Airfare Caps: त्योहारों पर हवाई किराए पर कोई कैप नहीं, एयरलाइंस के लिए राहत पर फ्यूल कॉस्ट का दबाव

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AuthorMehul Desai|Published at:
Airfare Caps: त्योहारों पर हवाई किराए पर कोई कैप नहीं, एयरलाइंस के लिए राहत पर फ्यूल कॉस्ट का दबाव

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने त्योहारों के सीजन के दौरान हवाई टिकटों की कीमतों पर कोई भी फिक्स लिमिट लगाने से इनकार कर दिया है। सरकार अब एयरलाइंस के साथ बातचीत के जरिए किराए को नियंत्रित रखने की कोशिश करेगी।

सरकार का रुख साफ

नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू ने स्पष्ट किया है कि फेस्टिव सीजन के दौरान एयरलाइंस पर किराए की कोई कानूनी पाबंदी नहीं थोपी जाएगी। सरकार इसके बजाय एक सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपना रही है, ताकि आम यात्रियों के लिए टिकट के दाम उचित बने रहें।

एयरलाइंस के सामने चुनौती

निवेशकों के लिए यह फैसला एक तरह से फ्री-मार्केट के संकेत जैसा है, लेकिन इसके साथ ही एक बड़ी चुनौती भी जुड़ी है। फिलहाल, एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतें, जो वेस्ट एशिया में जारी जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण प्रभावित हो रही हैं, एयरलाइंस के कुल ऑपरेटिंग खर्च का करीब 43% हिस्सा ले रही हैं।

निवेशकों के लिए क्या है रिस्क?

हालांकि सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक 'प्राइस कैप' नहीं है, लेकिन किराए को 'उचित' रखने का दबाव एक तरह का सॉफ्ट सीलिंग की तरह काम करेगा। यदि फ्यूल की कीमतें इसी तरह ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो एयरलाइंस के लिए अपना नेट प्रॉफिट मार्जिन बचाना मुश्किल हो जाएगा। अगर किराए बहुत ज्यादा बढ़ाए गए, तो सरकारी दखल का खतरा हमेशा बना रहेगा।

भविष्य की रणनीति

सरकार का फोकस फिलहाल 'उड़ान' (Udaan) योजना के जरिए रीजनल कनेक्टिविटी बढ़ाने पर है। इसके लिए सेकेंडरी एयरपोर्ट्स पर इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर दिया जा रहा है। अब निवेशकों की नजर आने वाले तिमाही नतीजों पर होगी, जहां यह देखा जाएगा कि कंपनियां बढ़ती लागत और सीमित प्राइसिंग पावर के बीच किस तरह संतुलन बनाती हैं। खासकर InterGlobe Aviation जैसी कंपनियों के लिए फ्यूल प्राइस और पैसेंजर ट्रैफिक का डेटा सबसे महत्वपूर्ण पैरामीटर होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.