ब्रोकरेज की राय: CEO के जाने से नहीं बदलेगा फ्यूचर
11 मार्च 2026 को, InterGlobe Aviation (IndiGo) के शेयर 3% तक ऊपर चढ़ गए। ब्रोकरेज हाउस HSBC और Jefferies ने कंपनी के CEO Pieter Elbers के इस्तीफे के बावजूद, स्टॉक पर 'Buy' रेटिंग को बरकरार रखा है। HSBC ने टारगेट प्राइस ₹5,860 और Jefferies ने ₹6,140 रखा है। दोनों फर्मों का मानना है कि Elbers ने व्यक्तिगत कारणों से इस्तीफा दिया है और इससे कंपनी की रणनीति में कोई बड़ा बदलाव नहीं आएगा। संस्थापक Rahul Bhatia ने अंतरिम CEO का पद संभाला है, जिसे एनालिस्ट्स कंपनी के अनुभव का लाभ उठाने और निरंतरता बनाए रखने का कदम मान रहे हैं।
हाई वैल्यूएशन पर भारी मुनाफा गिरावट और देरी
इस पॉजिटिव रिएक्शन के बावजूद, IndiGo के हाई वैल्यूएशन पर सवाल उठ रहे हैं। कंपनी का Trailing Twelve Months (TTM) P/E रेश्यो लगभग 36.7x है, जो मार्च की शुरुआत में कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक 51x-53x के बीच बताया जा रहा था। यह ऐतिहासिक औसत से काफी ज्यादा है। इससे पता चलता है कि निवेशक भविष्य में बड़ी ग्रोथ की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन हाल के नतीजे इस उम्मीद को झटका दे सकते हैं। IndiGo ने Q3 FY26 में नेट प्रॉफिट में 78% की भारी गिरावट दर्ज की, जो घटकर ₹550 करोड़ रह गया। वहीं, ऑपरेशंस से होने वाली कमाई 6% गिरकर ₹23,472 करोड़ हो गई। दिसंबर 2025 में क्रू शेड्यूलिंग इश्यूज और सख्त फ्लाइट ड्यूटी नियमों के कारण 4,500 से ज्यादा फ्लाइट्स लेट या कैंसिल हुई थीं, जिसने नतीजों पर असर डाला।
भू-राजनीति, फ्यूल कॉस्ट और कंपीटिशन का खतरा
एयरलाइन सेक्टर वैश्विक घटनाओं के प्रति बहुत संवेदनशील है। मार्च 2026 की शुरुआत में कच्चे तेल की कीमतों का $110 प्रति बैरल से ऊपर जाना, एयरलाइंस की प्रॉफिटेबिलिटी के लिए सीधा खतरा है, क्योंकि फ्यूल खर्च उनके कुल ऑपरेशंस का करीब 40% होता है। इससे IndiGo पहले ही प्रभावित हो चुकी है, और मध्य पूर्व पर हवाई क्षेत्र प्रतिबंधों के कारण फ्लाइट्स कैंसिल करनी पड़ी हैं और रूट बदलने पड़े हैं। UBS ने चेतावनी दी है कि भू-राजनीतिक तनाव, ऊंचे क्रूड प्राइसेज और कमजोर रुपए से एयरलाइन की क्षमता और कमाई पर काफी असर पड़ सकता है, जिसके लिए और भी सतर्क वैल्यूएशन की जरूरत है। हालांकि IndiGo भारतीय बाजार में दबदबा रखती है, लेकिन Akasa Air और Tata-owned Air India ग्रुप जैसे कंपटीटर विस्तार कर रहे हैं, जिससे मुकाबला बढ़ सकता है। कंपनी को डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) से पिछले ऑपरेशनल गड़बड़ियों के लिए ₹22.20 करोड़ का जुर्माना भी भरना पड़ा है।
आगे क्या: वैल्यूएशन की चिंता के बीच ऑपरेशंस को स्थिर करना
आगे चलकर, निवेशक ऑपरेशनल स्थिरता, परमानेंट CEO की खोज और तेल की कीमतों पर नजर रखेंगे। Jefferies और HSBC जैसी ब्रोकरेज फर्मों ने अपनी 'Buy' रेटिंग बनाए रखी है, और वे मौजूदा स्तरों से ग्रोथ की उम्मीद कर रहे हैं। Trendlyne के एनालिस्ट्स ने ₹5,760 के कंसेंसस टारगेट प्राइस के साथ 'Buy' रेटिंग दी है, और Investing.com के एनालिस्ट्स ₹5,732.80 का 12-महीने का टारगेट बता रहे हैं। हालांकि, स्टॉक के वैल्यूएशन को लेकर चिंता बनी हुई है। हाल ही में IndiGo के शेयर NIFTY 50 इंडेक्स से कमजोर प्रदर्शन कर रहे हैं; मार्च 2026 में शेयर 9% से ज्यादा गिरे, जबकि इंडेक्स 3.7% चढ़ा। पिछले एक साल में IndiGo के शेयर करीब 6.1% गिरे हैं, वहीं Nifty 50 ने 7.7% का रिटर्न दिया है। इन सबके बावजूद, IndiGo का मार्केट कैप लगभग ₹1.7 लाख करोड़ है, जो इसे भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन के तौर पर स्थापित करता है।