ऑपरेशनल टेकओवर शुरू
GMR नागपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (GNIAL) नागपुर एयरपोर्ट का कंट्रोल लेने के लिए पूरी तरह तैयार है। एक लंबी कानूनी लड़ाई के बाद, जिसका आधुनिकीकरण अटका हुआ था, अब केंद्रीय कैबिनेट से एग्रीमेंट को मंजूरी मिल गई है। GMR अब जल्द ही ऑपरेशन शुरू करेगी। शुरुआती फेज में मौजूदा टर्मिनल को 140 स्टाफ के साथ अपग्रेड किया जाएगा और अगले 36 महीनों में एक नया इंटीग्रेटेड टर्मिनल बनाने का काम शुरू होगा। इस विस्तार की मदद से एयरपोर्ट सालाना 3 करोड़ पैसेंजर्स को हैंडल कर सकेगा, जो कि FY26 के 2.5 मिलियन के आंकड़े से काफी ज्यादा है।
नागपुर बनेगा एविएशन हब?
GMR की योजना नागपुर को एक अहम लॉजिस्टिक्स और एविएशन हब बनाने की है, ठीक वैसे ही जैसे FedEx ने डलास-फोर्ट वर्थ को बनाया था। यह रणनीति भारत के बड़े एयरपोर्ट्स पर रात में पार्किंग की सीमित जगह की समस्या का समाधान करेगी। नागपुर को ऐसी एयरलाइंस के लिए एक किफायती बेस के तौर पर पेश किया जाएगा जो सुबह जल्दी उड़ान भरने की योजना बना रही हैं। इस रीजन में मौजूदा MRO (मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल) फैसिलिटी, जैसे Indamer Technics, भी इंडस्ट्रियल कोलैबोरेशन के मौके देती हैं, जिससे एयरोस्पेस और डिफेंस सेक्टर की कंपनियों को आकर्षित किया जा सकता है।
GMR Airports पर वित्तीय दबाव
अपने रणनीतिक विस्तार की योजनाओं के बावजूद, GMR Airports Infrastructure Limited कई बड़ी वित्तीय चुनौतियों का सामना कर रही है। मार्च 2025 तक, कंपनी पर लगभग ₹315 बिलियन का कंसोलिडेटेड नेट डेट था। इस भारी कर्ज़ के चलते कंपनी को अपने कैश फ्लो को बड़ी सावधानी से मैनेज करना होगा, खासकर जब GMR नए और मौजूदा एयरपोर्ट प्रोजेक्ट्स में भारी निवेश कर रही है। मौजूदा मार्केट डेटा के अनुसार, कंपनी का अर्निंग पर शेयर (EPS) निगेटिव है और P/E रेश्यो भी इसी दबाव को दिखाता है। GMR का मुकाबला Adani Group जैसी कंपनियों से भी है, जो तेजी से अपने एयरपोर्ट ऑपरेशन्स का विस्तार कर रही हैं। एनालिस्ट्स को कंपनी के हाई इंटरेस्ट-कवरेज रेश्यो और एविएशन सेक्टर पर फ्यूल प्राइस और करेंसी में उतार-चढ़ाव के असर को लेकर भी चिंताएं हैं, जो बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को प्रभावित कर सकते हैं।
आगे क्या?
नागपुर एयरपोर्ट का अधिग्रहण GMR के लिए एक महत्वपूर्ण और लंबी अवधि का रेवेन्यू स्ट्रीम साबित हो सकता है। हालांकि एनालिस्ट्स आमतौर पर 'स्ट्रॉन्ग बाय' की सलाह दे रहे हैं, लेकिन उनकी उम्मीदें इस बात पर टिकी हैं कि GMR अपने भारी विस्तार को अपने वित्तीय बोझ को बढ़ाए बिना कैसे मैनेज करती है। भविष्य की सफलता नॉन-एरोनॉटिकल रेवेन्यू को बढ़ाने और अपने एयरपोर्ट पोर्टफोलियो में ऑपरेशनल एफिशिएंसी बनाए रखने पर निर्भर करेगी।
