हरियाणा सरकार ने राज्य के पांच प्रमुख शहरों में बाईपास और रिंग रोड बनाने के लिए **₹9,700 करोड़** की भारी-भरकम योजना को हरी झंडी दी है। इस प्रोजेक्ट का मुख्य मकसद ट्रैफिक जाम से मुक्ति दिलाना और स्थानीय सड़कों को नेशनल हाईवे से जोड़ना है।
हरियाणा सरकार ने राज्य में कनेक्टिविटी को रफ्तार देने के लिए ₹9,700 करोड़ के इंफ्रास्ट्रक्चर प्लान को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत हिसार, कुरुक्षेत्र, नारनौल, जींद और सोहना-पलवल कॉरिडोर में नए बाईपास और रिंग रोड का निर्माण किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट का विजन न केवल शहरों के अंदर ट्रैफिक को कम करना है, बल्कि इन इलाकों को जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट जैसे बड़े ट्रांजिट हब से भी जोड़ना है।
प्रमुख शहरों में काम की रफ्तार
प्रोजेक्ट के तहत हिसार में NH-52 को दिल्ली और कैथल रोड से जोड़ा जाएगा। कुरुक्षेत्र में कुरुक्षेत्र-लाडवा बाईपास और जींद में NH-352 पर फोर-लेन बाईपास के साथ आउटर रिंग रोड तैयार किया जाएगा। वहीं, सोहना-पलवल मार्ग को 24 किलोमीटर के फोर-लेन कॉरिडोर में बदला जाएगा।
निवेश और जोखिम के बिंदु
इस प्रोजेक्ट को जमीन पर उतारने के लिए वित्त, लोक निर्माण और शहरी स्थानीय निकाय विभाग के प्रतिनिधियों वाली एक 3-सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। यह समिति केंद्र और राज्य सरकार के बीच 'कॉस्ट-शेयरिंग' मॉडल को अंतिम रूप देगी। निवेशकों के लिए यही सबसे बड़ा 'मॉनिटरेबल' है, क्योंकि भारत में बड़े प्रोजेक्ट्स अक्सर भूमि अधिग्रहण और फंडिंग विवादों के कारण देरी का शिकार हो जाते हैं।
निर्माण कंपनियों के लिए क्या है संकेत?
सड़क निर्माण का क्षेत्र बिटुमेन, स्टील और सीमेंट जैसी कच्चे माल की कीमतों के प्रति बहुत संवेदनशील होता है। देरी होने पर प्रोजेक्ट की लागत बढ़ सकती है और ठेकेदारों के मार्जिन पर असर पड़ सकता है। फिलहाल बाजार की नजर अब डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) और उसके बाद आने वाले टेंडर्स पर टिकी है। उत्तर भारत में मजबूत ऑर्डर बुक वाली कंपनियां इस अवसर का सबसे ज्यादा फायदा उठा सकती हैं, बशर्ते राज्य सरकार समय पर फंडिंग और जमीन का अधिग्रहण सुनिश्चित करे।
