Hazoor Multi Projects Limited को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) से एक बड़ा कॉन्ट्रैक्ट मिला है। कंपनी एक साल के लिए ₹24.33 करोड़ की लागत से NH-27 पर स्थित रामनगर टोल प्लाजा का संचालन और फीस कलेक्शन करेगी।
NHAI से मिला ₹24.33 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट
Hazoor Multi Projects Limited को NHAI ने मध्य प्रदेश में रामनगर टोल प्लाजा पर यूजर फीस वसूलने के लिए चुना है। ई-टेंडरिंग प्रक्रिया के जरिए हासिल किए गए इस कॉन्ट्रैक्ट की अवधि एक साल है और इसका कुल मूल्य ₹24.33 करोड़ है। यह प्रोजेक्ट NH-27 के Baran-Shivpuri सेक्शन पर स्थित रामनगर टोल प्लाजा (Km 1280.370) के Km 1251.814 से Km 1305.087 तक के हिस्से को कवर करता है।
काम का दायरा और कॉन्ट्रैक्ट की शर्तें
इस समझौते के तहत, कंपनी की जिम्मेदारी होगी कि वह निर्धारित टोल प्लाजा से गुजरने वाले वाहनों से यूजर फीस इकट्ठा करे। फीस कलेक्शन के अलावा, कंपनी को पास के टॉयलेट ब्लॉक का रखरखाव और जरूरी सामानों की पूर्ति का काम भी देखना होगा। यह सर्विस-आधारित कॉन्ट्रैक्ट हाईवे के इस खास हिस्से को सुचारू रूप से चलाने में मदद करेगा।
शेयर बाजार में प्रदर्शन
इस नए कॉन्ट्रैक्ट की घोषणा के बाद, 11 अगस्त 2026 को Hazoor Multi Projects के शेयर लगभग ₹21.65 पर ट्रेड कर रहे थे। कॉन्ट्रैक्ट मिलने की सकारात्मक खबर के बावजूद, पिछले दो सालों में शेयर में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया है और इसमें गिरावट का रुख रहा है। सितंबर 2024 में अपने ऑल-टाइम हाई ₹46 से यह शेयर लगभग 53% तक गिर चुका है। 2025 और 2026 के शुरुआती आठ महीनों में स्टॉक में आई यह लगातार गिरावट, बीच-बीच में ऑर्डर मिलने के बावजूद निवेशकों की सतर्कता को दर्शाती है।
फाइनेंशियल स्थिति और जोखिम
निवेशकों के लिए, नए कॉन्ट्रैक्ट का दीर्घकालिक असर इस बात पर निर्भर करता है कि कंपनी इन ऑर्डर्स को स्थायी लाभ और पॉजिटिव कैश फ्लो में बदलने में कितनी सफल रहती है। Hazoor Multi Projects को अपनी वित्तीय मेट्रिक्स, खासकर हाल के फाइनेंशियल पीरियड्स में नेगेटिव ऑपरेटिंग कैश फ्लो को लेकर जांच का सामना करना पड़ा है। यह स्थिति बताती है कि कंपनी के अकाउंटिंग प्रॉफिट और असल में बिजनेस ऑपरेशन से जेनरेट हो रहे कैश के बीच तालमेल की कमी हो सकती है।
इसके अलावा, कंपनी का वर्किंग कैपिटल साइकिल भी स्ट्रेच्ड है, जिसका मतलब है कि ऑपरेशंस से कैश रिकवर करने में ज्यादा समय लग रहा है, जो लिक्विडिटी पर दबाव डाल सकता है। लंबे समय के शेयरधारकों के लिए एक और चिंता का विषय कंटिंजेंट लायबिलिटीज (संभावित देनदारियां) हैं, जिनकी रिपोर्ट ₹366 करोड़ के आसपास की गई है। ये वे संभावित वित्तीय ऑब्लिगेशन्स हैं जो भविष्य की घटनाओं के आधार पर उत्पन्न हो सकती हैं। इन फैक्टर्स को देखते हुए, मार्केट पार्टिसिपेंट्स अक्सर यह देखने के लिए कैश फ्लो में सुधार और वर्किंग कैपिटल मैनेजमेंट के बेहतर होने के संकेत तलाशते हैं कि क्या बिजनेस मजबूत हो रहा है। आने वाली तिमाहियों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कंपनी अपने कर्ज और कैश फ्लो की दिक्कतों को मैनेज करते हुए इस नए NHAI कॉन्ट्रैक्ट को कितनी सफलतापूर्वक पूरा करती है।
