रेलवे के साथ नई राहें
भारतीय रेलवे फाइनेंसिंग के क्षेत्र में एक बड़ा नाम, IRFC, अब भविष्य को देखते हुए अपनी फाइनेंसिंग बुक को डाइवर्सिफाई करने की तैयारी में है। कंपनी का लक्ष्य सितंबर 2026 तक अपने AUM को ₹5 लाख करोड़ तक पहुंचाना और FY27 में डबल-डिजिट ग्रोथ हासिल करना है। इसके लिए IRFC, FY26 के अपने डिस्बर्समेंट टारगेट को ₹5,000 करोड़ से आगे ले जाने की योजना बना रही है।
बेंगलुरु रेल प्रोजेक्ट में अहम भूमिका
IRFC, देश भर में चल रही अहम इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में भी फाइनेंसिंग का अहम जरिया है। बेंगलुरु सब-अर्बन रेल प्रोजेक्ट (BSRP) जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स, जिनमें लैंड एक्विजिशन और स्टेशन का काम तेजी से चल रहा है, उनकी फंडिंग में IRFC की भूमिका महत्वपूर्ण है। ₹15,767 करोड़ के इस प्रोजेक्ट की फंडिंग सरकारी खजाने, राज्य सरकारों और बाहरी उधारी से हो रही है, जिसमें IRFC एक बड़ी फाइनेंसियल संस्था के तौर पर काम कर रही है। 15 मई 2026 तक IRFC का मार्केट कैप लगभग ₹1.29 लाख करोड़ था।
इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में बूम और IRFC की ताकत
भारत का इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है, जो 2026 में USD 205.96 बिलियन से बढ़कर 2031 तक USD 302.62 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, जिसमें 8% की सालाना ग्रोथ देखी जा सकती है। ऐसे में, खासकर रेलवे जैसे ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकार का फोकस IRFC के लिए बड़ा अवसर है। कंपनी को भारत सरकार की 86.36% हिस्सेदारी (मार्च 2024 तक) और 'नवरत्न' स्टेटस का भी फायदा मिलता है, जिससे इसे बेहतर क्रेडिट रेटिंग और किफायती दरों पर फंड जुटाने में मदद मिलती है। यह IRFC को भारतीय रेलवे की बड़ी कैपिटल जरूरतों को पूरा करने में सक्षम बनाता है।
स्टॉक में उतार-चढ़ाव और प्रॉफिट में गिरावट
अपनी मजबूत बुनियाद के बावजूद, IRFC का शेयर हाल के वर्षों में काफी अस्थिर रहा है। mid-2023 में यह ₹30 से बढ़कर ₹160 तक गया, लेकिन बाद में इसमें बड़ी गिरावट आई। पिछले दो सालों में इसका रिटर्न -36.23% रहा है, जो सेंसेक्स के मुकाबले काफी कम है। हाल की तिमाही नतीजों में भी निवेशकों की चिंता दिखी है। Q4 FY26 में जहां रेवेन्यू बढ़ा, वहीं नेट प्रॉफिट पिछले क्वार्टर के ₹1,802.19 करोड़ से गिरकर ₹1,684.31 करोड़ हो गया। हाई बीटा (लगभग 1.4-1.5) वाले इस स्टॉक में उतार-चढ़ाव बना रहता है।