IndiGo की निवेश शाखा, IndiGo Ventures, ने इलेक्ट्रिक फ्लाइंग टैक्सी (eVTOL Aircraft) बनाने वाली कंपनी Sarla Aviation में ₹10 करोड़ का निवेश किया है। यह कदम Future Urban Air Mobility में IndiGo का एक बड़ा दांव माना जा रहा है, जबकि कंपनी खुद अपने मुख्य एयरलाइन बिजनेस में चल रही मुश्किलों से जूझ रही है।
Sarla Aviation के प्लान्स
Sarla Aviation हाइब्रिड-इलेक्ट्रिक eVTOL एयरक्राफ्ट बना रही है। कंपनी का लक्ष्य 2028 तक बेंगलुरु (Bengaluru) में अपनी 'Shunya' फ्लाइंग टैक्सी लॉन्च करने का है। अब तक Sarla Aviation $13.4 मिलियन जुटा चुकी है, जिसमें जनवरी 2025 में Accel की अगुवाई वाला $10 मिलियन का राउंड भी शामिल है। हालांकि, यह राशि Joby Aviation और Archer Aviation जैसे ग्लोबल eVTOL लीडर्स द्वारा जुटाए गए अरबों डॉलर की तुलना में काफी कम है।
IndiGo की मौजूदा मुश्किलें
दूसरी ओर, IndiGo का मुख्य एयरलाइन बिजनेस फिलहाल मुश्किलों में है। कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2026 की दूसरी तिमाही में ₹26.1 बिलियन का नेट लॉस (Net Loss) दर्ज किया है, जिसका एक मुख्य कारण फॉरेन एक्सचेंज (Foreign Exchange) लॉस रहा। इसके अलावा, फ्लाइट्स में होने वाली देरी और ऑपरेटिंग कॉस्ट (Operating Cost) में बढ़ोतरी से भी कंपनी परेशान है।
एनालिस्ट्स की राय
इन शॉर्ट-टर्म दिक्कतों के बावजूद, एनालिस्ट्स IndiGo के लिए लॉन्ग-टर्म में पॉजिटिव आउटलुक (Outlook) रख रहे हैं। कंसेंसस टारगेट प्राइस (Consensus Price Target) ₹4,500 से ₹5,500 के बीच है, और कुछ एनालिस्ट्स तो इसे ₹7,300 तक भी ले जा रहे हैं। अप्रैल 2026 तक एयरलाइन का शेयर लगभग ₹4,200-₹4,700 के आसपास ट्रेड कर रहा था। इंजन की दिक्कतें सुलझना, नए एयरक्राफ्ट की डिलीवरी और इंटरनेशनल रूट्स का विस्तार जैसे फैक्टर इस पॉजिटिव आउटलुक को सपोर्ट कर रहे हैं।
फ्लाइंग टैक्सी का रेगुलेटरी परिदृश्य
भारत में डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) फ्लाइंग टैक्सी ऑपरेशंस के लिए नियम बना रहा है। इसमें सेफ्टी सर्टिफिकेशन (Safety Certification), पायलट लाइसेंस (Pilot Licenses), लैंडिंग साइट्स (Vertiports) और एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट (Air Traffic Management) जैसे मानक शामिल होंगे। हालांकि, सर्टिफिकेशन और वर्टिपोर्ट्स के लिए कुछ गाइडेंस उपलब्ध है, लेकिन पूरी तरह ऑपरेशनल रूल्स अभी भी डेवलप किए जा रहे हैं। ग्लोबली, eVTOL मार्केट 2035 तक $216 बिलियन से अधिक होने की उम्मीद है। लेकिन, यह सेक्टर बहुत कॉम्पिटिटिव (Competitive) है, जिसमें सैकड़ों प्रोग्राम्स चल रहे हैं और कुछ बड़े खिलाड़ी ही अधिकांश ऑर्डर्स पर कब्जा किए हुए हैं।
Sarla Aviation के लिए रिस्क
Sarla Aviation के 2028 के महत्वाकांक्षी लॉन्च टारगेट के सामने कई बड़ी बाधाएं हैं। भारत में रेगुलेटरी अप्रूवल (Regulatory Approval) की गति एक महत्वपूर्ण फैक्टर है। साथ ही, कंपनी ने इंटरनेशनल प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में काफी कम कैपिटल (Capital) जुटाई है, जिससे प्रोडक्शन को बढ़ाना और सर्टिफिकेशन पाना एक बड़ी चुनौती होगी। IndiGo का Archer Aviation के साथ पुराना अनुभव भी इन दिक्कतों को दिखाता है, क्योंकि टाइमलाइन के इश्यू के चलते Archer के साथ एक प्लान्ड पार्टनरशिप भी फाइनल नहीं हो पाई थी। 2028 तक जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप करने और अप्रूवल हासिल करने पर Sarla की निर्भरता अभी अनिश्चित बनी हुई है।