हॉरमुज़ जलडमरूमध्य पर ईरान का खतरा: बीमा कंपनियों का पलायन, तेल की कीमतों में सुनामी!

TRANSPORTATION
Whalesbook Logo
AuthorMehul Desai|Published at:
हॉरमुज़ जलडमरूमध्य पर ईरान का खतरा: बीमा कंपनियों का पलायन, तेल की कीमतों में सुनामी!
Overview

ईरान द्वारा हॉरमुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद करने की धमकी के बाद दुनिया भर की बीमा कंपनियों में हड़कंप मच गया है। कई देशों की बीमा कंपनियों ने इस इलाके में जहाजों को दिया जा रहा युद्ध-जोखिम बीमा (war-risk insurance) रद्द कर दिया है, जिससे सैकड़ों जहाज बिना सुरक्षा के फंस गए हैं। इस बीच, तेल की कीमतों में भी तेज उछाल देखा जा रहा है।

बीमा कवर का संकट और तेल की कीमतों में आग

ईरान की ओर से हॉरमुज़ जलडमरूमध्य को बंद करने की धमकी के बाद समुद्री बीमा क्षेत्र में अफरातफरी का माहौल है। दुनिया भर की बीमा कंपनियों ने, जिनमें भारत के बड़े री-इंश्योरर्स जैसे GIC Re शामिल हैं, 5 मार्च, 2026 से प्रभावी सात-दिवसीय रद्दीकरण नोटिस जारी किए हैं। कुछ कंपनियों ने तो वार्षिक हल वॉर पॉलिसीज़ को पहले ही खत्म कर दिया है। इस तेजी से हुए बीमा कवर वापस लेने के फैसले के कारण सैकड़ों जहाज बिना सुरक्षा के फंस गए हैं, जिन पर लगभग $22 बिलियन का जोखिम बताया जा रहा है। फारस की खाड़ी में समुद्री हल इंश्योरेंस (marine hull insurance) के प्रीमियम में 25% से 50% तक की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। कुछ अंडरराइटर्स तो इस क्षेत्र को एक सक्रिय युद्ध क्षेत्र मानते हुए कोटेशन देने से भी इनकार कर सकते हैं। तुलना के लिए, लाल सागर संकट के दौरान वॉर प्रीमियम जहाज के मूल्य का लगभग 0.7% तक पहुंच गया था, जबकि हॉरमुज़ ट्रांजिट के लिए यह 0.5% से अधिक हो सकता है, जो पहले लगभग 0.25% था।

तेल की कीमतों में सुनामी और शिपिंग पर असर

यह बीमा निकासी लगातार बढ़ते सैन्य तनाव के बीच हो रही है, जिसने तेल की कीमतों को तेजी से ऊपर धकेल दिया है। शुरुआती मार्च 2026 तक WTI क्रूड ऑयल $70 प्रति बैरल के पार निकल गया था, जबकि ब्रेंट क्रूड $77 के ऊपर कारोबार कर रहा था। 2 मार्च, 2026 को इंट्राडे ट्रेडिंग के दौरान ब्रेंट की कीमतें $80.26 तक भी पहुंच गईं। यह सब एक बड़े जियोपॉलिटिकल रिस्क प्रीमियम को दर्शाता है, जो संभावित नाकाबंदी के डर से बढ़ा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि भले ही रणनीतिक भंडार (strategic reserves) और अतिरिक्त क्षमता (spare capacity) कुछ हद तक राहत दे सकती हैं, लेकिन हॉरमुज़ जलडमरूमध्य, जिससे दुनिया के लगभग 20% तेल की खपत का ट्रांज़िट होता है, में एक लंबे समय तक चलने वाली बाधा कीमतों को $100-$150 प्रति बैरल या उससे भी ऊपर ले जा सकती है। इस प्राइस स्पाइक का वैश्विक शिपिंग पर भी असर दिख रहा है; वेरी लार्ज क्रूड कैरियर्स (VLCCs) के लिए फ्रेट रेट्स दोगुने हो गए हैं, और एलएनजी (LNG) शिपिंग रेट्स में 40% से अधिक की छलांग आई है।

भारत के लिए चिंता की बात

मध्य पूर्व से तेल और गैस पर भारी निर्भर भारत के लिए यह स्थिति काफी जोखिम भरी है। भारत अपने क्रूड ऑयल आयात का लगभग 55-58% और एलएनजी (LNG) का लगभग 60% हॉरमुज़ जलडमरूमध्य से ही आयात करता है। एक लंबी नाकाबंदी भारत के करंट अकाउंट डेफिसिट (current account deficit) को बढ़ा सकती है, घरेलू इन्फ्लेशन (inflation) को तेज कर सकती है और रुपये पर दबाव डाल सकती है। भारत की प्रमुख ऑयल मार्केटिंग कंपनियाँ जैसे इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम स्थिति पर करीब से नजर रख रही हैं। भारत के पास लगभग 17-18 दिनों की मांग के लिए क्रूड भंडार है, लेकिन एलएनजी और एलपीजी (LPG) का बफर काफी कम है, जिससे गैस और कुकिंग फ्यूल ऊर्जा सुरक्षा की सबसे कमजोर कड़ी बन जाते हैं। इस दबाव के चलते, भारतीय स्टॉक मार्केट इंडेक्स जैसे निफ्टी 50 (Nifty 50) और बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) में गिरावट देखी गई, और इंडिया VIX (वोलैटिलिटी इंडेक्स) 2 मार्च, 2026 को काफी बढ़ गया।

आगे क्या? अनिश्चितता का दौर

फिलहाल, शिपिंग और एनर्जी मार्केट्स का भविष्य मध्य पूर्व संघर्ष की अवधि और तीव्रता पर निर्भर कर रहा है। भले ही राजनयिक प्रयास तनाव कम कर सकते हैं, लेकिन बाजार पहले से ही आर्थिक गिरावट और रिस्क प्रीमियम के पुनर्मूल्यांकन से जूझ रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि अगर तनाव कम होता है तो तेल की कीमतें थोड़ी गिर सकती हैं, लेकिन हाल की घटनाओं ने वैश्विक ऊर्जा सप्लाई चेन की अंतर्निहित नाजुकता को उजागर किया है। इस क्षेत्र से आने वाली हर खबर पर बाजार की संवेदनशीलता एक विस्तारित अवधि की वोलैटिलिटी (volatility) का संकेत देती है, जिसमें ऊर्जा सुरक्षा और आयात लागत आयात करने वाले देशों के लिए एक प्रमुख चिंता बनी रहेगी।

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.
%%RELATED_NEWS_LAST_NEWS_HTML%%