2 नवंबर, 2026 को एक संसदीय पैनल ने हवाई टिकटों की बढ़ती कीमतों को लेकर IndiGo और Air India के टॉप अधिकारियों से जवाब-तलब किया। यह पूछताछ ऐसे समय में हुई है जब सरकार ने नए नियमों का ऐलान किया है, जिसके तहत आपात स्थिति में टिकट की कीमतों में दखल दिया जा सकेगा।
संसद की एक कमिटी, जिसकी अध्यक्षता बैजयंत पांडा कर रहे हैं, ने 2 नवंबर, 2026 को IndiGo और Air India के बड़े अधिकारियों से आम जनता की जेब पर पड़ रहे भारी बोझ के बारे में सवाल किए। एयरलाइंस ने अपनी सफाई में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों और करेंसी में हो रही उठापटक को मुख्य वजह बताया है।
नया रेगुलेटरी रिस्क
निवेशकों के लिए यह घटनाक्रम एक बड़े बदलाव का संकेत है। सरकार ने 'भारतीय वायुयान नियम, 2026' नोटिफाई कर दिया है जो 1 जनवरी, 2027 से लागू होगा। यह कानून सरकार को असामान्य परिस्थितियों में टिकट के दाम तय करने का अधिकार देता है। हालांकि सामान्य स्थितियों में मार्केट-आधारित कीमतें ही चलेंगी, लेकिन यह नया नियम भविष्य में एयरलाइंस की प्राइसिंग पावर के लिए एक बड़ा 'वेरिएबल' बन सकता है।
फाइनेंशियल सेहत पर असर
इंडस्ट्री के बिगड़ते हालात नतीजों में साफ दिख रहे हैं। IndiGo ने Q2 FY2027 में ₹18,791 मिलियन का कंसोलिडेटेड नेट लॉस दर्ज किया है। कंपनी का फ्यूल कॉस्ट पर अवेलेबल सीट किलोमीटर (CASK) 68.9% उछल गया, जबकि यील्ड्स (प्रति यात्री कमाई) में सिर्फ 34.3% की बढ़त दिखी। इसका मतलब साफ है कि टिकट महंगे करने के बावजूद एयरलाइंस अपनी लागत निकालने में संघर्ष कर रही हैं।
आगे की राह
ऑपरेशनल चुनौतियों के बीच, निवेशक अब यह देख रहे हैं कि क्या नई रेगुलेटरी पॉलिसी एयरलाइंस के मार्जिन पर दबाव बढ़ाएगी। फिलहाल IndiGo अपने फ्लीट एक्सपेंशन पर काम कर रही है, जिसमें भविष्य में एयरबस A350 को शामिल करने की योजना है, लेकिन मार्जिन की स्थिरता ही निवेशकों के लिए सबसे बड़ा 'मॉनिटरेबल' फैक्टर बना रहेगा।
