IndiGo के कार्गो बिज़नेस ने कैलेंडर ईयर 2025 में 11% की ईयर-ऑन-ईयर (Year-on-Year) ग्रोथ हासिल की, जो बाज़ार की ग्रोथ रेट से भी आगे रही। कंपनी ने कुल 438,147 टन कार्गो ढोया। इस दमदार परफॉरमेंस का मुख्य कारण यात्री विमानों में बढ़ी हुई 'बेली कार्गो' (Belly Cargo) क्षमता और तीन नए समर्पित फ्रेटर (Freighter) विमानों की तैनाती है। कंपनी के लिए डोमेस्टिक कार्गो बिज़नेस का हिस्सा 80% है, जबकि इंटरनेशनल ऑपरेशंस और डेडिकेटेड फ्रेटर्स में से प्रत्येक का योगदान 10% है। वहीं, दुनिया भर में एयर कार्गो की मांग में 3.4% की बढ़ोतरी देखी गई, जिसमें इंटरनेशनल सेग्मेंट्स 4.2% बढ़े। IndiGo ने अपने विशाल डोमेस्टिक नेटवर्क का फायदा उठाते हुए इंटरनेशनल पहुंच का विस्तार किया है।
IndiGo की कार्गो स्ट्रेटेजी अब वाइड-बॉडी (Wide-body) एयरक्राफ्ट्स के ज़रिए लॉन्ग-हॉल (Long-haul) क्षमताओं को बढ़ाने पर टिकी है। एयरलाइन ने बोइंग 787-9s लीज पर लिए हैं और एयरबस A350s का बड़ा ऑर्डर दिया है, जिनकी डिलीवरी 2027 से शुरू होगी। यह फ्लीट विस्तार यूरोप और दक्षिण पूर्व एशिया जैसे मुनाफे वाले मार्केट्स के लिए अहम है। इन रूटों पर क्षमता बढ़ाने के लिए Air France-KLM और FedEx जैसे लॉजिस्टिक्स जायंट्स (Logistics Giants) के साथ पार्टनरशिप (Partnerships) भी महत्वपूर्ण हैं। यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब Air India अपनी कार्गो क्षमता को पांच साल में 300% बढ़ाने और सालाना 20 लाख टन ढोने का लक्ष्य लेकर चल रही है, वहीं SpiceJet को वित्तीय बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। भारत का एयर कार्गो मार्केट 2025 में 14.22 अरब डॉलर का था और 2035 तक 5.80% के सीएजीआर (CAGR) से बढ़ने का अनुमान है। ई-कॉमर्स, फार्मा और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे हाई-वैल्यू एक्सपोर्ट इसकी ग्रोथ को बढ़ा रहे हैं। हालांकि, वैश्विक कार्गो यील्ड्स (Yields) में 1.5% की गिरावट आई है, पर ये प्री-पैंडेमिक स्तरों से काफी ऊपर हैं।
इस वॉल्यूम ग्रोथ के बावजूद, IndiGo के ऑपरेशनल एक्ज़ेक्यूशन (Operational Execution) पर सवाल उठ रहे हैं। दिसंबर 2025 में क्रू (Crew) के लिए नई फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (Flight Duty Time Limitation - FDTL) नॉर्म्स लागू होने और संभावित एयरक्राफ्ट सॉफ्टवेयर अपडेट्स के कारण बड़े पैमाने पर फ्लाइट कैंसलेशन (Flight Cancellations) हुए। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने IndiGo के सीईओ (CEO) को एक शो-कॉज नोटिस (Show-cause Notice) जारी कर प्लानिंग और ओवरसाइट (Oversight) में कमी का हवाला दिया। इन व्यवधानों ने न केवल यात्रियों का भरोसा तोड़ा है, बल्कि क्रू मैनेजमेंट, रिफंड और ऑपरेशनल रिकवरी (Operational Recovery) से जुड़ी लागतें भी बढ़ा दी हैं। कुछ एनालिस्ट्स (Analysts) ने चेतावनी दी है कि इससे 'लगातार कॉस्ट प्रेशर' (Cost Pressure) बना रह सकता है और कॉस्ट पर अवेलेबल सीट किलोमीटर (CASK) बढ़ सकती है। इसी के चलते JM Financial जैसी ब्रोकरेजेज़ ने 'Reduce' रेटिंग देते हुए कहा है कि निवेशकों ने स्ट्रक्चरल कॉस्ट इंक्रीज (Structural Cost Increase) और संभावित रेगुलेटरी पेनल्टीज़ (Regulatory Penalties) की पूरी कीमत अभी नहीं आंकी है।
लंबे समय को देखें तो ब्रोकरेजेज़ IndiGo के प्रति पॉजिटिव रुख बनाए हुए हैं। वे इसकी मार्केट लीडरशिप, कॉस्ट कॉम्पिटिटिवनेस (Cost Competitiveness) और मजबूत ऑर्डर बुक को देखते हुए 'Buy' रेटिंग दे रहे हैं, जैसे Jefferies और UBS ने भी। हालांकि, UBS ने ऑपरेशनल चुनौतियों के चलते अपने प्राइस टारगेट को थोड़ा कम किया है। निकट भविष्य में बढ़ी हुई लागतों और रेगुलेटरी एक्शन्स (Regulatory Actions) जैसी बाधाएं हैं, लेकिन ओवरऑल सेंटीमेंट (Sentiment) यही है कि IndiGo की स्ट्रेटेजिक पहलें, खासकर इंटरनेशनल विस्तार और कार्गो पर फोकस, भविष्य में ग्रोथ दिलाएंगे। IATA के अनुसार, 2026 में ग्लोबल एयर कार्गो मार्केट में मॉडरेट ग्रोथ का अनुमान है, जिसमें मांग 2.4% रहने की उम्मीद है। IndiGo की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह इन ऑपरेशनल जटिलताओं से कैसे निपटती है और बढ़ती ग्लोबल मांग का कितना फायदा उठा पाती है।