ई-कॉमर्स कंपनी Flipkart अपनी लॉजिस्टिक्स पार्टनर Shadowfax Technologies में ₹750 करोड़ तक की हिस्सेदारी बेचने की तैयारी कर रही है। यह कदम कंपनी की कैश की जरूरतें पूरी करने और बाहरी फंडिंग पर निर्भरता कम करने की रणनीति का हिस्सा है, खासकर जब कंपनी ने अपना IPO प्लान टाल दिया है।
Flipkart की नई रणनीति: अपनी लॉजिस्टिक्स कंपनी Shadowfax में बेचेगी हिस्सेदारी
Walmart के मालिकाना हक वाली Flipkart अपनी लॉजिस्टिक्स पार्टनर Shadowfax Technologies में 700 करोड़ से 750 करोड़ रुपये तक की हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में है। यह फैसला कंपनी की उस बड़ी रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह एसेट मोनेटाइजेशन (asset monetization) यानी अपनी संपत्ति बेचकर नकदी जुटाने पर जोर दे रही है, बजाय इसके कि वह बाहर से और फंड जुटाए।
IPO प्लान टला, अब कैश फ्लो पर फोकस
Flipkart ने हाल ही में अपने बहुप्रतीक्षित IPO (Initial Public Offering) को टालने का फैसला किया था। अब कंपनी अपने फाइनेंशियल बैलेंस शीट को मजबूत करने के लिए यह कदम उठा रही है। इसके जरिए वह अपने ऑपरेशन्स (operations) को सपोर्ट करने और बाहरी फंडिंग की जरूरत को कम करने की कोशिश में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Flipkart ने पिछले कुछ महीनों में अपने मंथली कैश बर्न (monthly cash burn) को काफी कम किया है, और इस तरह की एसेट बिक्री से उसकी वित्तीय स्थिति और मजबूत होगी।
क्या है ट्रांजैक्शन की डिटेल?
यह डील संभवतः जुलाई के अंत तक फाइनल हो सकती है, क्योंकि Shadowfax में छह महीने की लॉक-इन पीरियड (lock-in period) खत्म होने वाली है। यह ट्रांजैक्शन ब्लॉक डील (block deal) के जरिए हो सकता है। इस डील में Shadowfax के शुरुआती निवेशक भी शामिल हो सकते हैं, जैसे Mirae, Eight Roads, Qualcomm और TPG NewQuest। बता दें कि 10 जुलाई को BSE पर Shadowfax के शेयर ₹227.95 पर ट्रेड कर रहे थे।
2019 से है पार्टनरशिप
Shadowfax, Flipkart के लिए 2019 से लॉजिस्टिक्स पार्टनर के तौर पर काम कर रही है। यह कंपनी खासकर फेस्टिवल्स और पीक सेल्स सीजन (peak sales season) के दौरान लास्ट-माइल डिलीवरी (last-mile delivery) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। फिलहाल Flipkart के पास Shadowfax की करीब 8% हिस्सेदारी है, जिसे इस डील के बाद घटाकर लगभग 2% कर दिया जाएगा। हालांकि, Flipkart करीब 8.9 मिलियन शेयर अपने पास रखेगी, ताकि SEBI (Securities and Exchange Board of India) के मिनिमम प्रमोटर कंट्रीब्यूशन (minimum promoter contribution) की शर्तों को पूरा किया जा सके। इससे यह भी साफ है कि Flipkart लॉजिस्टिक्स फर्म की सफलता में अपनी भागीदारी बनाए रखेगी।
