ब्रोकरेज का भरोसा बरकरार
ब्रोकरेज फर्म Elara Capital ने GMR Airports पर अपना भरोसा कायम रखा है। उन्होंने स्टॉक पर 'Buy' रेटिंग दी है और शेयर के लिए ₹140 का टारगेट प्राइस (Target Price) तय किया है। फर्म का मानना है कि कंपनी के मार्जिन (Margins) में बढ़ोतरी और प्रोजेक्ट्स के पूरा होने के करीब आने से शेयर में 40% तक की तेजी आ सकती है। दिल्ली एयरपोर्ट पर टैरिफ (Tariff) में सुधार और नॉन-एयरोस्पेस बिजनेस के विस्तार को इसके मुख्य कारण बताया जा रहा है।
फिलहाल, GMR Airports का P/E रेश्यो (Price-to-Earnings Ratio) करीब 78 के आसपास है और मार्केट कैप (Market Capitalization) लगभग ₹1.05 लाख करोड़ है। यह निवेशकों के विश्वास को दिखाता है, लेकिन यह इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के कुछ दूसरे स्टॉक्स के मुकाबले महंगा भी माना जा रहा है।
तिमाही नतीजे: रेवेन्यू बढ़ा, मुनाफा घटा
फाइनेंशियल ईयर 2026 की तीसरी तिमाही (Q3FY26) में GMR Airports की कुल इनकम पिछले साल के मुकाबले ₹4,082.77 करोड़ तक पहुंच गई, जो एक बड़ी बढ़ोतरी है। हालांकि, नेट प्रॉफिट में 14% की गिरावट आई और यह ₹173.96 करोड़ पर आ गया। कंपनी का कहना है कि नए लेबर कोड (Labour Codes) लागू करने जैसे एकमुश्त खर्चों (one-time expenses) के कारण यह गिरावट आई है। पिछले साल इसी अवधि में कंपनी ने ₹202.10 करोड़ का मुनाफा कमाया था। GMR ग्रुप के कंसोर्टियम द्वारा संचालित दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (DIAL) ने ₹231 करोड़ का मुनाफा दर्ज किया, लेकिन कंसोलिडेटेड नतीजे एकमुश्त खर्चों के असर को दिखाते हैं।
कर्ज़ का बोझ और विस्तार की योजना
GMR Airports की एक बड़ी चिंता इसका कर्ज़ (Debt) है। एनालिस्ट्स (Analysts) का अनुमान है कि फाइनेंशियल ईयर 2026 में कंपनी का कर्ज़ अपने चरम पर पहुंच सकता है, खासकर जब भभोगपुरम (Bhogapuram) जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स चालू होने वाले हैं। उम्मीद है कि फाइनेंशियल ईयर 2027 से EBITDA (Earnings Before Interest, Taxes, Depreciation, and Amortization) में तेजी आने से कर्ज़ का स्तर धीरे-धीरे कम होगा।
कंपनी का डेट-टू-इक्विटी (Debt-to-Equity) रेश्यो करीब 1.80 है, जो एयरपोर्ट डेवलपमेंट जैसे कैपिटल-इंटेंसिव (capital-intensive) बिज़नेस के लिए काफी ज्यादा है। ऐसे में कंपनी को लगातार रेवेन्यू स्ट्रीम (revenue streams) और अनुशासित कैपिटल डिप्लॉयमेंट (capital deployment) की ज़रूरत होगी, खासकर तब जब भारतीय एविएशन सेक्टर (aviation sector) तेजी से विस्तार कर रहा है।
सेक्टर की चाल और जोखिम
भारतीय एविएशन सेक्टर (Indian aviation sector) में अगले कुछ सालों में 10% से 12% की सालाना चक्रवृद्धि विकास दर (CAGR) का अनुमान है, जो एयरपोर्ट ऑपरेटर्स के लिए एक मजबूत सकारात्मक संकेत है।
हालांकि, कुछ जोखिम भी हैं। बार-बार आने वाले एकमुश्त खर्चों का मुनाफे पर असर चिंता का विषय है। 1.80 का हाई डेट-टू-इक्विटी रेश्यो एक बड़ा वित्तीय बोझ है। इसके अलावा, दूसरे खिलाड़ी भी तेजी से विस्तार कर रहे हैं, जिससे कंपटीशन बढ़ सकता है। नॉन-एयरोस्पेस बिज़नेस पर बढ़ती निर्भरता भी अपने आप में एक जोखिम है, और कई बड़े प्रोजेक्ट्स को एक साथ मैनेज करने में एग्जीक्यूशन रिस्क (execution risks) भी शामिल हैं। इसी वजह से कुछ एनालिस्ट्स (Analysts) की रेटिंग अभी भी सतर्क या न्यूट्रल (neutral) बनी हुई है।
भविष्य की राह
कंपनी का मध्यम अवधि का वित्तीय स्वास्थ्य, एयरोस्पेस से मिलने वाले रेवेन्यू (aerospace realisations), नॉन-एयरोस्पेस बिज़नेस के मुद्रीकरण (monetization) और अनुशासित कैपिटल एलोकेशन (capital allocation) से मजबूत होने की उम्मीद है। इससे कैश जनरेशन (cash generation) बढ़ेगा और बैलेंस शीट (balance sheet) पर कर्ज़ का बोझ कम होगा। Elara Capital ने फाइनेंशियल ईयर 2026, 2027 और 2028 के लिए अपने अर्निंग अनुमानों को क्रमशः 2%, 3% और 4% तक बढ़ाया है, जो EBITDA ग्रोथ में तेजी और कैपिटल एक्सपेंडिचर (capital expenditure) के प्रभावी प्रबंधन में विश्वास दिखाता है।
