IndiGo में बड़ा फेरबदल: किरण थडिमार्री बने नए CFO, ₹1.14 करोड़ के कस्टम ड्यूटी आदेश को चुनौती देगी एयरलाइन

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
IndiGo में बड़ा फेरबदल: किरण थडिमार्री बने नए CFO, ₹1.14 करोड़ के कस्टम ड्यूटी आदेश को चुनौती देगी एयरलाइन

इंडिगो (IndiGo) की पैरेंट कंपनी इंटरग्लोब एविएशन (InterGlobe Aviation) ने अपने सीनियर मैनेजमेंट में बड़ा बदलाव किया है। कंपनी ने किरण थडिमार्री को 28 जुलाई से प्रभावी नया चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) नियुक्त किया है। इसके साथ ही, एयरलाइन 2020 से 2024 के बीच आयात वर्गीकरण से संबंधित ₹1.14 करोड़ के कस्टम ड्यूटी और जुर्माने के आदेश को चुनौती देने की तैयारी में है।

Detailed Coverage

नेतृत्व परिवर्तन: किरण थडिमार्री संभालेंगे CFO का पद

इंडिगो (IndiGo) की मूल कंपनी इंटरग्लोब एविएशन (InterGlobe Aviation) ने अपने नेतृत्व में एक अहम बदलाव की घोषणा की है। किरण थडिमार्री (Kiran Thadimarri) 28 जुलाई से एयरलाइन के नए चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) का पदभार संभालेंगे। थडिमार्री, जो एक चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं और 24 साल से अधिक का अनुभव रखते हैं, वर्तमान में डिप्टी सीएफओ (Deputy CFO) के पद पर कार्यरत थे। इससे पहले वे उड़ान (Udaan) और जनरल इलेक्ट्रिक (General Electric) जैसी कंपनियों में भी काम कर चुके हैं। मौजूदा सीएफओ, गौरव नेगी (Gaurav Negi), अब मैनेजिंग डायरेक्टर के सलाहकार के तौर पर नई भूमिका निभाएंगे।

कस्टम ड्यूटी विवाद: ₹1.14 करोड़ के आदेश पर उठे सवाल

एक अलग अपडेट में, एयरलाइन ने खुलासा किया है कि उन्हें नई दिल्ली के प्रिंसिपल कमिश्नर ऑफ कस्टम्स (Principal Commissioner of Customs) से एक आदेश मिला है। यह आदेश अप्रैल 2020 से मार्च 2024 के बीच आयातित कुछ वस्तुओं के वर्गीकरण (classification) को लेकर टैक्स विवाद से संबंधित है। इस आदेश के तहत कंपनी पर कस्टम ड्यूटी, ब्याज और जुर्माने के रूप में कुल ₹1,14,17,541 का भुगतान करने का निर्देश दिया गया है।

इंडिगो ने स्पष्ट किया है कि वे इस फैसले से असहमत हैं और संबंधित अपीलीय प्राधिकरण (appellate authority) के समक्ष इस आदेश को चुनौती देने की योजना बना रहे हैं। कंपनी ने शेयरधारकों और निवेशकों को आश्वासन दिया है कि इस कर संबंधी मामले का उनके वित्तीय स्थिति या दैनिक परिचालन पर कोई खास (material) प्रभाव पड़ने की उम्मीद नहीं है।

एविएशन सेक्टर में कस्टम्स का महत्व

भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन के रूप में, इंडिगो अक्सर विमान के पुर्जों और रखरखाव उपकरणों के आयात से जुड़े जटिल नियमों का प्रबंधन करती है। एविएशन सेक्टर, जो कि एक पूंजी-गहन (capital-intensive) उद्योग है, में ऐसे कस्टम वर्गीकरण विवाद आम हैं। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (supply chains) की जटिलताओं और तकनीकी उपकरणों के बदलते सरकारी वर्गीकरण के कारण, भारत की बड़ी एयरलाइनों को ऐतिहासिक रूप से ऐसे कर और शुल्क संबंधी जांच का सामना करना पड़ा है। निवेशक आमतौर पर ऐसे कर विवादों पर नजर रखते हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे नियंत्रण में रहें और कंपनी की लेखांकन प्रथाओं (accounting practices) या नियामक अनुपालन (regulatory compliance) में किसी गहरी समस्या का संकेत न दें। इस मांग का आकार कंपनी के हजारों करोड़ के राजस्व की तुलना में अपेक्षाकृत छोटा है, इसलिए बाजार संभवतः नेतृत्व परिवर्तन और एयरलाइन की लागत प्रबंधन व अंतरराष्ट्रीय विस्तार की दीर्घकालिक रणनीति पर अधिक ध्यान केंद्रित करेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.