाने में IndiGo की कठिनाई बताई जा रही है। डीजीसीए (DGCA) ने पहले पायलटों के लिए साप्ताहिक आराम के समय को 48 घंटे तक बढ़ाया था और सख्त नाइट लैंडिंग लिमिट्स (night landing limits) लागू की थीं। हालांकि बाद में डीजीसीए ने ऑपरेशनल दबाव को कम करने के लिए कुछ पहलुओं में ढील दी, लेकिन शुरुआती व्यवधानों के गंभीर परिणाम हुए।
जांच का निष्कर्ष 90 दिनों में
CCI की जांच, जो 90 दिनों के भीतर पूरी होने की उम्मीद है, एयरफेयर ट्रेंड्स (airfare trends), प्राइसिंग एल्गोरिदम (pricing algorithms), कैपेसिटी डिप्लॉयमेंट (capacity deployment) और अन्य मार्केट प्रैक्टिसेज (market practices) की जांच करेगी। इसके परिणाम से एयरलाइन को महत्वपूर्ण ऑपरेशनल समायोजन या वित्तीय दंड (financial penalties) का सामना करना पड़ सकता है, जो भविष्य की कमाई और कंपनी की बाजार स्थिति को प्रभावित कर सकता है।
सेक्टर की चुनौतियां
भारतीय एविएशन सेक्टर (aviation sector) पहले से ही चुनौतियों से जूझ रहा है, जहां फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY2026) में बढ़ते खर्च और ऑपरेशनल दिक्कतों के कारण इंडस्ट्री नेट लॉस (industry net losses) में वृद्धि का अनुमान है।
