FASTag यूजर्स की संख्या 6.23 करोड़ पार, टोल प्लाजा पर अब नहीं रुकेगी गाड़ियां!

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AuthorNeha Patil|Published at:
FASTag यूजर्स की संख्या 6.23 करोड़ पार, टोल प्लाजा पर अब नहीं रुकेगी गाड़ियां!

भारत का इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन सिस्टम जून 2026 तक 6.23 करोड़ एक्टिव यूजर्स तक पहुंच गया है, जिसमें ₹3,075 का सालाना पास भी बड़ा मददगार साबित हुआ है। सरकार अब टोल प्लाजा पर मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) टेक्नोलॉजी की ओर बढ़ रही है, जिससे हाईवे पर जाम और गाड़ियों को रुकने-चलने में लगने वाला समय बचेगा।

FASTag का बढ़ा दबदबा

भारतीय हाईवे पर इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन का इस्तेमाल एक नए मुकाम पर पहुंच गया है। जून 2026 तक, FASTag के एक्टिव यूजर्स की संख्या बढ़कर 6.23 करोड़ हो गई है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (Ministry of Road Transport and Highways) के इस डिजिटल कदम का मकसद टोल प्लाजा पर फिजिकल कॉन्टैक्ट को कम करना और पूरे नेशनल हाईवे नेटवर्क पर ट्रैफिक को स्मूथ बनाना है।

₹3,075 वाले सालाना पास की धूम

इस ग्रोथ में 'एनुअल पास' स्कीम का बड़ा योगदान है, जो अगस्त 2025 में लॉन्च हुई थी। प्राइवेट नॉन-कमर्शियल गाड़ियों के लिए ₹3,075 की कीमत वाला यह पास 77 लाख से ज्यादा यूजर्स अपना चुके हैं। आंकड़ों से पता चलता है कि यह पास अब कारों और हल्के वाहनों के लिए होने वाले कुल इलेक्ट्रॉनिक टोल ट्रांजैक्शन का लगभग एक-तिहाई हिस्सा कवर करता है। इससे यह साफ है कि जो लोग अक्सर हाईवे का इस्तेमाल करते हैं, वे सिंगल-ट्रिप डिडक्शन के बजाय इस कॉस्ट-इफेक्टिव अपफ्रंट पेमेंट मॉडल को पसंद कर रहे हैं।

अब टोल प्लाजा पर गाड़ियां नहीं रुकेंगी!

कार्यों को और बेहतर बनाने के लिए, सरकार पारंपरिक टोल बूथ स्टॉप्स से हटकर मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) टेक्नोलॉजी की ओर बढ़ रही है। यह सिस्टम FASTag सेंसर, ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करके वाहनों की स्पीड बनाए रखते हुए टोल पेमेंट प्रोसेस करता है। फिलहाल, 5 टोल प्लाजा पर इस टेक्नोलॉजी को सफलतापूर्वक लागू किया गया है, और आने वाले समय में 12 और जगहों पर इसका विस्तार करने की योजना है। आगे चलकर देश भर के 104 और टोल प्लाजा पर यह इंफ्रास्ट्रक्चर लगाने का एक बड़ा रोडमैप तैयार है।

नियम और भविष्य की योजनाएं

सरकार भले ही एडवांस टेक्नोलॉजी की ओर बढ़ रही हो, लेकिन वह नेशनल हाईवे फी रूल्स 2008 (National Highways Fee Rules of 2008) का पालन कर रही है। इन नियमों के मुताबिक, एक ही दिशा में टोल प्लाजा के बीच कम से कम 60 किलोमीटर की दूरी होनी चाहिए। MLFF पर फोकस पारंपरिक बूथों से जुड़ी दिक्कतों, जैसे कि कतार में लगने वाला समय और गाड़ियों के आइडलिंग से होने वाले फ्यूल की बर्बादी को कम करने की ओर एक बड़ा कदम है।

हाईवे यूजर्स और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कंपनियों के लिए, अब यह देखना अहम होगा कि बाकी बचे 104 टोल प्लाजा पर MLFF सिस्टम कितनी तेजी से लागू होता है। इसके अलावा, सरकार का सैटेलाइट-बेस्ड टोलिंग (satellite-based tolling) को लेकर लंबित फैसला भी हाईवे फीस कलेक्शन के भविष्य को आकार देने में एक महत्वपूर्ण कारक साबित होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.