Competition Commission of India (CCI) ने 4 फरवरी, 2026 को एक prima facie ऑर्डर जारी किया है, जिसके तहत CCI के Director General (DG) को InterGlobe Aviation Limited (IndiGo) के खिलाफ जांच शुरू करने का निर्देश दिया गया है। यह कदम मीडिया रिपोर्ट्स के बाद उठाया गया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि एयरलाइन ने दिसंबर में हुए बड़े फ्लाइट डिस्टर्बेंस के बाद जानबूझकर सीटों की 'आर्टिफिशियल कमी' पैदा की।
भारत के एविएशन सेक्टर में 60% से ज़्यादा मार्केट शेयर रखने वाली IndiGo पर अब एंटी-कम्पेटिटिव प्रैक्टिस (anti-competitive practices) के लिए जांच की जा रही है। 'आर्टिफिशियल शॉर्टेज' पैदा करने का आरोप सीधे तौर पर IndiGo की कैपेसिटी मैनेजमेंट (capacity management) और प्राइसिंग स्ट्रैटेजी (pricing strategy) को चुनौती देता है, खासकर ऐसे समय में जब ऑपरेशनल अस्थिरता (operational instability) थी।
अगर DG की जांच इन दावों को सही पाती है, तो IndiGo को गंभीर नतीजों का सामना करना पड़ सकता है। CCI के पास Competition Act, 2002 के उल्लंघन के लिए भारी जुर्माना लगाने का अधिकार है, जो पिछले तीन सालों के एवरेज टर्नओवर (average turnover) का 10% तक हो सकता है। यह जांच एक बड़ा रेगुलेटरी रिस्क (regulatory risk) पैदा करती है, जो एयरलाइन की ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी (operational flexibility) और मुनाफे (profitability) को प्रभावित कर सकती है।
IndiGo के लिए सबसे बड़ा जोखिम DG की जांच का नतीजा है। अगर कंपनी के खिलाफ फैसला आता है, तो भारी जुर्माने, प्रतिष्ठा को नुकसान और बिजनेस प्रैक्टिसेज (business practices) में बदलाव का सामना करना पड़ सकता है। Competition Act के तहत यह प्रक्रिया पहले शुरुआती असेसमेंट (initial assessment) और फिर अगर prima facie केस बनता है तो पूरी जांच से होकर गुजरती है। निवेशकों को IndiGo की प्रतिक्रिया और आगे के घटनाक्रम पर बारीकी से नज़र रखनी चाहिए।
