पश्चिम बंगाल टैक्स अथॉरिटी का सख्त रुख
पश्चिम बंगाल के एक टैक्स अथॉरिटी ने पहले के फैसले को पलटते हुए Flipkart India को अपने प्रस्तावित डिलीवरी शुल्क पर 18% GST का भुगतान करने का आदेश दिया है। ई-कॉमर्स कंपनी के लॉजिस्टिक्स प्लान के लिए यह एक बड़ा झटका है।
Flipkart की क्या थी योजना?
Flipkart India ने टैक्स अथॉरिटीज से एक नई लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को लेकर सलाह मांगी थी। इसके तहत, ऑनलाइन ग्राहक सीधे Flipkart से 'सोर्स मदर हब' से अपने घरों तक रोड ट्रांसपोर्ट बुक कर सकते थे और इसके लिए विशेष 'GT Charges' का भुगतान कर सकते थे। यदि इस सेवा को गुड्स ट्रांसपोर्ट एजेंसी (GTA) सर्विस के रूप में मंजूरी मिल जाती, तो ग्राहकों द्वारा भुगतान किए जाने वाले ये डिलीवरी शुल्क GST से मुक्त हो सकते थे।
छूट के लिए Flipkart का तर्क
Flipkart का तर्क था कि उनकी सेवा गुड्स ट्रांसपोर्ट एजेंसी (GTA) के दायरे में आती है क्योंकि यह पूरी तरह से सड़क मार्ग से होती और ग्राहकों को कंसाइनमेंट नोट जारी किए जाते। GTA सेवाएं जो अपंजीकृत व्यक्तियों (unregistered persons) को दी जाती हैं, वे आमतौर पर GST से मुक्त होती हैं।
टैक्स अथॉरिटी ने क्यों की असहमति?
हालांकि, राज्य के टैक्स विभाग ने इससे असहमति जताई। उनका तर्क था कि Flipkart की योजना एक सामान्य कूरियर और ई-कॉमर्स डिलीवरी सेवा की तरह अधिक है। विभाग ने Flipkart द्वारा कई हब का उपयोग, लास्ट-माइल डिलीवरी पार्टनर्स, डोर-टू-डोर सर्विस और समय-संवेदनशील लॉजिस्टिक्स जैसी बातों पर जोर दिया, जो कि एक कूरियर सेवा की विशिष्ट विशेषताएं हैं। अथॉरिटी ने GTA वर्गीकरण के लिए Flipkart द्वारा प्रस्तावित कंसाइनमेंट नोट्स की वैधता पर भी सवाल उठाए। अंततः, अथॉरिटी ने यह मानते हुए फैसला सुनाया कि Flipkart का मॉडल GTA सेवा के रूप में योग्य नहीं है और इसलिए GST छूट का हकदार नहीं है। इस फैसले पर व्यापक ई-कॉमर्स और लॉजिस्टिक्स उद्योग की बारीक नजर है।
