GMR हैदराबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने रेगुलेटर से यात्रियों के लिए यूजर डेवलपमेंट फीस (UDF) का बोझ डिपार्चर (Departure) से अराइवल (Arrival) पैसेंजर्स पर डालने का प्रस्ताव दिया है। इसके साथ ही, कंपनी ने भविष्य में **₹13,975 करोड़** के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश की भी घोषणा की है।
क्या हुआ है?
लिस्टेड कंपनी GMR एयरपोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड की अहम सब्सिडियरी, GMR हैदराबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (GHIAL) ने एयरपोर्ट्स इकोनॉमिक रेगुलेटरी अथॉरिटी (AERA) को सालाना टैरिफ प्रस्ताव (Annual Tariff Proposal) सौंपा है। इस प्रस्ताव में यूजर डेवलपमेंट फीस (UDF) की संरचना में एक बड़ा बदलाव शामिल है। अगर यह मंजूर हो जाता है, तो एयरपोर्ट इस शुल्क का एक हिस्सा डिपार्चर पैसेंजर्स से हटाकर अराइवल पैसेंजर्स पर लगाएगा। साथ ही, कंपनी ने अगले कुछ सालों में एक नया टर्मिनल और रनवे बनाने के लिए लगभग ₹13,975 करोड़ के निवेश की योजना भी बताई है।
फीस के ढांचे में बदलाव
इस नए प्रस्ताव का मकसद कुल शुल्क को बढ़ाना नहीं है, बल्कि यह तय करना है कि यह शुल्क कैसे वसूला जाएगा। अभी, UDF पूरी तरह से यात्रियों के डिपार्चर के समय ली जाती है। नए प्रस्ताव के तहत, GHIAL इस फीस का कुछ हिस्सा अराइवल के समय वसूलना चाहता है। उदाहरण के लिए, डोमेस्टिक पैसेंजर्स डिपार्चर पर ₹580 और अराइवल पर ₹170 दे सकते हैं, जिससे कुल ₹750 की राशि बनी रहेगी। इंटरनेशनल यात्रियों के लिए भी इसी तरह का विभाजन प्रस्तावित है, जिससे डिपार्चर पर लगने वाला अग्रिम शुल्क लगभग 23% कम हो जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य हैदराबाद एयरपोर्ट के टैरिफ ढांचे को भारत के अन्य प्रमुख एयरपोर्ट्स के अनुरूप बनाना है।
इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रोथ प्लान
प्रस्तावित ₹13,975 करोड़ का निवेश लंबी अवधि की क्षमता बढ़ाने के लिए है। इस योजना में एक दूसरा रनवे और एक नया पैसेंजर टर्मिनल बनाना शामिल है। ये प्रोजेक्ट्स एयरपोर्ट की ट्रैफिक ग्रोथ को संभालने की रणनीति का हिस्सा हैं, जिसके तहत फाइनेंशियल ईयर 2031 तक सालाना 5.1 करोड़ यात्रियों को संभालने का अनुमान है। कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए, एयरपोर्ट ने एक वेरिएबल टैरिफ प्लान का भी प्रस्ताव दिया है, जिसमें एयरलाइंस के लिए नई उड़ानें शुरू करने पर जीरो लैंडिंग और पार्किंग शुल्क जैसे इंसेंटिव शामिल हैं। इसका खास फोकस लॉन्ग-हॉल इंटरनेशनल फ्लाइट्स को आकर्षित करना है।
निवेशक इस प्लान पर क्यों नजर रखेंगे?
एविएशन और एयरपोर्ट सेक्टर के निवेशकों के लिए, इस प्रस्ताव में दो महत्वपूर्ण पहलू हैं: रेगुलेटरी अप्रूवल और कैपिटल स्पेंडिंग। सबसे पहले, फीस का ढांचा अभी फाइनल नहीं है। इसे रेगुलेटर AERA के साथ एक कंसल्टेशन प्रोसेस से गुजरना होगा। इन अप्रूवल्स में कोई भी बदलाव या देरी एयरपोर्ट ऑपरेटर के रेवेन्यू की विजिबिलिटी को प्रभावित कर सकती है।
दूसरे, ₹13,975 करोड़ का भारी-भरकम इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च एक बड़ी प्रतिबद्धता है। हालांकि इस तरह के निवेश लंबी अवधि की ग्रोथ और ज्यादा यात्री ट्रैफिक को संभालने के लिए जरूरी हैं, लेकिन इनमें अक्सर काफी कर्ज लेना पड़ता है। निवेशक इस बात पर बारीकी से नजर रखेंगे कि कंपनी इस विस्तार को कैसे फंड करने की योजना बना रही है, चाहे वह इंटरनल कैश जनरेशन से हो या नए कर्ज से, और यह पैरेंट कंपनी GMR एयरपोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर की बैलेंस शीट को कैसे प्रभावित करता है।
आगे क्या देखना होगा?
मार्केट पार्टिसिपेंट्स संभवतः फीस स्ट्रक्चर में बदलाव और कैपिटल स्पेंडिंग प्लान की मंजूरी पर एयरपोर्ट्स इकोनॉमिक रेगुलेटरी अथॉरिटी की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर नजर रखेंगे। इसके अतिरिक्त, नए टर्मिनल और रनवे के लिए फंडिंग मिक्स का विवरण कंपनी की भविष्य की डेट प्रोफाइल को समझने के लिए महत्वपूर्ण होगा। नियोजित इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की वास्तविक प्रगति और अधिक एयरलाइंस और रूट्स को आकर्षित करने में नई इंसेंटिव योजनाओं की सफलता आने वाले वर्षों के लिए प्रमुख परफॉरमेंस इंडिकेटर्स होंगे।
