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IRFC Share Price: बड़ा झटका! सरकार ने बेची हिस्सेदारी, वैल्यूएशन पर उठे सवाल, शेयर 4% लुढ़का

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
IRFC Share Price: बड़ा झटका! सरकार ने बेची हिस्सेदारी, वैल्यूएशन पर उठे सवाल, शेयर 4% लुढ़का
Overview

Indian Railway Finance Corporation (IRFC) के निवेशकों के लिए आज मायूसी भरी खबर आई है। भारत सरकार ने 24 फरवरी 2026 को कंपनी में अपनी 1.71% हिस्सेदारी बेच दी है, जिसके चलते शेयर में गिरावट दर्ज की गई।

सरकारी हिस्सेदारी की बिक्री से IRFC के शेयर गिरे

भारत सरकार ने 24 फरवरी 2026 को इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IRFC) में अपनी 1.71% हिस्सेदारी बेच दी। इस डिवेस्टमेंट (divestment) में 26.40 करोड़ शेयर शामिल थे। हालांकि, कंपनी के फाइनेंशियल नंबर और मार्केट सेंटिमेंट (market sentiment) एक जटिल स्थिति का संकेत दे रहे हैं, जिसमें एनालिस्टों (analysts) की मजबूत नकारात्मक राय और पीयर्स (peers) की तुलना में हाई वैल्यूएशन (high valuation) शामिल है। सरकार का यह कदम कैपिटल जुटाने और शेयरहोल्डिंग नियमों को पूरा करने के उद्देश्य से उठाया गया था।

ऑफर फॉर सेल (OFS) के बाद कीमतों में आई गिरावट

ऑफर फॉर सेल (Offer for Sale - OFS) के तहत 26,40,40,829 इक्विटी शेयर बेचे गए। सरकार ने ₹104 प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस (floor price) तय किया था, जो उस दिन के मार्केट प्राइस ₹109.40 से डिस्काउंट (discount) पर था। इस ऐलान के बाद स्टॉक में लगभग 4% की गिरावट आई। यह प्रतिक्रिया बाजार की उस संवेदनशीलता को दिखाती है जो सरकारी बिक्री के बाद अधिक शेयरों की उपलब्धता के प्रति होती है। इस बिक्री से सरकार को लगभग ₹5,430 करोड़ जुटाने की उम्मीद है।

वैल्यूएशन गैप पर चिंताएं बढ़ीं

मार्च 2026 तक IRFC का प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेश्यो लगभग 16.27x से 18.30x के बीच है। यह वैल्यूएशन पीयर्स जैसे पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PFC) और आरईसी लिमिटेड (REC Ltd) की तुलना में काफी अधिक लगता है, जो क्रमशः लगभग 3.75x और 4.66x के पी/ई मल्टीपल पर ट्रेड कर रहे हैं। एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस (LIC Housing Finance) का फॉरवर्ड पी/ई भी लगभग 5.1x है। यह अंतर बताता है कि रेलवे एसेट्स की फाइनेंसिंग में IRFC की भूमिका अनोखी होने के बावजूद, इसके मौजूदा मार्केट वैल्यूएशन को सिर्फ फाइनेंशियल मेट्रिक्स (financial metrics) के आधार पर, खासकर समान सरकारी-समर्थित फाइनेंस कंपनियों की तुलना में, उचित नहीं ठहराया जा सकता है। निवेशक इस वैल्यूएशन गैप पर नजर रख रहे हैं, क्योंकि IRFC की अनुमानित रेवेन्यू ग्रोथ (revenue growth) सालाना 13.2% है, जो कि ओवरऑल इंडियन मार्केट से धीमी है।

एनालिस्टों की 'सेल' रेटिंग और हाई डेट का बोझ

IRFC के मौजूदा वैल्यूएशन को देखते हुए कीमतों में और गिरावट की संभावना है। इसका पी/ई रेश्यो 16-18x कई फाइनेंशियल सेक्टर के मुकाबले काफी ज्यादा है। यह हाई मल्टीपल, साथ ही एनालिस्टों के 'SELL' की सिफारिश वाले कंसेंसस (consensus) और ₹64 के आसपास के एवरेज टारगेट प्राइस (target price), जो स्टॉक के ट्रेडिंग प्राइस ₹87.23 से काफी नीचे है, भविष्य में महत्वपूर्ण चुनौतियों का संकेत देते हैं। IRFC पर भारी डेट (debt) का बोझ है, जिसका टोटल डेट दिसंबर 2025 तक ₹4.22 ट्रिलियन था और डेट-टू-इक्विटी रेश्यो (Debt-to-Equity ratio) लगभग 744.59% था। सरकार का समर्थन होने के बावजूद, यह हाई लिवरेज (leverage) वित्तीय जोखिम पैदा करता है, खासकर अगर ब्याज दरें बदलती हैं। हालिया ऑफर फॉर सेल (OFS) ने बाजार में और सप्लाई जोड़ी है, जो किसी भी त्वरित लाभ को सीमित कर सकती है और यह मानने का समर्थन कर सकती है कि इसका वैल्यूएशन पीयर्स के अनुरूप होना चाहिए।

आगे की राह: धीमी ग्रोथ और और बिकवाली की संभवना

एनालिस्ट IRFC के शेयर की कीमतों पर निरंतर दबाव की उम्मीद कर रहे हैं, जिसमें 1-वर्ष के टारगेट प्राइस औसतन ₹61.2 के आसपास हैं। अर्निंग्स (earnings) और रेवेन्यू का अनुमान सालाना 13-14% की दर से बढ़ने का है, जो समग्र भारतीय बाजार से धीमा है। सरकार की हिस्सेदारी बेचने की जारी योजना का मतलब है कि IRFC या अन्य सरकारी कंपनियों में और बिकवाली हो सकती है, जिससे सप्लाई की चिंताएं बढ़ सकती हैं। निवेशकों को IRFC की भारतीय रेलवे की फाइनेंसिंग में महत्वपूर्ण भूमिका को उसके मौजूदा वैल्यूएशन, हाई डेट और एनालिस्टों के नकारात्मक विचारों के मुकाबले तौलना होगा।

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