केंद्र सरकार ने रीजनल कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए 10 साल की मॉडिफाइड UDAN स्कीम लॉन्च की है, जिसके लिए **₹28,840 करोड़** का भारी-भरकम बजट रखा गया है। इस प्लान के तहत **100** नए एयरपोर्ट और **200** हेलीपैड बनाने का लक्ष्य है, जिसका सीधा असर इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों और रीजनल एयरलाइंस पर पड़ सकता है।
क्या है ये नया प्लान?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मॉडिफाइड UDAN' स्कीम का ऐलान किया है। यह अगले 10 सालों (FY 2026-27 से FY 2035-36) तक चलने वाला एक बड़ा एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोग्राम है। सरकार का मकसद पूरे भारत में रीजनल एयर कनेक्टिविटी को मजबूत करना है। इस स्कीम के तहत, अभी तक चालू न हुए एयरपोर्ट्स को डेवलप किया जाएगा, नए हेलीपैड बनाए जाएंगे और दूर-दराज के इलाकों में हवाई सफर को सस्ता और आसान बनाने के लिए फाइनेंशियल सपोर्ट भी दिया जाएगा।
इसी कड़ी में, जोधपुर एयरपोर्ट पर ₹480 करोड़ की लागत से बना नया टर्मिनल भी आज शुरू किया गया है, जिससे सालाना 20 लाख पैसेंजर्स को संभालने की क्षमता बढ़ जाएगी।
इंफ्रास्ट्रक्चर पर कितना खर्च?
इस स्कीम के लिए ₹12,000 करोड़ सिर्फ 100 नए एयरपोर्ट्स के डेवलपमेंट के लिए रखे गए हैं। वहीं, कम पैसेंजर्स वाले रूट्स पर एयरलाइंस को चलाने के लिए सरकार ₹10,000 करोड़ 'वायबिलिटी गैप फंडिंग' (Viability Gap Funding) के तौर पर देगी, ताकि शुरुआती दौर में होने वाले नुकसान की भरपाई हो सके। इसके अलावा, ₹2,500 करोड़ मौजूदा ऑपरेशंस और मेंटेनेंस के लिए होंगे। सिर्फ एयरपोर्ट ही नहीं, सरकार 200 नए हेलीपैड बनाने की भी योजना बना रही है, ताकि पहाड़ी और दुर्गम इलाकों तक पहुंच आसान हो सके।
स्वदेशी विमानों पर जोर
इस बार के प्लान में एक खास बात यह है कि सरकार 'मेड इन इंडिया' विमानों और हेलीकॉप्टर्स के इस्तेमाल पर जोर दे रही है। इसमें HAL Dhruv और Dornier जैसे विमानों की खरीद शामिल है। इसका मकसद देश की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को बढ़ाना और मुश्किल जगहों पर लॉजिस्टिक्स को सुगम बनाना है। इससे एविएशन सेक्टर में लोकल मैन्युफैक्चरिंग और मेंटेनेंस सर्विसेज के लिए लंबे समय तक डिमांड बनी रहने की उम्मीद है।
बिजनेस के लिहाज़ से क्या है हकीकत?
भले ही सरकार भारी आर्थिक मदद दे रही हो, लेकिन रीजनल एविएशन एक चैलेंजिंग बिजनेस मॉडल है। पिछले UDAN फेज के आंकड़ों को देखें तो, इस बिजनेस की सफलता पैसेंजर डिमांड और एयरलाइंस की कम लागत रखने की क्षमता पर निर्भर करती है। ये नए एयरपोर्ट कितने सफल होंगे, यह वहां उड़ानों की संख्या और रीजनल प्लेयर्स की सरकारी मदद पर निर्भरता पर टिका रहेगा। एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने वाली कंपनियों, जैसे कि जोधपुर टर्मिनल बनाने वाली कंपनियों, को अगले दशक तक काम का एक स्थिर पाइपलाइन मिल सकता है।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
इस स्कीम पर नज़र रखने वाले निवेशकों के लिए सबसे अहम होगा कि 100 नए एयरपोर्ट्स के लिए टेंडर कैसे दिए जाते हैं और उनके चालू होने के बाद उनका इस्तेमाल कितना होता है। इसके अलावा, HAL जैसी कंपनियों के लिए स्वदेशी विमानों की सप्लाई के ऑर्डर पर भी नजर रखी जा सकती है। रीजनल एयरलाइन ऑपरेटर्स के प्रॉफिट पर इसका क्या असर पड़ेगा और कंस्ट्रक्शन फर्म्स इन प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा कर पाएंगी या नहीं, ये देखना अहम होगा।
