GreenCell Mobility: इलेक्ट्रिक बस फ्लीट बढ़ाने के लिए जुटाए **₹330 करोड़**, विस्तार की क्या है पूरी योजना?

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
GreenCell Mobility: इलेक्ट्रिक बस फ्लीट बढ़ाने के लिए जुटाए **₹330 करोड़**, विस्तार की क्या है पूरी योजना?

GreenCell Mobility ने Impact Fund Denmark से **₹330 करोड़** की नई फंडिंग हासिल की है। इस निवेश का इस्तेमाल कंपनी अपनी इलेक्ट्रिक बस फ्लीट को **4,500** नई बसों के साथ विस्तार देने के लिए करेगी, जिससे उनका कुल फ्लीट **5,000** बसों का आंकड़ा पार कर जाएगा।

बड़े विस्तार की तैयारी

Eversource Capital समर्थित कंपनी GreenCell Mobility अब आक्रामक विस्तार की राह पर है। कंपनी ने ₹330 करोड़ की फ्रेश इक्विटी जुटाकर 4,500 नई इलेक्ट्रिक बसें सड़कों पर उतारने का लक्ष्य रखा है। अगले 2 वर्षों में कंपनी 105 शहरों में 5,000 से ज्यादा बसों का ऑपरेशन संभालने की तैयारी कर रही है। कंपनी अपने 'NueGo' ब्रांड के जरिए इलेक्ट्रिक मोबिलिटी-एज-ए-सर्विस (eMaaS) मॉडल पर काम करती है। इसमें कंपनी न केवल बसों का संचालन करती है, बल्कि चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की पूरी जिम्मेदारी भी खुद उठाती है, जिसके बदले में स्टेट ट्रांसपोर्ट बॉडीज उन्हें प्रति किलोमीटर के हिसाब से भुगतान करती हैं।

ऑपरेशंस और चुनौतियां

मई 2026 तक कंपनी 1,200 इलेक्ट्रिक बसें और 270 चार्जिंग स्टेशन संचालित कर रही थी। इतने बड़े स्तर पर 105 शहरों में काम करना आसान नहीं है। लैंड की उपलब्धता, पावर ग्रिड कनेक्टिविटी और देशभर में बिखरे फ्लीट को मैनेज करना कंपनी के लिए बड़ी ऑपरेशनल चुनौती बनी रहेगी।

सेक्टर के जोखिम और पेमेंट्स

भारत में PM-eBus Sewa स्कीम जैसे सरकारी प्रयासों से ई-बस सेक्टर को रफ्तार मिल रही है, लेकिन यह बिजनेस काफी कैपिटल-इंटेंसिव है। सबसे बड़ी चिंता स्टेट ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग्स (STUs) से मिलने वाले भुगतान की है। सरकारी बजट आवंटन या प्रशासनिक देरी के कारण अगर पेमेंट्स में देर होती है, तो कंपनी के कैश फ्लो पर दबाव बढ़ सकता है। मार्केट में Olectra Greentech और JBM Auto जैसे बड़े प्लेयर्स भी मौजूद हैं, इसलिए मुनाफे के लिए ऑपरेशनल कॉस्ट कंट्रोल और हाई अपटाइम बनाए रखना अनिवार्य होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.