सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने फरवरी 2027 तक देश में 'मल्टी-लेन फ्री फ्लो' (MLFF) टोलिंग सिस्टम लागू करने का रोडमैप तैयार किया है। इसके जरिए UPI, FASTag और Vahan डेटा को इंटीग्रेट करके पूरी तरह से बैरियर-फ्री सफर का लक्ष्य रखा गया है।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने मुंबई में आयोजित ग्लोबल फिनटेक फेस्ट के दौरान देश की ट्रांसपोर्ट व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव का संकेत दिया है। सरकार का लक्ष्य है कि फरवरी 2027 तक देशभर में 'मल्टी-लेन फ्री फ्लो' सिस्टम को लागू कर दिया जाए, जिससे गाड़ियों को टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह पहल UPI, आधार, FASTag और Vahan डेटाबेस को एक साथ जोड़कर एक 'कनेक्टेड मोबिलिटी इकोसिस्टम' बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
इंश्योरेंस सेक्टर में बदलाव
इस नई व्यवस्था के तहत सरकार 'यूज-बेस्ड' मोटर इंश्योरेंस को बढ़ावा दे रही है। अब इंश्योरेंस प्रीमियम सिर्फ गाड़ी की कीमत पर नहीं, बल्कि 'पे-एज-यू-ड्राइव' (Pay-As-You-Drive) और 'पे-हाउ-यू-ड्राइव' (Pay-How-You-Drive) जैसे मॉडल्स पर आधारित होंगे। यानी, आप गाड़ी कैसे और कितनी चलाते हैं, उसके आधार पर आपका प्रीमियम तय होगा।
इकोनॉमी को होगा फायदा
FASTag के आने से देश को अब तक लगभग ₹68,500 करोड़ सालाना की बचत हुई है, जो ईंधन की खपत और समय की बचत के रूप में देखी गई है। अब इस पूरी तरह डिजिटल और बैरियर-फ्री सिस्टम से लॉजिस्टिक्स लागत में और भी कमी आने की उम्मीद है।
चुनौतियां और रिस्क
इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट में कुछ तकनीकी जोखिम भी हैं। MLFF सिस्टम के लिए पूरी तरह सटीक AI और कैमरा इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होगी, ताकि गाड़ियों की पहचान और टोल ट्रांजेक्शन बिना किसी गलती के हो सकें। साथ ही, इतने सारे डेटाबेस (Vahan, FASTag, आधार) के एकीकरण से डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा का मुद्दा भी बेहद संवेदनशील बना हुआ है।
निवेशकों के नजरिए से देखें तो यह बदलाव टोल इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑटोमोटिव टेलीमैटिक्स और डिजिटल पेमेंट कंपनियों के लिए नई संभावनाएं खोल सकता है। हालांकि, फरवरी 2027 के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए आने वाले पायलट प्रोजेक्ट्स और डेटा रेगुलेशन पर नजर रखना जरूरी होगा।
