रेगुलेटर की जांच के दायरे में IndiGo की Dominance
गुरुवार को IndiGo (InterGlobe Aviation) के शेयरधारकों के लिए चिंता की खबर आई, जब शेयर की कीमतों में 3.65% की गिरावट दर्ज की गई, यह ₹4,782.45 तक गिर गया। वहीं NSE पर भी शेयर 3.63% लुढ़ककर ₹4,780.30 पर आ गया। इस गिरावट की मुख्य वजह Competition Commission of India (CCI) का वह आदेश है, जिसमें एयरलाइन के दिसंबर की शुरुआत में हुए बड़े पैमाने पर फ्लाइट कैंसलेशन की विस्तृत जांच करने का निर्देश दिया गया है। CCI की शुरुआती जांच में पाया गया है कि IndiGo ने अपनी Dominant Position का गलत इस्तेमाल करके सेवाओं की कृत्रिम कमी पैदा की हो सकती है। अगर यह साबित होता है, तो यह Competition Act की धारा 4(2)(b)(i) का उल्लंघन होगा।
यह जांच विशेष रूप से 3 दिसंबर से 5 दिसंबर के बीच हुई हजारों फ्लाइट कैंसलेशन पर केंद्रित है, जिसने 300,000 से अधिक यात्रियों को प्रभावित किया था। रेगुलेटर के 16 पन्नों के विस्तृत आदेश में कहा गया है कि IndiGo की निर्धारित क्षमता का एक बड़ा हिस्सा, यानी हजारों फ्लाइट्स को रद्द करके, उच्च यात्रा मांग वाले समय में सेवाओं को बाजार से हटा लिया गया था। CCI ने इस जांच के लिए 'भारत में घरेलू हवाई यात्री परिवहन सेवाओं का बाजार' (market for domestic air passenger transport services in India) को प्रासंगिक बाजार माना है। IndiGo द्वारा CCI के अधिकार क्षेत्र पर उठाई गई आपत्ति को सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के फैसलों का हवाला देते हुए खारिज कर दिया गया।
मार्केट शेयर में बदलाव के बीच Dominant Position की जांच
IndiGo भारतीय विमानन बाजार में एक बड़ा खिलाड़ी है, जो लगातार घरेलू उड़ानों में उपलब्ध सीट किलोमीटर (Available Seat Kilometres - ASKMs) का लगभग 60-61% हिस्सा रखती है। हालांकि, दिसंबर में इसका मार्केट शेयर नवंबर के 63% से थोड़ा घटकर 59.6% रह गया था। वहीं, Air India Group ने अपना हिस्सा बढ़ाकर 29.6% कर लिया, जबकि Akasa Air और SpiceJet जैसी अन्य एयरलाइंस ने भी मामूली बढ़त हासिल की। यह दर्शाता है कि ऑपरेशनल दिक्कतें प्रतिद्वंद्वियों के लिए अवसर पैदा कर सकती हैं। CCI ने IndiGo की Dominant Position के सबूत के तौर पर इसके लगातार मार्केट शेयर, व्यापक नेटवर्क, विशिष्ट सिटी-पेयर रूट्स, बड़े बेड़े (fleet) और मजबूत वित्तीय प्रदर्शन का हवाला दिया है। यह जांच ऐसे समय में हुई है जब एयरलाइन पहले से ही Directorate General of Civil Aviation (DGCA) की जांच के दायरे में है, जिसने फरवरी 10 तक इसकी विंटर शेड्यूल में 10% की कटौती की थी।
ऐतिहासिक संदर्भ, सेक्टर आउटलुक और एनालिस्ट की राय
यह Antitrust जांच नियामकीय जांच के बढ़ते दौर का हिस्सा है। जनवरी 2026 में, भारतीय नियामकों ने बड़े पैमाने पर कैंसलेशन के संबंध में 'अपर्याप्त समग्र निगरानी' (inadequate overall oversight) के लिए $2.4 मिलियन का जुर्माना लगाया था और चेतावनी भी दी थी। उस समय, विश्लेषकों ने इस जुर्माने को IndiGo की बैलेंस शीट की तुलना में महत्वहीन माना था, और कुछ का मानना था कि नियामक अनिश्चितताएं पीछे छूट गई थीं, जिसके कारण शेयर में उछाल आया था। हालांकि, वर्तमान CCI जांच अधिक गंभीर है, जो परिचालन निगरानी के बजाय प्रतिस्पर्धा के दुरुपयोग पर केंद्रित है।
वित्तीय मोर्चे पर, InterGlobe Aviation का मूल्यांकन 28.3x से 59.55x के बीच P/E रेश्यो के साथ हुआ है, जिसमें जनवरी 24, 2026 तक पिछले बारह महीनों (TTM) का P/E लगभग 35.63x था। कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग ₹1.91 ट्रिलियन था। हालांकि IndiGo का ROE (Return on Equity) लगभग 104% पर मजबूत है, लेकिन इसका प्राइस-टू-बुक (Price-to-Book) रेश्यो लगभग 22.23x है।
इसके विपरीत, व्यापक भारतीय विमानन क्षेत्र एक मजबूत विकास गाथा प्रस्तुत करता है। Economic Survey 2025-26 के अनुसार, यात्री यातायात FY31 तक 665 मिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। इसे UDAN जैसी सरकारी पहलों और महत्वपूर्ण हवाई अड्डा अवसंरचना विकास का समर्थन प्राप्त है। उम्मीद है कि 2035 तक बेड़ा लगभग 2,200 विमानों तक तीन गुना हो जाएगा। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाजार बनने की राह पर है।
इस वर्तमान नियामक बाधा के बावजूद, विश्लेषकों की भावना सतर्क रूप से आशावादी बनी हुई है। एक 'Buy' कंसेंसस रेटिंग और लगभग ₹5,777 का औसत प्राइस टारगेट है, जो हाल के ट्रेडिंग स्तरों से लगभग 21.38% की संभावित बढ़त का सुझाव देता है। फिर भी, CCI जांच एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक प्रस्तुत करती है जो भविष्य की परिचालन रणनीतियों, विकास प्रक्षेपवक्र और निवेशक धारणा को प्रभावित कर सकती है। हाल की ट्रेडिंग गतिविधि में IndiGo पर पुट ऑप्शन (put option) की मात्रा में वृद्धि देखी गई है, जो कुछ व्यापारियों द्वारा संभावित गिरावट के लिए पोजीशनिंग का संकेत देती है। CCI के महानिदेशक (Director General) को 90 दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपने का काम सौंपा गया है।
