IRCTC ने खाने की स्वच्छता (Hygiene) और क्वालिटी को सुधारने के लिए Quality Council of India (QCI) के साथ हाथ मिलाया है। अब कंपनी टेक्नोलॉजी के जरिए सरप्राइज फूड ऑडिट करेगी, जिससे यात्रियों की शिकायतों को कम करने और सेवाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
हाई-टेक मॉनिटरिंग की शुरुआत
IRCTC अब अपनी केटरिंग सेवाओं को पूरी तरह से मॉडर्न बनाने की तैयारी में है। सालाना 58 करोड़ मील परोसने वाली इस कंपनी ने मैन्युअल इंस्पेक्शन को छोड़कर अब डिजिटल और सरप्राइज ऑडिट सिस्टम अपनाया है। इस नई व्यवस्था में जियो-टैगिंग (geo-tagging), टाइम-स्टैम्पिंग (time-stamping) और रियल-टाइम डिजिटल एविडेंस का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे पैंट्री कार और बेस किचन पर बेहतर निगरानी रखी जा सकेगी।
सख्ती का ट्रैक रिकॉर्ड
कंपनी का यह कदम अचानक नहीं है। 2021 से 2024 के बीच IRCTC ने नियमों के उल्लंघन पर 54 शो-कॉज नोटिस जारी किए थे, ₹5.13 करोड़ का जुर्माना लगाया था और 6 वेंडर कॉन्ट्रैक्ट्स को पूरी तरह खत्म कर दिया था। अब ऑडिट रिपोर्ट को 24 घंटे के भीतर सबमिट करना अनिवार्य होगा, जिससे सुधारात्मक कार्रवाई (Corrective Action) और भी तेज हो जाएगी।
निवेशकों के लिए क्या है मायने?
Catering का बिजनेस काफी कम मार्जिन वाला होता है। ऐसे में सीसीटीवी और डिजिटल ऑडिट पर होने वाला खर्च ऑपरेशनल कॉस्ट को बढ़ा सकता है। हालांकि, बेस किचन का सेंट्रलाइजेशन और ब्रांडेड रॉ-इंग्रीडिएंट्स का इस्तेमाल कंपनी की लॉन्ग-टर्म साख (Brand Reputation) को मजबूत करेगा।
निवेशकों के लिए अब यह देखना अहम होगा कि क्या ये कड़े नियम केटरिंग सेगमेंट के ऑपरेटिंग मार्जिन को सुधार पाते हैं, या फिर बढ़ती कंप्लायंस कॉस्ट का असर शॉर्ट-टर्म नतीजों पर दिखता है।
