Himachal Pradesh EV Corridor: मॉनसून की मार और इंफ्रास्ट्रक्चर की बाधाएं, क्या रुक जाएगा ग्रीन एनर्जी का प्लान?

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Himachal Pradesh EV Corridor: मॉनसून की मार और इंफ्रास्ट्रक्चर की बाधाएं, क्या रुक जाएगा ग्रीन एनर्जी का प्लान?

हिमाचल प्रदेश अपने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 41 हाईवे साइटों पर EV चार्जिंग स्टेशनों का नेटवर्क बना रहा है। लेकिन भारी बारिश, बिजली की किल्लत और हालिया मॉनसून से हुए सड़क नुकसान से राज्य सरकार की मुश्किलों में इजाफा हो गया है।

ग्रीन कॉरिडोर पर मॉनसून का ग्रहण?

हिमाचल प्रदेश इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के लिए 'ग्रीन कॉरिडोर' बनाने की महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रहा है। इसका मकसद राज्य के महत्वपूर्ण पर्यटन उद्योग को सहारा देना है। इस प्रोजेक्ट के तहत करीब 2,000 किलोमीटर के दायरे में 41 प्रमुख हाईवे लोकेशन पर चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है। हाई-कैपेसिटी फास्ट चार्जर लगाकर, सरकार चाहती है कि पर्यटक इलेक्ट्रिक वाहनों से आएं और पहाड़ी इलाकों में लंबी यात्राओं की रेंज की चिंता से मुक्त रहें।

मौसम और बिजली की किल्लत बड़ी चुनौती

हालांकि यह प्रोजेक्ट ग्रीन एनर्जी की ओर बढ़ने की बड़ी योजना का हिस्सा है, लेकिन इसे तुरंत ही जमीनी हकीकत का सामना करना पड़ रहा है। अगस्त 2026 तक, राज्य भयंकर मॉनसून की मार झेल रहा है, जिसके कारण 120 से ज़्यादा सड़कें बंद हो गई हैं और बार-बार बिजली सप्लाई बाधित हो रही है। इस खराब मौसम का असर चार्जिंग नेटवर्क के रखरखाव और भरोसेमंदता पर पड़ रहा है। कई दूरदराज के इलाकों में भारी बारिश के दौरान पावर ग्रिड अक्सर अस्थिर हो जाते हैं। कुछ होटल मालिकों ने तो यह भी बताया है कि उन्हें बिजली की जरूरतें पूरी करने के लिए डीजल जनरेटर का इस्तेमाल करना पड़ रहा है, जो इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल के पर्यावरणीय फायदे को फिलहाल बेअसर कर देता है।

प्राइवेट कंपनियों का सहयोग और नए नियम

इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए, राज्य ने Jio-BP, EVI Technologies और Electroweb जैसी प्राइवेट कंपनियों को चार्जिंग हब विकसित करने के लिए जोड़ा है। इसके अलावा, राज्य सरकार ने 17वें संशोधन नियम, 2026 पेश किए हैं, जो नए कमर्शियल, पब्लिक और रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में EV चार्जिंग स्टेशन लगाना अनिवार्य करते हैं। यह नियम होटलों द्वारा स्वेच्छा से इसे अपनाने से आगे बढ़कर, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक जरूरी आधार तैयार करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, राज्य ने पब्लिक ट्रांसपोर्ट को भी बढ़ावा दिया है। हिमाचल रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन ने जुलाई 2026 के अंत में 297 नई इलेक्ट्रिक बसें जोड़ीं, जिससे कुल इलेक्ट्रिक बेड़े की संख्या 400 से ज़्यादा हो गई है।

आर्थिक दबाव और आलोचना

राज्य के लिए वित्तीय चुनौतियां एक अहम चिंता बनी हुई हैं। प्रशासन फिलहाल हालिया मॉनसून से हुए नुकसान के आर्थिक प्रभाव से निपट रहा है, जिससे अनुमानित नुकसान ₹8,300 करोड़ से ज़्यादा हुआ है। राज्य के खजाने पर पड़ने वाला यह वित्तीय दबाव सरकारी सब्सिडी या पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च की गति को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा, लागत की भरपाई के लिए नए वाहन एंट्री टैक्स (Vehicle Entry Tax) लागू करने से स्थानीय पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर की आलोचना हुई है। इससे रेवेन्यू बढ़ाने और बजट-सजग पर्यटकों के लिए राज्य की अपील बनाए रखने के बीच एक नाजुक संतुलन बनाना पड़ रहा है।

भविष्य की राह

इन कॉरिडोर की लंबी अवधि की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि राज्य चरम मौसम के खिलाफ इंफ्रास्ट्रक्चर की मजबूती को कितनी प्रभावी ढंग से संभाल पाता है। निवेशक और इंडस्ट्री ऑब्जर्वर संभवतः 41 नियोजित साइटों के पूरा होने की दर और बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता में सुधार की निगरानी करेंगे, क्योंकि ये कारक तय करेंगे कि यह पहल सफलतापूर्वक हाई-वैल्यू पर्यटक यातायात को आकर्षित कर पाती है या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.