IRB InvIT Fund ने Q3 FY26 के लिए अपने अनऑडिटेड कंसोलिडेटेड फाइनेंशियल रिजल्ट्स की घोषणा की है। इसके अनुसार, कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 60% की जोरदार छलांग लगाते हुए ₹411.63 करोड़ दर्ज किया गया। इस बम्पर ग्रोथ का मुख्य श्रेय मौजूदा पोर्टफोलियो में मजबूत टोल कलेक्शन और हाल ही में जोड़े गए नए एसेट्स (Assets) को दिया जा रहा है।
मगर, बॉटम लाइन पर देखें तो तस्वीर थोड़ी अलग है। कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट (PAT) में 34.38% की सालाना (YoY) गिरावट आई है, जो पिछले साल के ₹9.10 करोड़ से गिरकर ₹5.97 करोड़ रह गया। इसी तरह, स्टैंडअलोन EPS (Earnings Per Unit) भी ₹1.99 से घटकर ₹1.65 हो गया।
ऑपरेशनल एफिशिएंसी के मामले में, ट्रस्ट ने सुधार दिखाया है। EBITDA मार्जिन पिछले साल के 83.81% से बढ़कर 89.93% हो गया। ट्रस्ट लेवल पर नेट डिस्ट्रीब्यूटेबल कैश फ्लो (NDCF) में भी बड़ी बढ़ोतरी देखी गई, जो पिछले साल के ₹909.51 मिलियन के मुकाबले इस तिमाही में ₹1,954.71 मिलियन रहा।
एक ₹24.82 मिलियन का एक्सेप्शनल आइटम (Exceptional Item) भी दर्ज किया गया, जो नए लेबर कोड के इम्प्लीमेंटेशन से जुड़ा है।
इस अवधि के दौरान, ट्रस्ट ने स्ट्रैटेजिक अधिग्रहणों के ज़रिए अपने एसेट बेस का आक्रामक विस्तार किया। इसने ₹12,170.60 मिलियन के एंटरप्राइज वैल्यू पर VM7 Expressway Private Limited को एक्वायर किया। साथ ही, ₹84,360.00 मिलियन के एंटरप्राइज वैल्यू पर IRB Hapur Moradabad Tollway Limited, Kaithal Tollway Limited और Kishangarh Gulabpura Tollway Limited के अधिग्रहण को भी पूरा किया। इन डील्स के बाद IRB InvIT के एसेट्स की कुल एंटरप्राइज वैल्यू लगभग ₹18,000 करोड़ तक पहुंच गई है।
हालांकि, इस ताबड़तोड़ अधिग्रहण की वजह से कुल बोरिंग्स (Borrowings) में भारी इजाफा हुआ है। 31 दिसंबर, 2025 तक कुल कर्ज़ ₹79,303.43 मिलियन तक पहुंच गया, जो एक साल पहले ₹24,766.95 मिलियन था। इसके चलते डेट-टू-इक्विटी रेश्यो (Debt-to-Equity ratio) भी 0.65 से बढ़कर 0.92 हो गया है।
इंटरेस्ट सर्विस कवरेज रेश्यो (Interest Service Coverage Ratio) घटकर 2.42 रह गया, जो पहले 3.34 था। यह ब्याज चुकाने की क्षमता में कमी का संकेत देता है। इसके अलावा, करंट रेश्यो (Current Ratio) भी 1.13 से गिरकर 0.87 पर आ गया है, जो शॉर्ट-टर्म लिक्विडिटी (Liquidity) पर संभावित दबाव का इशारा करता है।
मैनेजमेंट का कहना है कि उनका फोकस मैच्योर ऑपरेशनल BOT एसेट्स और एन्युटी-बेस्ड HAM एसेट्स के पोर्टफोलियो को ऑप्टिमाइज़ करने पर है, ताकि लंबे समय तक वैल्यू क्रिएट की जा सके। कंपनी ने भविष्य के रेवेन्यू या प्रॉफिट को लेकर कोई खास गाइडेंस नहीं दी है। ऐसे में, इन्वेस्टर्स की नज़रें अब ट्रस्ट की बढ़ी हुई डेट ऑब्लिगेशन्स (Debt Obligations) को सर्व करने की क्षमता, वर्किंग कैपिटल मैनेजमेंट और नए अधिग्रहणों को इंटीग्रेट करके अपेक्षित रिटर्न हासिल करने पर टिकी रहेंगी। आगे का रास्ता डी-लिवरेजिंग (Deleveraging) और ऑपरेशनल सिनर्जी (Synergy) पर निर्भर करेगा।