Federation of Indian Pilots: फ्लाइट क्रू के लिए ड्रग टेस्टिंग 10% से बढ़कर 25% होगी? FIP ने DGCA को सौंपी रिपोर्ट

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AuthorAditya Rao|Published at:
Federation of Indian Pilots: फ्लाइट क्रू के लिए ड्रग टेस्टिंग 10% से बढ़कर 25% होगी? FIP ने DGCA को सौंपी रिपोर्ट

भारतीय पायलटों के संगठन Federation of Indian Pilots (FIP) ने डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) से एक अहम प्रस्ताव मांगा है। FIP चाहता है कि फ्लाइट क्रू के लिए अनिवार्य रैंडम ड्रग टेस्टिंग का दायरा बढ़ाकर **10%** से **25%** कर दिया जाए। साथ ही, टेस्टिंग की प्रक्रिया को तेज करने के लिए ओरल-फ्लूइड टेस्टिंग (oral-fluid testing) को भी शामिल करने का सुझाव दिया गया है।

पायलटों के संगठन की मांग

Federation of Indian Pilots (FIP) ने DGCA को प्रस्ताव दिया है कि फ्लाइट क्रू के लिए सालाना रैंडम ड्रग टेस्टिंग की सीमा को मौजूदा 10% से बढ़ाकर 25% किया जाए। संगठन ने टेस्टिंग की प्रक्रिया को आसान और तेज बनाने के लिए ओरल-फ्लूइड टेस्टिंग को अपनाने की भी सिफारिश की है।

सुरक्षा चिंताएं और नया प्रस्ताव

यह मांग हाल ही में एविएशन सेक्टर में सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंताओं के बीच आई है। अगस्त 2026 में एयर इंडिया ग्रुप की एक फ्लाइट के साथ हुई घटना के बाद, जिसमें उड़ान के दौरान ऑपरेशनल दिक्कतें आईं, जांच में कुछ पायलटों के नतीजों का नॉन-नेगेटिव आना सामने आया था। DGCA के 2022 के नियमों के तहत अभी 10% रैंडम टेस्टिंग अनिवार्य है, लेकिन इन घटनाओं ने ज्यादा फ्रीक्वेंट और तेज टेस्टिंग की जरूरत पर जोर दिया है।

एयरलाइंस पर होगा असर

अगर DGCA इस प्रस्ताव को मानता है, तो एयरलाइन ऑपरेटर्स के लिए लॉजिस्टिक्स की योजना बनाना और अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगा। उन्हें टेस्टिंग की बढ़ी हुई फ्रीक्वेन्सी को फ्लाइट शेड्यूल या क्रू की उपलब्धता को प्रभावित किए बिना मैनेज करना होगा। FIP का कहना है कि ओरल-फ्लूइड टेस्टिंग मौजूदा यूरिन-आधारित टेस्टिंग से तेज है, लेकिन इसे अपनाने के लिए एयरलाइंस को नए उपकरण और ट्रेनिंग में निवेश करना होगा।

एविएशन सेक्टर में सख्ती

जैसे-जैसे भारतीय एविएशन सेक्टर में फ्लीट साइज और पैसेंजर ट्रैफिक बढ़ रहा है, DGCA लगातार सुरक्षा नियमों को कड़ा कर रहा है। अगर यह नियम लागू होता है, तो यह भारत में ऑपरेट करने वाली सभी शेड्यूल कैरियर्स, जिनमें IndiGo, एयर इंडिया ग्रुप और अन्य रीजनल एयरलाइंस शामिल हैं, पर लागू होगा। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और UAE जैसे देशों के रेग्युलेटरी बॉडीज पहले से ही विभिन्न टेस्टिंग तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसे FIP ने अपने प्रस्ताव में बेंचमार्क के तौर पर पेश किया है।

निवेशकों और एविएशन सेक्टर से जुड़े लोगों को इस पर DGCA के जवाब पर नजर रखनी चाहिए। सुरक्षा नियमों का सख्त होना पैसेंजर के भरोसे के लिए अच्छा माना जाता है, हालांकि इससे एयरलाइंस की ऑपरेशनल लागत बढ़ सकती है।

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