सप्लाई चेन की कमजोरी आई सामने
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव सिर्फ एनर्जी सिक्योरिटी के लिए ही नहीं, बल्कि ग्लोबल शिपिंग इंडस्ट्री की अंदरूनी कमजोरी को भी उजागर कर रहा है। ज़रूरी सामान ले जा रहे कई जहाज फंसे हुए हैं और इसका असर इंटरनेशनल मार्केट्स पर दिखने लगा है। हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) ने कन्फर्म किया है कि उसके कच्चे तेल (Crude Oil) और LNG से भरे कई जहाज फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं। वहीं, एग्रीकल्चर एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी (Apeda) ने भी महत्वपूर्ण एक्सपोर्ट्स, जैसे बासमती चावल, फल और सब्जियों के लिए बड़ा खतरा बताया है। लगभग 3,000 कंटेनर चावल और 1,000 कंटेनर सब्जियों वाले जहाज रास्ते में हैं। इस टेंशन के चलते ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें करीब 8.6% से 10% तक बढ़ गई हैं, और एनालिस्ट्स का मानना है कि यह $100 प्रति बैरल के पार भी जा सकती है। 2024 में रेड सी संकट भी इसका एक इशारा था, जब केप ऑफ गुड होप के चक्कर लगाने में 10-14 दिन ज़्यादा लग रहे थे और शिपिंग कॉस्ट आसमान छू गई थी।
जियो-पॉलिटिक्स से लड़ना: लॉजिस्टिक्स के विकल्प और पुरानी दिक्कतें
इस मुश्किल घड़ी में, इंडस्ट्री से जुड़े लोग सुरक्षा के लिए नेवल एस्कॉर्ट्स (नौसैनिक सुरक्षा) की मांग कर रहे हैं, जैसा कि 2024 में इंडियन नेवी के 'ऑपरेशन संकल्प' में देखा गया था। इसके अलावा, कंपनियां पोर्ट्स से फंसे हुए कार्गो पर लगने वाले डेमरेज (Demurrage) और डिटेंशन (Detention) जैसे चार्ज माफ करने की भी अपील कर रही हैं, जिससे पता चलता है कि पहले से ही लागत का दबाव बना हुआ है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) ने तो भारतीय पोर्ट्स पर डॉक करने वाले जहाजों की उम्र सीमा में ढील देने का प्रस्ताव दिया है। यह दिखाता है कि इस भू-राजनीतिक तनाव से पहले से ही जहाजों की उपलब्धता और क्षमता को लेकर चिंताएं मौजूद थीं। वैकल्पिक रूट भी तलाशे जा रहे हैं, जैसे सऊदी अरब का यानबू पोर्ट और SUMED पाइपलाइन, लेकिन इनकी क्षमता सीमित है। ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन की क्षमता अच्छी है, पर इसका ज़्यादातर हिस्सा घरेलू रिफाइनरीज के लिए इस्तेमाल होता है, जिससे सऊदी अरब के ज़्यादातर गल्फ एक्सपोर्ट का आधा से भी कम हिस्सा ही दूसरे रास्तों से भेजा जा सकता है।
फाइनेंशियल नंबर्स की बात करें तो, HPCL का P/E रेशियो करीब 5.60 है, जो रिलायंस इंडस्ट्रीज के 24.8 और शिपिंग इंडस्ट्री के औसत 14.39 से काफी कम है। यह HPCL की रिफाइनिंग और मार्केटिंग पर फोकस बनाम RIL के डाइवर्सिफाइड बिजनेस मॉडल (जिसमें डिजिटल और रिटेल सेगमेंट भी शामिल हैं) का अंतर दिखा सकता है।
खतरे का पॉइंट: चोकपॉइंट्स, बढ़ती लागत और छिपी कमज़ोरियां
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का एक बेहद अहम समुद्री रास्ता (Maritime Chokepoint) है, जहाँ से रोज़ाना करीब 20% ग्लोबल ऑयल कंजम्पशन और LNG का बड़ा हिस्सा गुज़रता है। यानी लगभग 17-18 मिलियन बैरल कच्चा तेल हर दिन इस संकरे रास्ते से निकलता है। अगर यहाँ लंबे समय तक रुकावट आती है, तो यह न सिर्फ कीमतों में उछाल लाएगा, बल्कि ग्लोबल कोर गुड्स इन्फ्लेशन (Core Goods Inflation) को 0.7% तक बढ़ा सकता है। फिलहाल करीब 10% ग्लोबल कंटेनर फ्लीट प्रभावित है, लेकिन महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट ट्रेड रूट पर इसका असर ज़्यादा है।
इंश्योरेंस प्रीमियम (Insurance Premiums) बढ़ गए हैं और जहाजों को लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है, जिससे लागत बढ़ रही है और कई के लिए यह व्यावसायिक रूप से संभव नहीं रहा। देशों के पास आमतौर पर 60-90 दिनों के लिए स्ट्रेटेजिक रिजर्व (रणनीतिक भंडार) होता है, लेकिन ज़्यादा लंबी रुकावट इसे भी चुनौती दे सकती है। वैकल्पिक पाइपलाइनों की सीमित क्षमता के चलते, अगर होर्मुज पूरी तरह बंद हो जाए, तो रोज़ाना 8-10 मिलियन बैरल की भारी कमी हो सकती है, जिससे सप्लाई शॉर्टेज की गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है। जहाजों की उम्र सीमा में ढील देने की मांग भी यह बताती है कि सप्लाई टाइट है, जिसे यह भू-राजनीतिक घटनाएँ और भी बढ़ा रही हैं।
आगे क्या: रिस्क प्रीमियम में बढ़ोतरी और स्ट्रैटेजिक बदलाव
यह संकट बताता है कि एनर्जी और शिपिंग मार्केट्स में आने वाले समय में रिस्क प्रीमियम (जोखिम प्रीमियम) ज़्यादा बना रहेगा। अब मार्केट की सोच 'एफिशिएंसी' (दक्षता) से बदलकर 'रेसिलिएंस' (लचीलापन) और सप्लाई रूट के डाइवर्सिफिकेशन (विविधीकरण) पर शिफ्ट हो सकती है। इंपोर्टर उन प्रोड्यूसर्स से सप्लाई लेने की कोशिश करेंगे जो सीधे होर्मुज पर निर्भर न हों। रिलायंस इंडस्ट्रीज और HPCL जैसी कंपनियों को इस माहौल में मज़बूत रिस्क मैनेजमेंट, लॉजिस्टिक्स में फ्लेक्सिबिलिटी और ग्लोबल एनर्जी फ्लो पर पैनी नज़र रखनी होगी। भविष्य में किसी भी झटके से बचने के लिए ज़्यादा लागत पर भी बैकअप प्लान और अल्टरनेटिव कैपेसिटी बनाना ज़रूरी होगा।