GMR Airports का भोगपुरम एयरपोर्ट अब ऑपरेशनल हो गया है, जिसकी सालाना क्षमता **60 लाख** यात्रियों की है। कंपनी की नजर सिर्फ पैसेंजर ट्रैफिक पर ही नहीं, बल्कि कार्गो और MRO सेक्टर से मोटा मुनाफा कमाने पर है।
रेवेन्यू बढ़ाने की नई रणनीति
GMR Airports Infrastructure द्वारा संचालित 'अल्लूरी सीताराम राजू इंटरनेशनल एयरपोर्ट' ने 17 अगस्त, 2026 से कमर्शियल ऑपरेशंस शुरू कर दिए हैं। कंपनी का लक्ष्य इस ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट को सिर्फ एक एयरपोर्ट तक सीमित न रखकर इसे MRO (मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहाल), एविएशन मैन्युफैक्चरिंग और कार्गो का हब बनाना है। इस कदम से कंपनी अपने रेवेन्यू सोर्सेज को डाइवर्सिफाई करना चाहती है।
कार्गो टर्मिनल और इंफ्रास्ट्रक्चर
एयरपोर्ट में 5,000 वर्ग मीटर का एक डेडिकेटेड कार्गो टर्मिनल बनाया गया है, जिसकी सालाना क्षमता 25,000 टन है। इसे खास तौर पर आंध्र प्रदेश के फार्मा और सीफूड एक्सपोर्ट को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। हालांकि, निवेशकों को यह देखना होगा कि कंपनी इन सुविधाओं के लिए कितने बड़े क्लाइंट्स और रेंटल्स जुटा पाती है।
भविष्य की योजना और चुनौतियां
फिलहाल इसकी क्षमता 60 लाख यात्रियों की है, जिसे भविष्य में मांग के अनुसार बढ़ाकर 4 करोड़ तक ले जाने की योजना है। इस मॉड्यूलर डिजाइन का फायदा यह है कि कंपनी अपनी पूंजी को ट्रैफिक के हिसाब से खर्च कर सकेगी। लेकिन, एयरपोर्ट डेवलपमेंट में लंबा समय लगता है। भारत में MRO मार्केट पहले ही काफी कॉम्पिटिटिव है, और ऐसे में मैन्युफैक्चरिंग के लिए जरूरी सप्लाई चेन और रेगुलेटरी मंजूरियां हासिल करना एक बड़ी चुनौती हो सकती है।
निवेशकों के लिए क्या है जरूरी?
शेयरहोल्डर्स को कंपनी के पैसेंजर वॉल्यूम के साथ-साथ कार्गो की ग्रोथ पर पैनी नजर रखनी चाहिए। क्या कंपनी अपने कर्ज (Debt) को मैनेज करते हुए इन नई सेवाओं से मुनाफा कमा पाती है, यही आने वाले समय में स्टॉक की चाल तय करेगा।
