₹1,200 करोड़ की बड़ी डील पूरी!
IRB InvIT Fund ने अपने स्पॉन्सर (Sponsor) IRB Infrastructure Developers Limited से Gandeva Ena HAM Asset (VM7 Expressway Private Limited) का अधिग्रहण पूरा कर लिया है। इस सौदे का एंटरप्राइज वैल्यू (Enterprise Value) लगभग ₹1,200 करोड़ रहा।
पोर्टफोलियो अब 10 एसेट्स का!
इस अधिग्रहण के साथ ही IRB InvIT Fund के ऑपरेशनल हाईवे एसेट्स की संख्या बढ़कर 10 हो गई है। अब इसके पोर्टफोलियो में 8 BOT (Build-Operate-Transfer) और 2 HAM (Hybrid Annuity Model) एसेट्स शामिल हैं, जिनकी कुल अनुमानित वैल्यू करीब ₹17,600 करोड़ है। ये सभी एसेट्स मिलकर करीब 4,445 लेन किलोमीटर (lane kilometers) को कवर करते हैं।
Unitholders की बल्ले-बल्ले!
कंपनी का मैनेजमेंट (Management) मानता है कि इस नए एसेट को जोड़ने से फंड का एसेट बेस (Asset Base) मजबूत होगा और लंबे समय तक रेवेन्यू (Revenue) की विजिबिलिटी (Visibility) बढ़ेगी। यह एक्वायर्ड प्रोजेक्ट अपने कंसेशन पीरियड (Concession Period) के दौरान स्टेबल और प्रेडिक्टेबल एन्युटी रेवेन्यू (annuity revenue) जेनरेट करने की उम्मीद है। इससे Unitholders के लिए डिस्ट्रीब्यूटेबल कैश फ्लो (distributable cash flow) और डिविडेंड (dividend) पेमेंट में भी बढ़ोतरी की संभावना है।
डेट (Debt) से हुआ फंड का इंतज़ाम
इस अधिग्रहण के लिए फंड का इस्तेमाल डेट (Debt) के जरिए किया गया है। मैनेजमेंट का कहना है कि इससे कैपिटल स्ट्रक्चर (Capital Structure) ऑप्टिमाइज़ होगा और प्रोजेक्ट-लेवल IRR (Internal Rate of Return) सुधरेगा, जो InvIT की ग्रोथ स्ट्रेटेजी (growth strategy) के अनुरूप है।
नए एसेट का पूरा हिसाब
पहले 1 दिसंबर 2025 को VM7 Expressway Pvt. Ltd. के 100% इक्विटी शेयर कैपिटल की खरीद के लिए एक बाइंडिंग टर्म शीट (Binding Term Sheet) साइन हुई थी, जिसे बाद में Unitholders ने अप्रूव कर दिया था। इस एक्वायर्ड प्रोजेक्ट की लंबाई लगभग 27.5 किलोमीटर (लगभग 220 लेन कि.मी.) है और यह नए दिल्ली ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे (New Delhi Greenfield Expressway) का हिस्सा है।
भारत का पहला लिस्टेड इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (Infrastructure Investment Trust - InvIT) होने के नाते, IRB InvIT Fund कई राज्यों में एसेट्स ऑपरेट करता है, जिनका वेटेड एवरेज एसेट लाइफ (weighted average asset life) 18 साल से अधिक है।
आगे क्या?
इस सौदे से जुड़ा एक जोखिम डेट फंडिंग पर निर्भरता है, जिससे फाइनेंशियल लीवरेज (financial leverage) बढ़ सकता है। हालांकि, मैनेजमेंट का मानना है कि यह कैपिटल स्ट्रक्चर को ऑप्टिमाइज़ करेगा। निवेशक आने वाली तिमाहियों में डिस्ट्रीब्यूटेबल कैश फ्लो में वास्तविक बढ़ोतरी पर नजर रखेंगे। HAM एसेट से आने वाले स्टेबल एन्युटी रेवेन्यू और भारत के हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर में समग्र ग्रोथ को देखते हुए, भविष्य की संभावनाएं सकारात्मक दिख रही हैं।