क्यों दौड़ा GMR Airports का शेयर?
यह परफॉरमेंस इस बात का संकेत है कि निवेशकों का ध्यान अब GMR Airports Infrastructure की लंबी अवधि की कैश फ्लो जनरेशन क्षमता पर शिफ्ट हो गया है, जिसने मौजूदा मुनाफे में आई गिरावट को पीछे छोड़ दिया है। कंपनी की ट्रैफिक ग्रोथ बनाए रखने और ऑपरेशनल एफिशिएंसी के साथ-साथ स्ट्रेटेजिक फाइनेंशियल मूव्स, हालिया शेयर की तेजी के मुख्य कारण माने जा रहे हैं।
पैसेंजर ट्रैफिक में लगातार बढ़ोतरी
GMR Airports Infrastructure ने 2026 की शानदार शुरुआत की है। जनवरी में पैसेंजर ट्रैफिक 3.9% बढ़कर 1.13 करोड़ पर पहुंच गया। इसमें इंटरनेशनल ट्रैफिक 4.4% और डोमेस्टिक ट्रैफिक 3.7% बढ़ा। दिल्ली एयरपोर्ट से 72.3 लाख पैसेंजर्स गुजरे, जो 4.7% की बढ़ोतरी है। एयरक्राफ्ट मूवमेंट में भी 5.1% का इजाफा देखा गया, जो नेटवर्क में बढ़ी हुई ऑपरेशनल एक्टिविटी को दर्शाता है।
Q3 के नतीजे: रेवेन्यू चमका, प्रॉफिट गिरा
फाइनेंशियल ईयर 2026 की तीसरी तिमाही (Q3 FY26) में, GMR Airports Infrastructure ने ₹3,994.03 करोड़ का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले साल की इसी अवधि के ₹2,653.24 करोड़ से 50.5% ज्यादा है। इस टॉप-लाइन स्ट्रेंथ के साथ, EBITDA ₹1,700 करोड़ रहा, जो पिछले साल की तुलना में 71% अधिक है और मार्केट के अनुमानों से 8% बेहतर था। हालांकि, नेट प्रॉफिट 14% घटकर ₹173.96 करोड़ रह गया, जबकि पिछले साल यह ₹202.1 करोड़ था। यह दिखाता है कि ऑपरेशनल लेवल पर कंपनी की परफॉरमेंस मजबूत है, लेकिन इंटरेस्ट और अन्य खर्चों ने बॉटम लाइन को प्रभावित किया।
फ्यूचर कैश फ्लो की उम्मीदें
मुनाफे में गिरावट के बावजूद मार्केट की पॉजिटिव प्रतिक्रिया का मुख्य कारण बेहतर भविष्य के कैश फ्लो की उम्मीदें हैं। JM Financial के एनालिस्ट्स का मानना है कि GMR Airports फाइनेंशियल ईयर 2027 (FY27) में एक लो कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) फेज में प्रवेश कर रहा है, क्योंकि प्रमुख प्रोजेक्ट्स का Capex काफी हद तक पूरा हो चुका है। इसके साथ ही, कम रेट्स पर डेट रीफाइनेंसिंग से इंटरेस्ट कॉस्ट में कमी आई है, जिससे फ्री कैश फ्लो में अच्छी बढ़ोतरी की उम्मीद है। कंपनी का नेट डेट लगभग ₹34,500 करोड़ पर स्थिर बना हुआ है।
सेक्टर की चुनौतियाँ और GMR की रणनीति
हालांकि GMR Airports ऑपरेशनल मजबूती दिखा रहा है, लेकिन भारतीय एविएशन सेक्टर को फ्यूल प्राइसेस और लीज ऑब्लिगेशन्स जैसे हाई ऑपरेटिंग कॉस्ट की वजह से प्रॉफिटेबिलिटी की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके विपरीत, GMR की परफॉरमेंस दिल्ली एयरपोर्ट पर टैरिफ रीसेट्स, नॉन-एरोनॉटिकल सेगमेंट के विस्तार और गोवा (मोपा) एयरपोर्ट के टर्नअराउंड जैसे खास फैक्टर्स से बढ़ी है।
कंसर्न: भारी डेट और मार्जिन पर दबाव
ऑप्टिमिज्म के बावजूद, GMR Airports पर एक महत्वपूर्ण डेट का बोझ है, जो ₹8,643.86 करोड़ से लेकर ₹34,500 करोड़ तक बताया गया है। कंपनी का P/E रेशियो अभी भी नेगेटिव है, जो भविष्य की अर्निंग्स स्टेबिलिटी और ग्रोथ एजम्प्शन पर निवेशकों के अनिश्चितता को दर्शाता है। EBITDA में मजबूत ग्रोथ के बावजूद, इसे लगातार नेट प्रॉफिट में बदलना, इंटरेस्ट एक्सपेंस को मैनेज करना और बैलेंस शीट को डी-लीवरेज करना महत्वपूर्ण होगा।
एनालिस्ट्स की राय
ज्यादातर ब्रोकरेज फर्म्स का आउटलुक पॉजिटिव बना हुआ है। JM Financial ने Sum of the Parts (SOTP) वैल्यूएशन के आधार पर ₹120 का टारगेट प्राइस बरकरार रखा है। एनालिस्ट्स की आम राय 'स्ट्रॉन्ग बाय' की है, जिसमें 12 महीने का औसत प्राइस टारगेट ₹112.67 है, जो लगभग 20% के संभावित अपसाइड का संकेत देता है।