ईंधन की मार: क्यों सड़कों पर उतरे गिग वर्कर्स?
इस हड़ताल का सबसे बड़ा कारण 15 मई 2026 को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हुआ लगभग ₹3 प्रति लीटर का इजाफा है। पिछले करीब चार सालों में खुदरा ईंधन की कीमतों में यह पहली बड़ी बढ़ोतरी है, जिसका सीधा असर भारत में गाड़ी चलाने वाले करीब 1.2 करोड़ गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स की रोजमर्रा की कमाई पर पड़ रहा है।
Zomato, Uber पर क्या होगा असर?
Zomato (जिसका मार्केट कैप लगभग ₹2.32 लाख करोड़ है) और Uber (जिसकी मार्केट कैप $152.91 बिलियन है) जैसे प्लेटफॉर्म्स को इस हड़ताल से अपनी सेवाओं में बाधा का सामना करना पड़ सकता है। यूनियन की मुख्य मांग है कि प्रति किलोमीटर न्यूनतम भुगतान ₹20 किया जाए। उनका कहना है कि ईंधन की बढ़ती लागत और अन्य परिचालन खर्चों को देखते हुए वर्तमान भुगतान राशि अपर्याप्त है, जबकि प्लेटफॉर्म्स ने इसमें कोई बढ़ोतरी नहीं की है।
गिग इकोनॉमी का बढ़ता दायरा और वर्कर्स की चुनौतियां
भारत की गिग इकोनॉमी तेजी से बढ़ रही है, NITI Aayog के अनुसार 2029-30 तक यह 23.5 मिलियन वर्कर्स तक पहुंच सकती है। खासकर फूड डिलीवरी सेक्टर में भी भारी ग्रोथ का अनुमान है, जो 2030 तक $27 बिलियन तक पहुंच सकता है। लेकिन वर्कर्स के लिए यह विस्तार अपनी चिंताओं के साथ आ रहा है। अप्रैल 2026 से लागू हुए नए सामाजिक सुरक्षा नियमों के तहत वर्कर्स को कुछ शर्तों को पूरा करना होता है। हालांकि देश में महंगाई दर 3.48% (अप्रैल 2026) पर है, ईंधन की कीमतों में वृद्धि सीधे तौर पर गिग वर्कर्स की आय को प्रभावित कर रही है।
वर्तमान में डिलीवरी ड्राइवर्स को प्रति किलोमीटर जो भुगतान मिलता है, वह यूनियन की ₹20 की मांग से काफी कम है। एक अनुमान के मुताबिक, लाइट कमर्शियल व्हीकल्स (LCVs) के परिचालन खर्च ₹25-₹40 प्रति किलोमीटर तक आ सकते हैं, जो वर्कर्स की मुश्किल स्थिति को दर्शाता है।
प्लेटफॉर्म्स के मुनाफे पर दबाव
यह स्ट्राइक गिग इकोनॉमी मॉडल की वित्तीय कमजोरी को उजागर करती है। Zomato और Uber जैसे प्लेटफॉर्म अक्सर कम परिचालन लागत पर काम करते हैं। ₹20 प्रति किलोमीटर की मांग से उनकी लागत संरचना पूरी तरह बदल सकती है। यदि कंपनियों को यह लागत बढ़ानी पड़ी या ग्राहकों पर डालनी पड़ी, तो इससे मांग कम हो सकती है और मुनाफे पर असर पड़ सकता है। Zomato का उच्च P/E अनुपात दर्शाता है कि इसे भविष्य की ग्रोथ से काफी उम्मीदें हैं, इसलिए परिचालन में बाधाएं या लागत वृद्धि इसके लिए नुकसानदेह हो सकती है। Uber को भी ड्राइवर संतुष्टि और रिटेंशन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता रहा है। ऐसे में अगर ईंधन लागत बढ़ने पर भी भुगतान नहीं बढ़ा, तो ड्राइवर छोड़ सकते हैं और सेवा की विश्वसनीयता कम हो सकती है।
इंडस्ट्री ग्रोथ को झटका?
विश्लेषक Uber के लॉन्ग-टर्म आउटलुक को लेकर सकारात्मक हैं, जबकि Zomato ने हाल में मजबूत Q4 FY26 नतीजे पेश किए हैं। हालांकि, निरंतर प्रदर्शन के लिए कंपनियों को लागत प्रबंधन और बढ़ती बाहरी दबावों के बीच वर्कर्स को जोड़े रखना होगा। संभव है कि भविष्य में प्लेटफॉर्म्स अपने भुगतान मॉडल को एडजस्ट करें या अधिक स्पष्ट नियमों की तलाश करें ताकि सेवा वितरण में निरंतरता बनी रहे।