सरकार ने 'भारतीय वायुयान नियम, 2026' (Bharatiya Vayuyan Niyam, 2026) को अंतिम रूप दे दिया है, जो **1 जनवरी, 2027** से प्रभावी होंगे। अब एयरलाइंस को अपना किराया ढांचा **1 महीने पहले** DGCA को सौंपना होगा। हालांकि सामान्य स्थितियों में कोई प्राइस कैप नहीं होगा, लेकिन आपात स्थिति में सरकार हस्तक्षेप कर सकेगी।
क्या है नया नियम?
केंद्र सरकार ने एविएशन सेक्टर के लिए नया रेगुलेटरी फ्रेमवर्क तैयार किया है। इस नए नियम के तहत, एयरलाइंस को अपने टैरिफ स्ट्रक्चर की जानकारी डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) को कम से कम एक महीने पहले देनी होगी। इसका मकसद है कि एयरलाइंस अपनी प्राइसिंग को लेकर अधिक अनुशासित रहें। इसके साथ ही, अब टिकट बुकिंग के वक्त बेस फेयर, टैक्स और अन्य चार्जेज को अलग-अलग दिखाना अनिवार्य होगा, ताकि ग्राहकों को पूरी पारदर्शिता मिले।
सरकार का रुख: प्राइस कैप पर स्थिति साफ
निवेशकों के लिए राहत की बात यह है कि सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि सामान्य परिस्थितियों में वह किराए पर कोई कैप नहीं लगाएगी। एयरलाइंस अपनी डायनेमिक प्राइसिंग जारी रख सकेंगी। हालांकि, महामारी, प्राकृतिक आपदा या सप्लाई चेन में बड़ी बाधा जैसी असामान्य स्थितियों में सरकार अस्थायी तौर पर किराए पर सीमा तय कर सकती है।
एयरलाइंस पर बढ़ेगा अनुपालन का बोझ
ऑपरेशनल लिहाज से देखें तो एयरलाइंस कंपनियों के लिए कम्प्लायंस बढ़ गया है। पहले से किराया रिपोर्ट करने के नियम के कारण कंपनियां पीक सीजन में अंतिम समय पर कीमतों को बहुत तेजी से नहीं बढ़ा पाएंगी। साथ ही, अपनी बुकिंग सिस्टम को नए पारदर्शिता मानकों के अनुरूप अपडेट करने के लिए कंपनियों को अतिरिक्त निवेश करना होगा।
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी
यह कदम मुख्य रूप से 'प्रेडेटरी प्राइसिंग' (Predatory Pricing) से जुड़ी जनहित याचिकाओं के जवाब में उठाया गया है। सरकार ने 16 अक्टूबर, 2026 को सुप्रीम कोर्ट को इसकी जानकारी दी थी। अब 16 नवंबर, 2026 को मामले की अगली सुनवाई होनी है। निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी होगी कि क्या ये नए खुलासे एयरलाइंस के मुनाफे पर असर डालते हैं या फिर ये नियम आगे चलकर और अधिक सख्त सरकारी दखल का जोखिम कम करते हैं।
