IndiGo के यात्रियों को झटका! Jet Fuel की रिकॉर्ड बढ़त, कंपनी ने लगाया 'Fuel Surcharge'

TRANSPORTATION
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AuthorMehul Desai|Published at:
IndiGo के यात्रियों को झटका! Jet Fuel की रिकॉर्ड बढ़त, कंपनी ने लगाया 'Fuel Surcharge'
Overview

पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और Jet Fuel की आसमान छूती कीमतों के चलते भारतीय एविएशन सेक्टर गंभीर वित्तीय दबाव में आ गया है। मार्केट लीडर IndiGo ने बढ़ती लागतों को पूरा करने के लिए फ्यूल सरचार्ज (Fuel Surcharge) लागू कर दिया है, जिसका असर SpiceJet और Akasa Air जैसी अन्य एयरलाइंस पर भी दिख रहा है। यह स्थिति भारत में व्यापक महंगाई (Inflation) को लेकर चिंताएं बढ़ा रही है।

एविएशन इंडस्ट्री पर गहराता संकट

भारतीय एविएशन इंडस्ट्री इस समय भारी वित्तीय दबाव का सामना कर रही है। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में लगातार उछाल के कारण एयरलाइंस पर कमरतोड़ बोझ पड़ रहा है। रेटिंग एजेंसी ICRA ने 27 मार्च, 2026 को इंडस्ट्री का आउटलुक 'स्टेबल' से घटाकर 'नेगेटिव' कर दिया है। इसके पीछे मुख्य कारण भू-राजनीतिक तनाव, कमजोर पड़ता रुपया और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के बढ़ते दाम बताए गए हैं। इन सबके चलते एयरलाइंस को FY2026 में ₹170-180 अरब तक का बड़ा घाटा होने का अनुमान है।

IndiGo का बड़ा फैसला: फ्यूल सरचार्ज लागू

पश्चिम एशिया संकट ने क्रूड ऑयल की कीमतों को फरवरी 2026 तक लगभग $105 प्रति बैरल और 30 मार्च, 2026 तक $113 तक पहुंचा दिया। एयरलाइंस के कुल ऑपरेटिंग खर्चों का 30-40% हिस्सा ATF पर ही जाता है, इसलिए इन बढ़ी कीमतों का सीधा असर कंपनियों पर पड़ा। इसी को देखते हुए मार्केट लीडर IndiGo ने 14 मार्च, 2026 से फ्यूल सरचार्ज लागू कर दिया है। अब डोमेस्टिक फ्लाइट्स के लिए प्रति सेक्टर ₹425 और इंटरनेशनल रूट्स के लिए ₹900 से ₹2,300 तक का अतिरिक्त चार्ज लिया जाएगा।

ब्रोकरेज की राय और शेयर पर असर

हालांकि, ब्रोकरेज फर्म Citi का मानना है कि यह सरचार्ज बढ़ी हुई फ्यूल लागत का केवल एक हिस्सा ही कवर कर पाएगा, जिससे IndiGo पर मार्जिन का दबाव बना रहेगा। इस बीच, IndiGo के शेयरों में भी गिरावट देखी गई है। मार्च 2026 में ये शेयर 11% से अधिक लुढ़क गए, वहीं 9 मार्च, 2026 को तो शेयर में 8% की भारी गिरावट आई थी। स्टॉक का RSI 39.49 है, जो बताता है कि यह फिलहाल एवरेज मोमेंटम से नीचे ट्रेड कर रहा है।

SpiceJet की हालत ज्यादा खराब

अन्य भारतीय एयरलाइंस की बात करें तो, IndiGo की मार्केट कैप लगभग ₹1.6 लाख करोड़ है और इसका P/E रेश्यो 34.6 से 52.96 (मार्च 2026 तक) है, जो इसके मार्केट पोजीशन और ग्रोथ की उम्मीद दिखाता है। वहीं, SpiceJet की मार्केट कैप सिर्फ ₹1,564 करोड़ है और इसका P/E रेश्यो नेगेटिव (-0.91 से -2.02) है, जो भारी वित्तीय संकट का संकेत देता है। SpiceJet के शेयर पिछले एक साल में लगभग 78% गिर चुके हैं।

महंगाई पर भी दिखेगा असर

भारतीय रुपये के कमजोर होने से भी एयरलाइंस की मुश्किलें बढ़ी हैं, क्योंकि उनके 35-50% खर्च डॉलर में होते हैं, जिससे फॉरेन एक्सचेंज लॉस बढ़ता है। एविएशन सेक्टर का यह संकट भारत में व्यापक आर्थिक दबावों का भी संकेत दे रहा है। प्राइम मिनिस्टर की इकोनॉमिक एडवाइजरी काउंसिल (PMEAC) के सदस्य राकेश मोहन ने कहा है कि एनर्जी शॉक डायरेक्ट और इनडायरेक्ट दोनों तरीकों से महंगाई को बढ़ाएगा। भारत की रिटेल महंगाई (CPI) फरवरी 2026 में बढ़कर 3.21% हो गई थी और Q4 FY2026 में इसके 3.2% रहने का अनुमान है, जो RBI के दायरे में तो है, पर बढ़त का संकेत दे रहा है।

आगे की राह: चुनौतियां और जोखिम

Goldman Sachs जैसी ब्रोकरेज फर्मों ने बढ़ती लागतों और मध्य पूर्व से यात्रा की उम्मीदों में कमी के कारण IndiGo के लिए FY2028 तक के अपने अर्निंग अनुमानों को कम कर दिया है। डोमेस्टिक एयरफेयर कैप को हटाने से एयरलाइंस को कीमतें एडजस्ट करने की सहूलियत मिलेगी, लेकिन वे एनर्जी मार्केट की वोलेटिलिटी के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाएंगी। सेक्टर में 117 से अधिक विमानों के ग्राउंडेड (Grounded) होने से भी ऑपरेशनल कॉस्ट बढ़ रही है। कुल मिलाकर, एविएशन सेक्टर के लिए नज़दीकी भविष्य चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

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