IATA ने Mumbai International Airport Limited (MIAL) के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें **25 अक्टूबर** तक एक-तिहाई इंटरनेशनल फ्लाइट्स को नवी मुंबई शिफ्ट करने का आदेश दिया गया है। एयरलाइंस ने बुनियादी ढांचे की कमी का हवाला दिया है।
विवाद की मुख्य वजह क्या है?
इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) ने MIAL के उस निर्देश पर कड़ा रुख अपनाया है, जिसके तहत एयरलाइंस को अपनी 33% इंटरनेशनल फ्लाइट्स को नवी मुंबई शिफ्ट करने के लिए कहा गया है। यह आदेश 25 अक्टूबर की समय सीमा के साथ आया है। एयरलाइंस का कहना है कि यह समय-सीमा बहुत कम है और नए एयरपोर्ट पर अभी जरूरी सुविधाएं पूरी तरह तैयार नहीं हैं।
Adani Group का पक्ष
MIAL का संचालन कर रहे Adani Group का कहना है कि मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट (CSMIA) पर क्षमता का भारी दबाव है। जनवरी 2027 में प्रस्तावित टर्मिनल-1 के पुनर्विकास (Redevelopment) के लिए यह शिफ्टिंग बेहद जरूरी है, ताकि निर्माण कार्य के दौरान भी एयरपोर्ट का संचालन सुचारू बना रहे।
एयरलाइंस की चिंताएं (Operational Risks)
IATA के अनुसार, नए एयरपोर्ट पर अभी ग्राउंड हैंडलिंग, कैटरिंग और मेंटेनेंस जैसी सेवाओं की स्पष्टता नहीं है। आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस महीनों पहले अपने शेड्यूल तय करती हैं। IATA का जोर इस बात पर है कि ट्रांजिशन 'मार्केट की मांग' के आधार पर होना चाहिए, न कि प्रशासनिक आदेशों (Administrative Mandates) के जरिए।
निवेशकों के लिए संकेत
यह पूरा मामला नवी मुंबई एयरपोर्ट प्रोजेक्ट के सामने आने वाली चुनौतियों को दर्शाता है। अगर बुनियादी ढांचे की चिंताओं को समय रहते हल नहीं किया गया, तो यह उड़ानों के रद्द होने और सर्विस में रुकावट का कारण बन सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या एयरपोर्ट ऑपरेटर इस डेडलाइन को आगे बढ़ाते हैं या एयरलाइंस के साथ कोई बीच का रास्ता निकालते हैं।
