ब्राजील की एयरोस्पेस कंपनी Embraer ने भारतीय बाज़ार में बड़ा कदम रखा है। कंपनी को भारत के नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) से अपने E-Jet एयरक्राफ्ट के लिए टाइप सर्टिफिकेशन मिल गया है। इस मंजूरी के बाद Embraer अगले 10 सालों में भारत में लगभग **500** एयरक्राफ्ट बेचने की उम्मीद कर रही है।
छोटे शहरों को जोड़ेगा Embraer का E-Jet
DGCA से सर्टिफिकेशन मिलने के बाद Embraer अब अपने E190, E195 और E195-E2 मॉडल्स को भारतीय एयरलाइंस के सामने पेश कर पाएगी। कंपनी का मानना है कि ये एयरक्राफ्ट छोटे शहरों को जोड़ने में अहम भूमिका निभाएंगे। अभी भारत में छोटे टर्बोप्रॉप प्लेन और बड़े नैरोबॉडी जेट के बीच एक गैप है, जिसे Embraer के E-Jet भरने की कोशिश करेंगे। Star Air पहले से ही Embraer का E175 मॉडल भारत में उड़ा रही है, लेकिन यह नई सर्टिफिकेशन कंपनी के पोर्टफोलियो को और मजबूत करेगी।
क्षेत्रीय रूट्स की बड़ी ज़रूरत
Embraer की रणनीति भारत के एविएशन सेक्टर की खास ज़रूरतों को पूरा करने पर आधारित है। वर्तमान में, कई रीजनल रूट्स पर या तो छोटे टर्बोप्रॉप प्लेन इस्तेमाल होते हैं या फिर ऐसे बड़े प्लेन, जिनमें यात्रियों की संख्या प्लेन के आकार के हिसाब से कम होती है। Embraer का कहना है कि भारत में ऐसे 800 से ज़्यादा शहर हैं जहाँ फिलहाल सीधी हवाई सेवा नहीं है, लेकिन 150 से कम सीटों वाले एयरक्राफ्ट के लिए पर्याप्त मांग है। इनमें से लगभग 90% रूट्स 500 किलोमीटर से ज़्यादा लंबे हैं। कंपनी का मानना है कि उनका E-Jet परिवार, खासकर फ्यूल-एफिशिएंट E195-E2, इस गैप को भरने में सक्षम है। इससे एयरलाइंस बड़े हब्स पर दबाव कम करके टियर-2 और टियर-3 शहरों के बीच कनेक्टिविटी बढ़ा सकती हैं।
बाज़ार में कड़ी टक्कर
भारतीय बाज़ार में Embraer को Airbus और Boeing जैसी बड़ी कंपनियों से कड़ी टक्कर मिलेगी, जिनके नैरोबॉडी प्लेन IndiGo और Air India जैसी प्रमुख एयरलाइंस के बेड़े में शामिल हैं। Embraer छोटे नैरोबॉडी सेगमेंट में अपनी खास जगह बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। E-Jet सीरीज में 2x2 सीटिंग कॉन्फ़िगरेशन यात्रियों को ज़्यादा आराम देता है, क्योंकि इसमें बीच की सीट नहीं होती।
निवेशकों के लिए, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सर्टिफिकेशन के बाद Embraer को असल में कितने ऑर्डर मिलते हैं। 500 एयरक्राफ्ट का लक्ष्य एक दीर्घकालिक अनुमान है, लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि भारतीय एयरलाइंस रीजनल कनेक्टिविटी के लिए मिड-साइज़्ड प्लेन को अपनाने का फैसला करती हैं या नहीं। इसके अलावा, भारत में इन एयरक्राफ्ट के मेंटेनेंस और सपोर्ट इकोसिस्टम का विकास भी एक अहम फैक्टर होगा। आने वाले समय में कंपनी की डील्स और नए ऑर्डर्स पर नज़र रखी जाएगी।
