GMR Airports अपनी दिल्ली एयरपोर्ट की जमीन का कॉमर्शियल इस्तेमाल (Monetize) करने जा रही है। साथ ही, कंपनी ने नागपुर एयरपोर्ट के अपग्रेड के लिए ₹500-600 करोड़ के निवेश का ऐलान किया है। इस दोहरी रणनीति से कंपनी अपनी मौजूदा जमीन से वैल्यू बढ़ाना चाहती है और साथ ही एक नया एविएशन और लॉजिस्टिक्स हब तैयार करना चाहती है। कंपनी ने हाल ही में नागपुर एयरपोर्ट का कंट्रोल संभाला है।
क्या है कंपनी की नई रणनीति?
GMR Airports ने अपने ऑपरेशन बढ़ाने और कमाई के नए रास्ते खोलने के लिए एक दोहरी रणनीति अपनाई है। कंपनी दिल्ली एयरपोर्ट पर मौजूद जमीन का कॉमर्शियल इस्तेमाल शुरू करने वाली है, जिसका लक्ष्य होटल और ऑफिस स्पेस बनाना है। इसी के साथ, GMR ने नागपुर के डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर इंटरनेशनल एयरपोर्ट का कंट्रोल संभाल लिया है और इसके मेंटेनेंस, अपग्रेड और विस्तार के लिए ₹500-600 करोड़ के निवेश का ऐलान किया है। यह कदम 25 जून 2026 को नागपुर एयरपोर्ट को GMR की सब्सिडियरी, GMR नागपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (GNIAL) को सौंपे जाने के बाद उठाया गया है।
नागपुर एयरपोर्ट को हब बनाने की तैयारी
नागपुर एयरपोर्ट के लिए निवेश की योजना कई चरणों में बांटी गई है। चालू फाइनेंशियल ईयर में, कंपनी लगभग ₹200-250 करोड़ सिर्फ जरूरी मेंटेनेंस और तुरंत अपग्रेड पर खर्च करेगी। बाकी बचे ₹300-350 करोड़ लंबी अवधि की विस्तार परियोजनाओं के लिए इस्तेमाल होंगे। भारत के भौगोलिक केंद्र में स्थित होने के कारण, GMR नागपुर एयरपोर्ट को पैसेंजर ट्रैफिक और कार्गो लॉजिस्टिक्स दोनों के लिए एक बड़े केंद्र में बदलना चाहता है। फिलहाल यह एयरपोर्ट सालाना लगभग 30 लाख यात्रियों को संभालता है, और कंपनी का लक्ष्य इसे बढ़ाकर 3 करोड़ यात्री क्षमता तक ले जाना है। GMR को उम्मीद है कि एयरपोर्ट का कंट्रोल संभालने के बाद इस वित्तीय वर्ष में ही यात्रियों की संख्या में लगभग 25 लाख की बढ़ोतरी होगी।
दिल्ली एयरपोर्ट पर वैल्यू अनलॉक
वहीं, दिल्ली एयरपोर्ट पर GMR गैर-एरोनॉटिकल रेवेन्यू बढ़ाने पर फोकस कर रही है। कंपनी अपनी उपलब्ध जमीन पर होटल और ऑफिस ब्लॉक जैसे कॉमर्शियल रियल एस्टेट प्रोजेक्ट विकसित करने की योजना बना रही है। यह GMR की 'एयरपोर्ट एडजेसेंसी' बिजनेस को मजबूत करने की बड़ी रणनीति का हिस्सा है। इसमें रिटेल, ड्यूटी-फ्री शॉपिंग और रियल एस्टेट जैसे बिजनेस शामिल हैं, जिनसे यात्रियों की संख्या में उतार-चढ़ाव के बावजूद एक स्थिर आय बनी रहती है। कंपनी ने अपने दूसरे बड़े एयरपोर्ट्स पर भी इसी तरह के मॉडलों से सफलता पाई है।
निवेशकों के लिए अहम बातें
निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कंपनी अपने कैपिटल एलोकेशन और कर्ज का प्रबंधन कैसे करती है। एक बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी होने के नाते, GMR अपने बड़े प्रोजेक्ट्स, जैसे आंध्र प्रदेश में आने वाले भोग्राफी एयरपोर्ट के लिए काफी कर्ज लेती है। जमीन के कॉमर्शियल इस्तेमाल और गैर-एरोनॉटिकल कमाई बढ़ाने से कंपनी के कैश फ्लो में सुधार और कर्ज पर निर्भरता कम होने की उम्मीद है। हालांकि, इन प्रोजेक्ट्स को समय पर और बजट के अंदर पूरा करना कंपनी के लिए अहम होगा। GMR पर कर्ज का दबाव हमेशा रहा है, इसलिए प्रोजेक्ट्स का कुशल निष्पादन और नई संपत्तियों से समय पर कमाई कंपनी की स्थिरता के लिए जरूरी है।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
निवेशक नागपुर एयरपोर्ट की मास्टर प्लान की प्रगति और दिल्ली की जमीन के कॉमर्शियल इस्तेमाल की टाइमलाइन पर नजर रख सकते हैं। इसके अलावा, भोग्राफी एयरपोर्ट के शुरू होने की समय-सीमा और बड़े कैपिटल एक्सपेंडिचर के बीच कंपनी की इंटरेस्ट कवरेज रेशियो को मैनेज करने की क्षमता पर भी ध्यान देना होगा। साथ ही, मैनेजमेंट की ओर से भविष्य की रीफाइनेंसिंग योजनाओं या कर्ज घटाने की रणनीतियों पर कोई भी कमेंट्री अहम साबित होगी, खासकर जब नई संपत्तियां कमाई में योगदान देना शुरू करें।
