भारत की दो सबसे बड़ी एयरलाइंस IndiGo और Air India को पायलटों की भारी कमी के चलते अपनी फ्लाइट्स में **5% से 15%** तक की कटौती करनी पड़ी है। सख्त पायलट रेस्ट रूल्स और स्टाफ की किल्लत ने एयरलाइंस के ऑपरेशनल और फाइनेंशियल मोर्चे पर मुश्किल बढ़ा दी है।
सख्त हुए नियम, घटी फ्लाइट्स
उड्डयन क्षेत्र में ऑपरेशनल बाधाएं लगातार बढ़ रही हैं। Directorate General of Civil Aviation (DGCA) द्वारा लागू किए गए नए Flight Duty Time Limitation (FDTL) नियमों के कारण पायलटों के लिए रेस्ट पीरियड को काफी कड़ा कर दिया गया है। सुरक्षा और थकान को कम करने के उद्देश्य से लाए गए ये नियम अब एयरलाइंस के लिए एक बड़ी चुनौती बन गए हैं। अब समान संख्या में उड़ानों को जारी रखने के लिए एयरलाइंस को पहले की तुलना में कहीं अधिक पायलटों की जरूरत है, जिसकी पूर्ति करना इस समय बहुत कठिन हो रहा है।
रिक्रूटमेंट की जंग और बॉन्ड का रोड़ा
एयरलाइंस के बीच अनुभवी कमांडर पाने की होड़ मची है। भर्ती के लिए बड़े अभियान चलाने के बावजूद, टैलेंट को रोकना आसान नहीं है। सबसे बड़ी बाधा एयरलाइंस द्वारा लगाए जाने वाले बॉन्ड हैं, जो ₹20 लाख तक पहुंच सकते हैं। ये फाइनेंशियल बॉन्ड पायलटों की आवाजाही को सीमित करते हैं, जबकि मिडिल ईस्ट की इंटरनेशनल एयरलाइंस कहीं अधिक आकर्षक सैलरी और बेहतर शर्तें ऑफर कर रही हैं।
फाइनेंशियल दबाव और मार्केट पर असर
इन चुनौतियों का सीधा असर फाइनेंशियल रिजल्ट्स पर दिख रहा है। IndiGo को FY26 में नेट लॉस का सामना करना पड़ा है। इस पर से Aviation Turbine Fuel (ATF) की बढ़ती कीमतों और कमजोर रुपये ने लागत का बोझ और बढ़ा दिया है। चूंकि देश के 90% से अधिक मार्केट शेयर पर इन दो एयरलाइंस का कब्जा है, इसलिए इस बढ़ती लागत का बोझ सीधे ग्राहकों पर डालना भी चुनौतीपूर्ण है।
FAA ऑडिट का खतरा
आने वाले समय में अमेरिकी रेगुलेटर U.S. Federal Aviation Administration (FAA) की ओर से एक महत्वपूर्ण सेफ्टी ऑडिट होना है। यदि इसमें रेटिंग डाउनग्रेड होती है, तो इन कंपनियों के इंटरनेशनल रूट विस्तार और कोड-शेयर एग्रीमेंट्स पर रोक लग सकती है। एयर इंडिया ने भर्ती प्रक्रिया में बदलाव किए हैं, लेकिन ये कदम अल्पकाल में कितने कारगर साबित होंगे, इस पर निवेशकों की पैनी नजर बनी हुई है।
