केंद्र सरकार ने अगले 10 सालों के लिए क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी योजना (UDAN) के विस्तार के लिए ₹28,840 करोड़ का फंड आवंटित किया है। इस पैसे का इस्तेमाल 100 नए एयरपोर्ट और 200 हेलीपोर्ट बनाने में किया जाएगा, खासकर दूरदराज के इलाकों पर फोकस रहेगा।
एविएशन मिनिस्ट्री का बड़ा प्लान
नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने अगले दशक के लिए एक बड़ी वित्तीय योजना का खुलासा किया है। मंत्रालय ने क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने वाली UDAN (उड़े देश का आम नागरिक) स्कीम के अगले चरण के लिए ₹28,840 करोड़ की राशि तय की है। इस योजना का मकसद उन इलाकों में कनेक्टिविटी की कमी को दूर करना है जहां अभी हवाई सेवाएं नहीं पहुंच पातीं। इसके लिए नए हवाई अड्डों के विकास और क्षेत्रीय एयरलाइंस के परिचालन खर्चों, दोनों को फंड किया जाएगा।
इंफ्रास्ट्रक्चर और ऑपरेशनल बजट का बंटवारा
इस फंड को कई मुख्य क्षेत्रों में बांटा गया है ताकि लंबी अवधि का विकास सुनिश्चित हो सके। इसमें से एक बड़ी राशि, यानी ₹12,159 करोड़, नए हवाई अड्डों के निर्माण के लिए रखी गई है। हर एयरपोर्ट के निर्माण पर औसतन ₹100 करोड़ का अनुमानित खर्च आएगा। मुश्किल इलाकों में कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए ₹3,661 करोड़ का उपयोग 200 आधुनिक हेलीपोर्ट बनाने में किया जाएगा, जिनकी अनुमानित लागत लगभग ₹15 करोड़ प्रति हेलीपोर्ट होगी। इसके अलावा, सरकार ने ₹10,043 करोड़ की राशि वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) के लिए भी अलग रखी है। यह एक ऐसा तंत्र है जो कम मुनाफे वाले क्षेत्रीय रूट्स पर चलने वाली एयरलाइंस को वित्तीय सहायता देता है, ताकि वे किफायती किराया बनाए रखते हुए अपने परिचालन खर्चों को पूरा कर सकें।
भारत के एविएशन नेटवर्क का विस्तार
इस विस्तार योजना के तहत भारत के मौजूदा हवाई नेटवर्क में 100 नए एयरपोर्ट और 200 हेलीपोर्ट जोड़े जाएंगे। UDAN स्कीम शुरू होने के बाद से, भारत के एविएशन सेक्टर में काफी ग्रोथ देखी गई है, और देश में अब तक कुल 165 एयरपोर्ट चालू हो चुके हैं। वर्तमान रणनीति का फोकस सी-प्लेन (seaplanes) और हेलीकॉप्टर सेवाओं के विस्तार सहित व्यापक कनेक्टिविटी पर है, जिससे पहाड़ी और दूरदराज के जिलों में पर्यटन और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
सेक्टर का संदर्भ और निवेशकों पर नजर
भारत दुनिया के तीसरे सबसे बड़े घरेलू एविएशन मार्केट के रूप में स्थापित हो चुका है। इस पूंजी-गहन योजना की सफलता काफी हद तक केंद्र सरकार और राज्य प्रशासनों के बीच समन्वय पर निर्भर करेगी, खासकर भूमि अधिग्रहण और स्थानीय समर्थन जैसे मामलों में। जहां यह निवेश एयरपोर्ट डेवलपमेंट में लगी निर्माण और इंजीनियरिंग कंपनियों के लिए एक मजबूत अवसर प्रदान करता है, वहीं क्षेत्रीय एयरलाइंस भी अपनी देनदारी और नकदी प्रवाह (cash flow) को प्रबंधित करने के लिए वायबिलिटी गैप फंडिंग के वितरण पर बारीकी से नजर रखेंगी। एयरलाइन मार्जिन पर इसका दीर्घकालिक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि इन रूट्स को राष्ट्रीय नेटवर्क में कितनी प्रभावी ढंग से एकीकृत किया जाता है और इन नए जुड़े क्षेत्रों से यात्रियों की मांग कैसी रहती है। निवेशक प्रोजेक्ट शुरू होने की समय-सीमा और इन रूट्स के लिए होने वाली अगली बोली प्रक्रियाओं में क्षेत्रीय एयरलाइन ऑपरेटरों की भागीदारी के स्तर पर भविष्य के अपडेट पर नजर रख सकते हैं।
