1 सितंबर 2026 से हैदराबाद के राजीव गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर यात्रियों को सफर के लिए नई शुल्क चुकानी होगी। एयरपोर्ट ऑपरेटर GMR हैदराबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट का रेवेन्यू स्टेबल रखने के लिए डिपार्चर फीस घटाई गई है, लेकिन पहली बार अराइवल फीस भी लागू की जा रही है। यह बदलाव एयरपोर्ट के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर एक्सपेंशन प्लान्स का हिस्सा है।
नई शुल्क संरचना का पूरा हिसाब
1 सितंबर 2026 से हैदराबाद एयरपोर्ट इस्तेमाल करने वाले यात्रियों को अपनी जेब ढीली करनी होगी, लेकिन इस बार तरीके थोड़ा बदले हुए होंगे। भारतीय एयरपोर्ट आर्थिक नियामक प्राधिकरण (AERA) ने नई टैरिफ ऑर्डर जारी की है, जिसके तहत यात्रियों से डिपार्चर (जाने वाले) पर कम शुल्क लिया जाएगा, जबकि अराइवल (आने वाले) यात्रियों के लिए पहली बार कोई शुल्क लगाई गई है। इसका मुख्य मकसद शुल्क ढांचे को और अधिक संतुलित बनाना है।
नई व्यवस्था के तहत, डोमेस्टिक (घरेलू) डिपार्चर यात्रियों के लिए शुल्क को मौजूदा ₹750 से घटाकर ₹515 कर दिया गया है। इसी तरह, इंटरनेशनल (अंतरराष्ट्रीय) डिपार्चर यात्रियों को भी अब ₹1,030 देने होंगे, जो पहले ₹1,500 थे। हालांकि, इस कमी की भरपाई करने और ऑपरेटर के रेवेन्यू को बनाए रखने के लिए, AERA ने अराइवल फीस को पेश किया है। डोमेस्टिक अराइवल यात्रियों से ₹220 और इंटरनेशनल अराइवल यात्रियों से ₹440 वसूले जाएंगे। इस बदलाव से यात्रियों से कुल जुटाई जाने वाली राशि काफी हद तक स्थिर रहेगी, जिससे GMR हैदराबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (GHIAL) की आय सुरक्षित रहेगी।
इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ को मिलेगा सहारा
यह टैरिफ रिवीजन एयरपोर्ट के बड़े विस्तार कार्यक्रम से भी सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। ऑपरेटर वर्तमान में ₹13,975 करोड़ की लागत से एक प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। इसका लक्ष्य 2031 के फाइनेंशियल ईयर तक एयरपोर्ट की सालाना पैसेंजर हैंडलिंग कैपेसिटी को 3.4 करोड़ से बढ़ाकर 4.7 करोड़ करना है। इस क्षेत्र में बढ़ते हवाई यातायात को संभालने के लिए यह पूंजी खर्च (Capital Spending) बेहद जरूरी है। AERA का यह ऑर्डर, जो 31 मार्च 2031 तक की अवधि के लिए है, इन विस्तार लागतों की वसूली में मदद करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, साथ ही आने और जाने वाले दोनों यात्रियों पर शुल्क का बोझ समान रूप से फैलाया जाएगा।
वित्तीय स्थिति और जोखिम
निवेशकों के लिए, इन टैरिफ अपडेट्स के साथ-साथ कंपनी की वित्तीय सेहत को समझना भी महत्वपूर्ण है। GMR एयरपोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड ने हाल ही में 2027 के फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही के लिए ₹91.04 करोड़ का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। यह पिछले साल की इसी तिमाही में ₹211.59 करोड़ के नेट लॉस से एक बड़ा सुधार दिखाता है, जो बेहतर ऑपरेशनल परफॉरमेंस का संकेत देता है।
हालांकि, कंपनी एक कैपिटल-इंटेंसिव सेक्टर में काम करती है। GMR एयरपोर्ट्स पर कुल लगभग ₹8,643.86 करोड़ का कर्ज है। इसका मतलब है कि कुशल प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन और पैसेंजर ट्रैफिक में लगातार ग्रोथ महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, रेगुलेटरी जोखिम (Regulatory Risk) पर भी नजर रखने की जरूरत है। एयरपोर्ट ऑपरेटर को 'पे-एज-बिल्ट' टैरिफ मॉडल को लेकर चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, जहां रेगुलेटर पूरी हो चुकी इंफ्रास्ट्रक्चर के आधार पर शुल्क तय करता है। इन गणनाओं पर कोई भी विवाद कभी-कभी लागत वसूली में देरी का कारण बन सकता है। इसके अतिरिक्त, भू-राजनीतिक अस्थिरता और सप्लाई चेन जैसी समस्याएं अंतरराष्ट्रीय यात्री विकास को प्रभावित कर सकती हैं, जो रेवेन्यू का एक प्रमुख जरिया है। निवेशक आने वाली तिमाहियों में कंपनी की कर्ज प्रबंधन क्षमता और मार्जिन सुधार का अंदाजा लगाने के लिए पैसेंजर ट्रैफिक नंबर्स और एक्सपेंशन प्रोजेक्ट की गति पर बारीकी से नजर रखेंगे।
