Flomic Logistics पर गिरी गाज! रेवेन्यू में भारी गिरावट, 9 महीने में हुआ ₹3.22 करोड़ का घाटा

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AuthorAditya Rao|Published at:
Flomic Logistics पर गिरी गाज! रेवेन्यू में भारी गिरावट, 9 महीने में हुआ ₹3.22 करोड़ का घाटा
Overview

Flomic Global Logistics के निवेशकों के लिए यह तिमाही (Q3 FY26) मिली-जुली रही। कंपनी के रेवेन्यू में **19.3%** की गिरावट आई है, वहीं प्रॉफिट में **31.9%** की कमी दर्ज की गई है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि पिछले 9 महीनों में कंपनी को **₹3.22 करोड़** का नेट लॉस हुआ है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में मुनाफा था। यह कंपनी के लिए एक बड़ा झटका है, खासकर पिछले फाइनेंशियल ईयर (FY25) में शानदार ग्रोथ के बाद।

क्यों गिरी कंपनी की चाल?

Flomic Global Logistics Limited ने 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हुई तीसरी तिमाही (Q3 FY26) और नौ महीनों (9M FY26) के अपने वित्तीय नतीजे जारी किए हैं। नतीजों के मुताबिक, कंपनी के ऑपरेशन से होने वाले रेवेन्यू में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 19.3% की कमी आई है, जो गिरकर ₹108.61 करोड़ रह गया। वहीं, प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में 31.9% की गिरावट देखी गई, जो ₹1.13 करोड़ से घटकर ₹0.77 करोड़ हो गया।

पिछले नौ महीनों (9M FY26) की बात करें तो तस्वीर और भी धुंधली है। रेवेन्यू में 15.2% की कमी आई और यह ₹323.71 करोड़ पर पहुंच गया। सबसे बड़ा झटका यह रहा कि कंपनी, जो पिछले साल इसी अवधि में ₹1.76 करोड़ का मुनाफा कमा रही थी, वह अब ₹3.22 करोड़ के नेट लॉस में चली गई है। यह कंपनी के कामकाज पर हावी हो रहे बड़े चैलेंजेस (challenges) की ओर इशारा करता है।

यह गिरावट इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि Flomic ने पिछले फाइनेंशियल ईयर (FY25) में ज़बरदस्त परफॉरमेंस (performance) दिखाई थी। FY25 में कंपनी का रेवेन्यू 50.6% बढ़कर ₹500.15 करोड़ और PAT 69.1% बढ़कर ₹3.70 करोड़ हो गया था। ऐसे में, मौजूदा नतीजे कंपनी की दिशा में एक बड़े बदलाव का संकेत दे रहे हैं।

कंपनी की आगे की रणनीति

कंपनी के मैनेजमेंट ने कहा है कि उनका लॉजिस्टिक्स प्लेटफॉर्म मज़बूत है और वे कस्टमर एंगेजमेंट (customer engagement) पर फोकस कर रहे हैं। Flomic अपने इंटीग्रेटेड सर्विस ऑफरिंग (integrated service offerings) को मज़बूत करने, चुनिंदा नेटवर्क विस्तार करने और मार्जिन को बेहतर बनाने वाली ग्रोथ पर ज़ोर देना चाहती है। उनकी 'वे फॉरवर्ड' (Way Forward) रणनीति में ज्योग्राफिकल एक्सपेंशन (geographical expansion), ई-कॉमर्स वेयरहाउसिंग (e-commerce warehousing) को बड़ा करना, प्रोजेक्ट लॉजिस्टिक्स (project logistics) और एयर कार्गो (air cargo) क्षमताओं को बढ़ाना शामिल है। हालांकि, कंपनी ने भविष्य के लिए कोई खास क्वांटिटेटिव फाइनेंशियल टारगेट (quantitative financial targets) नहीं बताए हैं।

गहराई से देखें आंकड़ों को: घटते मार्जिन और बढ़ता कर्ज

आय विवरण (income statement) से पता चलता है कि रेवेन्यू पर भारी दबाव है, जिसमें Q3 में 19.3% और 9M FY26 में 15.2% की YoY गिरावट आई है। EBITDA में भी Q3 में 17.7% और 9M FY26 में 25.2% की गिरावट आई। हालांकि Q3 में EBITDA मार्जिन 20 बेसिस पॉइंट (basis points) सुधरकर 9.0% हो गया, लेकिन 9M मार्जिन 110 बेसिस पॉइंट घटकर 7.8% रह गया। नेट प्रॉफिट मार्जिन में भी थोड़ी कमी आई है।

