केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने 'OneTag' सर्विस लॉन्च की है, जिससे FASTag यूजर्स अब अपना सर्विस प्रोवाइडर बैंक बिना नया हार्डवेयर लगवाए बदल सकेंगे। यह सुविधा 'Rajmargyatra' ऐप के जरिए मिलेगी, जिसमें सिक्योरिटी और पारदर्शिता के लिए नया KYC और **6** महीने का कूलिंग-ऑफ पीरियड अनिवार्य होगा।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने 'Global Fintech Fest 2026' में 'OneTag' को लॉन्च किया है। यह कदम भारतीय वाहन चालकों के लिए FASTag पोर्टेबिलिटी को बेहद सरल बनाने के लिए उठाया गया है। अब आपको अपनी गाड़ी की विंडशील्ड से पुराना RFID टैग हटाने या नया लगवाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। पूरा प्रोसेस 'National Highways Authority of India' (NHAI) के 'Rajmargyatra' ऐप के माध्यम से मैनेज किया जाएगा।
कैसे काम करेगा ट्रांजिशन?
पुराने सिस्टम में बैंक बदलने के लिए बार-बार टैग बदलना एक बड़ी सिरदर्द था, जिससे ग्राहक परेशान रहते थे। 'OneTag' के साथ अब ग्राहक सिर्फ अपने अकाउंट मैपिंग को नए बैंक से जोड़ सकते हैं। हालांकि, इसके लिए नए बैंक में नया KYC कराना अनिवार्य होगा ताकि फाइनेंशियल नियमों का पालन हो सके। पुराना बैंक आपके पुराने वॉलेट को मैनेज करने और बैलेंस रिफंड करने की जिम्मेदारी लेगा।
बैंकिंग सेक्टर पर क्या पड़ेगा असर?
निवेशकों के नजरिए से देखें तो यह टोल कलेक्शन मार्केट में कॉम्पिटिशन बढ़ा सकता है। फिलहाल HDFC Bank, ICICI Bank, IDFC First Bank और Axis Bank जैसे बड़े नाम इस मार्केट में हावी हैं। अब जब ग्राहकों के पास सर्विस प्रोवाइडर बदलने की आजादी होगी, तो इन बैंकों को अपनी ऐप की क्वालिटी और कस्टमर सर्विस को और बेहतर बनाना होगा ताकि वे अपना बेस बरकरार रख सकें।
जरूरी सावधानियां और रिस्क
सिस्टम की स्थिरता बनाए रखने के लिए सरकार ने 6 महीने का 'कूलिंग-ऑफ पीरियड' रखा है, यानी आप बार-बार बैंक नहीं बदल पाएंगे। इसके अलावा, ट्रांजिशन के शुरुआती दौर में पुराने बैलेंस के रिफंड और नए बैंक की एक्टिवेशन में कुछ तकनीकी देरी देखने को मिल सकती है। निवेशकों को यह देखना होगा कि बैंक कितनी तेजी से इसे अपनाते हैं और मार्केट शेयर में क्या बदलाव आता है।
