GreenCell Mobility ने Impact Fund Denmark से **₹330 करोड़** की इक्विटी जुटाई है। कंपनी अगले 18 महीनों में **4,500** नई इलेक्ट्रिक बसें सड़कों पर उतारेगी, जिससे उसका कुल फ्लीट **5,000** के पार पहुंच जाएगा।
भारी निवेश का लक्ष्य
इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सेक्टर की अनलिस्टेड कंपनी GreenCell Mobility ने अपने विस्तार की योजना को तेज करते हुए ₹330 करोड़ का फ्रेश इक्विटी फंड जुटाया है। यह पूंजी कंपनी के इलेक्ट्रिक बस इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और आने वाले 18 महीनों में 4,500 नई ई-बसें तैनात करने के काम आएगी। Eversource Capital समर्थित यह कंपनी अब 5,000 से ज्यादा बसों के बेड़े के साथ पब्लिक ट्रांसपोर्ट को आधुनिक बनाने की दिशा में काम कर रही है।
कैसे काम करता है बिजनेस मॉडल?
कंपनी 'ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट' (GCC) मॉडल पर काम करती है। इसमें GreenCell बसें खरीदती, चलाती और मेंटेन करती है, जबकि सरकार प्रति किलोमीटर के हिसाब से तय फीस का भुगतान करती है। जनवरी 2026 में कंपनी ने International Finance Corporation, British International Investment और Tata Capital जैसे बड़े निवेशकों से $89 मिलियन की हाइब्रिड फाइनेंसिंग भी हासिल की थी।
रिस्क और चुनौतियां
हालांकि कंपनी का विस्तार बड़े स्तर पर हो रहा है, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में यह मॉडल कैपिटल-इंटेंसिव है। भारी कर्ज और चार्जिंग स्टेशनों के डेवलपमेंट के चलते कंपनी अभी भी नेट लॉस और नेगेटिव मार्जिन की चुनौती का सामना कर रही है। इसके अलावा, कंपनी पूरी तरह से सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स पर निर्भर है, जिससे पेमेंट में देरी या सरकारी पॉलिसी में बदलाव का जोखिम हमेशा बना रहता है। फिलहाल 105 शहरों में अपने ऑपरेशंस को मैनेज करना और प्रतिस्पर्धी मार्केट में अपने मार्जिन को सुरक्षित रखना कंपनी के सामने सबसे बड़ी चुनौती है।
