GE Aerospace ने साल 2023 के एक एयर इंडिया फ्लाइट इंसिडेंट के बाद इंजन इंस्पेक्शन के नियमों को सख्त कर दिया है। हालांकि वह मामला अब सुलझ चुका है, लेकिन 2025 में हुए एक अन्य हादसे की जांच कंपनी पर दबाव बढ़ा रही है। निवेशकों के लिए कंपनी की **24%** की शानदार रेवेन्यू ग्रोथ और मार्जिन से जुड़ी चुनौतियां एक बड़ा सवाल बनी हुई हैं।
2023 का मामला और नए इंस्पेक्शन नियम
GE Aerospace ने चुनिंदा इंजन सीरियल नंबर्स के लिए 'बोरस्कोप इंस्पेक्शन' (borescope inspection) अनिवार्य कर दिया है। यह कदम अगस्त 2023 की उस घटना के बाद उठाया गया है, जिसमें मुंबई से लंदन जा रही एक एयर इंडिया Boeing 787-8 फ्लाइट का इंजन बीच हवा में बंद हो गया था। सेंट्रल इंफॉर्मेशन कमीशन की रिपोर्ट के मुताबिक, यह खराबी 2018 में हुए गलत मेंटेनेंस के कारण आई थी, जिसे अब दुरुस्त कर लिया गया है। DGCA ने भी इस मामले को अब क्लोज मान लिया है।
2025 की जांच का बढ़ा दबाव
एक तरफ जहां पुराना मामला सुलझ चुका है, वहीं जून 2025 में हुए एयर इंडिया के एक घातक क्रैश की जांच अभी भी जारी है। अमेरिका में इंजन पार्ट्स की टेस्टिंग में देरी के कारण इसकी फाइनल रिपोर्ट आने में वक्त लग रहा है। यह अनिश्चितता कंपनी के सुरक्षा प्रोटोकॉल पर सवाल खड़े कर रही है, जो निवेशकों की चिंता का मुख्य कारण है।
फाइनेंशियल रिपोर्ट कार्ड
कंपनी की फाइनेंशियल स्थिति की बात करें, तो 2026 की दूसरी तिमाही में रेवेन्यू में 24% का उछाल दर्ज किया गया है। लेकिन, सिक्के का दूसरा पहलू यह है कि नॉन-GAAP ऑपरेटिंग मार्जिन 130 बेसिस पॉइंट्स घटकर 21.7% पर आ गया है। मैनेजमेंट का मानना है कि महंगाई (cost inflation) और प्रोडक्शन बढ़ाने के भारी निवेश का असर मार्जिन पर पड़ा है।
फिलहाल, GE Aerospace का स्टॉक अपने सेक्टर के साथियों के मुकाबले काफी ऊंचे वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहा है। ऐसे में मार्जिन का दबाव और 2025 के हादसे की जांच के नतीजे कंपनी के फ्यूचर मोमेंटम को तय करेंगे।
