सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने हाइड्रोजन से चलने वाले वाणिज्यिक वाहनों के लिए सात साल की परमिट छूट की घोषणा की है। यह बड़ा कदम फ्लीट मालिकों को परिचालन में अधिक लचीलापन देगा और इथेनॉल व इलेक्ट्रिक वाहनों के बराबर लाएगा। इस फैसले से लंबी दूरी और खनन लॉजिस्टिक्स में क्लीन ट्रांसपोर्ट टेक्नोलॉजी को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
फ्लीट ऑपरेटर्स के लिए खुला नया रास्ता
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने एक अहम नोटिफिकेशन जारी किया है। इसके तहत, जुलाई 2026 से हाइड्रोजन से चलने वाले वाणिज्यिक वाहनों को सात साल के लिए परमिट नियमों से छूट दी जाएगी। इसका मतलब है कि अब इन ट्रकों को मोटर वाहन अधिनियम की धारा 66(1) के तहत पारंपरिक रूट परमिट की जरूरत नहीं होगी। यह छूट बैटरी-इलेक्ट्रिक, इथेनॉल और मेथनॉल से चलने वाले वाहनों की तरह ही लागू होगी।
परिचालन में आएगी तेजी
लॉजिस्टिक्स कंपनियों, खनन ऑपरेटरों और कॉर्पोरेट फ्लीट मालिकों के लिए यह एक बड़ी खुशखबरी है। पहले, रूट अप्रूवल, रिन्यूअल और परमिट के लिए लंबी कागजी कार्रवाई करनी पड़ती थी, जिससे वाहनों को अलग-अलग इलाकों या प्रोजेक्ट्स में तुरंत भेजना मुश्किल होता था। इस छूट से यह प्रक्रिया आसान हो जाएगी और वाहन सड़क पर ज्यादा समय बिता सकेंगे।
सुरक्षा और नियमों के पालन के लिए, वाहनों में AIS-140 स्टैंडर्ड के अनुसार व्हीकल-लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा। यह डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम अधिकारियों को वाहनों की रियल-टाइम जानकारी देगा।
वाहन निर्माताओं के लिए क्या है खास?
इस 'टेक्नोलॉजी न्यूट्रल' फैसले से बाजार तय करेगा कि कौन सी वैकल्पिक ईंधन तकनीक किस काम के लिए सबसे बेहतर है। Tata Motors और Ashok Leyland जैसी कंपनियां, जो इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन फ्यूल-सेल दोनों में निवेश कर रही हैं, अब माइनिंग, स्टील और सीमेंट जैसे भारी उद्योगों के लिए अपने हाइड्रोजन ट्रक उतार सकती हैं।
VE Commercial Vehicles (VECV) और Daimler India Commercial Vehicles को भी अपने हाइड्रोजन ट्रक और इंटरसिटी बस प्लेटफॉर्म के लिए एक स्पष्ट रोडमैप मिलेगा। वहीं, Mahindra जैसी कंपनियां जो लाइट कमर्शियल इलेक्ट्रिक व्हीकल पर ध्यान केंद्रित करती हैं, उन्हें भी क्लीन-फ्यूल कैटेगरी के लिए आसान नियम-कानून का फायदा मिलेगा।
टेलीमैटिक्स और फ्लीट सर्विसेज को भी मिलेगा बढ़ावा
AIS-140 ट्रैकिंग की अनिवार्यता टेलीमैटिक्स और फ्लीट मैनेजमेंट सर्विस कंपनियों के लिए भी फायदेमंद साबित होगी। जैसे-जैसे फ्लीट मालिक क्लीन फ्यूल अपनाएंगे, कमांड-सेंटर कनेक्टिविटी, मेंटेनेंस ट्रैकिंग और अपटाइम मैनेजमेंट जैसी सेवाओं की मांग बढ़ेगी। JBM Auto और Olectra Greentech जैसी इलेक्ट्रिक बस निर्माता कंपनियां पहले से ही ऐसी छूटों से परिचित हैं, लेकिन इस नियम के सभी क्लीन-फ्यूल सेगमेंट में लागू होने से डिजिटल फ्लीट सपोर्ट सेवाओं का एक बड़ा और एकीकृत बाजार तैयार हो सकता है। इस पॉलिसी की सफलता हाइड्रोजन फ्यूलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास और हाइड्रोजन वाहनों की लागत-प्रतिस्पर्धा पर निर्भर करेगी।