यह भी गौर करने वाली बात है कि फाइनेंस कॉस्ट (finance costs) में दोनों अवधियों में पिछले साल के मुकाबले काफी वृद्धि हुई है, जो उधार पर ब्याज के बढ़ते खर्च का संकेत देता है।

बैलेंस शीट (balance sheet) के अनुसार, कुल एसेट्स (assets) FY25 में बढ़कर ₹2093.47 करोड़ हो गए, जबकि कुल इक्विटी (equity) ₹468.78 करोड़ तक बढ़ी। लेकिन, कुल लायबिलिटीज़ (liabilities) भी बढ़कर ₹1624.69 करोड़ हो गईं। एक बड़ी चिंता कॉन्सोलिडेटेड बोरिंग्स (consolidated borrowings) में ज़बरदस्त इज़ाफ़ा है। नॉन-करंट बोरिंग्स ₹0.52 करोड़ से बढ़कर ₹3.77 करोड़ हो गई हैं, और करंट बोरिंग्स ₹27.26 करोड़ से बढ़कर ₹33.49 करोड़ पर पहुंच गई हैं। कैश और कैश इक्विवेलेंट्स (cash and cash equivalents) भी ₹119.93 करोड़ से घटकर ₹101.30 करोड़ रह गए हैं।

निवेशकों के लिए रिस्क

  • परफॉरमेंस में गिरावट: Q3 FY26 और नौ महीनों के रेवेन्यू और प्रॉफिटेबिलिटी में साल-दर-साल आई बड़ी कमी निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय है। 9M FY26 में नेट लॉस में जाना इस पर और ध्यान खींचता है।
  • बढ़ता कर्ज: कॉन्सोलिडेटेड बोरिंग्स में ज़बरदस्त वृद्धि और बढ़ी हुई फाइनेंस कॉस्ट, वित्तीय लीवरेज (financial leverage) में बढ़ोतरी और भविष्य की प्रॉफिटेबिलिटी पर डेट सर्विसिंग (debt servicing) के बढ़ते बोझ का संकेत देती है।

खास इवेंट्स

कंपनी ने Q3 FY26 के वित्तीय नतीजों के लिए अपनी इन्वेस्टर प्रेजेंटेशन (Investor Presentation) फाइल की है।

कॉम्पिटिटर्स से तुलना

जहां Flomic Global Logistics रेवेन्यू में गिरावट और नेट लॉस से जूझ रही है, वहीं भारतीय लॉजिस्टिक्स सेक्टर के दूसरे खिलाड़ी मज़बूत परफॉरमेंस दिखा रहे हैं। उदाहरण के लिए, Transport Corporation of India (TCI) ने Q3 FY26 में 13.68% की साल-दर-साल वृद्धि के साथ ₹114.70 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया। वहीं, Mahindra Logistics (MLL) ने Q3 FY26 में 19% का रेवेन्यू ग्रोथ हासिल किया, जो ₹1,898 करोड़ तक पहुंच गया, और कई तिमाहियों के लॉस के बाद कंपनी फिर से मुनाफे में आ गई। Shadowfax, जो एक तेज़ी से बढ़ता हुआ प्लेयर है, उसने Q3 FY26 में रेवेन्यू में 65.5% की उछाल के साथ ₹1,160 करोड़ कमाए और नेट प्रॉफिट में भी काफी वृद्धि की। Tiger Logistics ने भी Q3 FY26 के लिए ₹139 करोड़ का रेवेन्यू और ₹5.94 करोड़ का PAT रिपोर्ट किया, जिसमें EBITDA मार्जिन में भी सुधार हुआ। भारतीय लॉजिस्टिक्स सेक्टर के ई-कॉमर्स और सरकारी पहलों से प्रेरित होकर आगे बढ़ने का अनुमान है, जो बताता है कि Flomic का परफॉरमेंस सेक्टर-व्यापी ट्रेंड नहीं है, बल्कि कंपनी-विशिष्ट समस्या है।

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