GHV Infra Projects Share: ₹216 करोड़ के ऑर्डर पर सरकारी जांच का साया? | शेयर बना निवेशकों की चिंता

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
GHV Infra Projects Share: ₹216 करोड़ के ऑर्डर पर सरकारी जांच का साया? | शेयर बना निवेशकों की चिंता
Overview

GHV Infra Projects ने महाराष्ट्र में कार शेड विस्तार के लिए ₹216 करोड़ के दो बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स हासिल किए हैं। हालांकि, ये कॉन्ट्रैक्ट्स प्रमोटर से जुड़ी कंपनी से होने के कारण कॉरपोरेट गवर्नेंस (corporate governance) को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

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GHV Infra Projects ने अपने ऑर्डर बुक (order book) को मजबूत करते हुए ₹216 करोड़ के दो नए इंफ्रास्ट्रक्चर वर्क ऑर्डर हासिल किए हैं। ये प्रोजेक्ट महाराष्ट्र में कार शेड विस्तार (car shed expansion) के लिए हैं।

नए सौदे, पुरानी चिंताएं

कंपनी ने जानकारी दी है कि ये दोनों वर्क ऑर्डर GHV (India) Private Limited से मिले हैं, जिनकी कुल वैल्यू जीएसटी (GST) से पहले करीब ₹216 करोड़ है। इनमें से ₹111 करोड़ का बड़ा ऑर्डर सैनपाडा (Sanpada) में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए है, जबकि ₹105 करोड़ का दूसरा प्रोजेक्ट कलवा (Kalwa) के लिए है। दोनों प्रोजेक्ट्स के 24 महीनों के भीतर पूरे होने की उम्मीद है, जो कंपनी के भविष्य के रेवेन्यू (revenue) के लिए अच्छी विजिबिलिटी (visibility) दे रहे हैं। यह कंपनी भारत के बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर का हिस्सा है, जिसके 2031 तक 8-9.5% की सालाना दर से बढ़ने का अनुमान है।

वैल्यूएशन (Valuation) पर सवाल

फिलहाल GHV Infra Projects की मार्केट कैप (market cap) लगभग ₹2,100-₹2,120 करोड़ के आसपास है। कंपनी का प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेशियो 45x से 60x के बीच चल रहा है, जो सेक्टर के मीडियन P/E 37.35x से काफी ऊपर है। यह बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर खिलाड़ियों जैसे Larsen & Toubro (P/E ~30.58x) और IRB Infrastructure Developers (P/E ~3.75x) की तुलना में कंपनी को काफी महंगा बनाता है। एक साल में शेयर में 320% से अधिक की शानदार तेजी के बावजूद, यह हाई वैल्यूएशन नए निवेशकों के लिए जोखिम भरा साबित हो सकता है। कंपनी का रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) पहले 82.1% तक पहुंचा था, लेकिन हालिया सालाना आंकड़ों के अनुसार यह लगभग 40.27% है।

सेक्टर की ग्रोथ और पिछले सौदे

भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर लगातार मजबूत ग्रोथ दिखा रहा है। GHV Infra, कार शेड विस्तार जैसे ट्रांसपोर्टेशन इंफ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जो इस सेक्टर का एक प्रमुख हिस्सा है। कंपनी ने पहले भी महत्वपूर्ण ऑर्डर हासिल किए हैं, जिनमें मुंबई रोडवर्क्स के लिए ₹546 करोड़ का ऑर्डर और साल की शुरुआत में ₹123 करोड़ का सोलर प्लांट ऑर्डर शामिल है। हालांकि, सितंबर 2025 में ₹120 करोड़ के ऑर्डर के बाद शेयर का भाव करीब ₹1,395 था, जबकि वर्तमान में यह ₹300 के आसपास ट्रेड कर रहा है। यह भारी मूल्य अंतर या तो अत्यधिक अस्थिरता या पिछली रिपोर्टिंग में किसी बड़ी त्रुटि का संकेत हो सकता है। 2025 में हुए कॉर्पोरेट एक्शन, जैसे बोनस शेयर जारी करना और स्टॉक स्प्लिट, ने भी ऐतिहासिक कीमतों की सीधी तुलना को जटिल बना दिया है।

गवर्नेंस (Governance) की गहराती चिंताएं

सबसे बड़ी चिंता कॉरपोरेट गवर्नेंस (corporate governance) के मोर्चे पर है। कंपनी को बार-बार कॉन्ट्रैक्ट देने वाली GHV (India) Private Limited में प्रमोटर (promoter) Jahidmohmed Vijapura की भी डायरेक्टorship और हिस्सेदारी है। GHV Infra का कहना है कि ये "आर्म्स लेंथ" (arm's length) यानी निष्पक्ष लेनदेन हैं, लेकिन कंपनी का इतिहास विवादों से जुड़ा है। जुलाई 2022 में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने Jahid Vijapura और GHV (India) Pvt Ltd के प्रतिनिधियों के खिलाफ राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अधिकारियों के साथ मिलकर प्रोजेक्ट फेवर के बदले रिश्वतखोरी का मामला दर्ज किया था। इस पृष्ठभूमि को देखते हुए, मौजूदा संबंधित-पक्ष (related-party) सौदों की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। इसके अलावा, कुछ विश्लेषणों से पता चलता है कि कंपनी पर कर्ज (debt) का स्तर उसके ऑपरेटिंग कैश फ्लो (operating cash flow) से पूरी तरह समर्थित नहीं है। प्रॉफिट मार्जिन (profit margins) भी 15.5% से गिरकर हाल ही में 7.8% पर आ गया है। रेवेन्यू में सालाना मजबूत ग्रोथ के बावजूद, तिमाही रेवेन्यू में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया है, जिसमें Q3 FY26 में तिमाही-दर-तिमाही -24.97% की गिरावट दर्ज हुई। प्रमोटर की हिस्सेदारी में हालिया गिरावट की खबरें भी चिंता बढ़ा रही हैं।

भविष्य का रास्ता: गवर्नेंस और वैल्यूएशन पर निर्भर

GHV Infra Projects पर विश्लेषकों (analysts) की कवरेज बहुत सीमित है, और फिलहाल कोई भी कंपनी के लिए रेवेन्यू या अर्निंग्स का पूर्वानुमान नहीं दे रहा है। कंपनी का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि वह अपने हाई वैल्यूएशन को कैसे मैनेज करती है, कर्ज से जुड़े मुद्दों को कैसे संबोधित करती है, और सबसे महत्वपूर्ण, संबंधित-पक्ष के सौदों और पिछले कानूनी मामलों से उत्पन्न होने वाली गवर्नेंस की चिंताओं को कैसे दूर करती है। निवेशकों का भरोसा तभी बढ़ेगा जब कंपनी पारदर्शिता दिखाएगी और संबंधित फर्मों पर निर्भरता के बिना लगातार ग्रोथ हासिल करेगी।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.