Aviation Sector: हवाई सफर हुआ महंगा! फ्लाइट्स की कमी से टिकटों के दाम **74%** तक उछले

TRANSPORTATION
Whalesbook Logo
AuthorAditya Rao|Published at:
Aviation Sector: हवाई सफर हुआ महंगा! फ्लाइट्स की कमी से टिकटों के दाम **74%** तक उछले

सितंबर में घरेलू फ्लाइट्स की क्षमता में साल-दर-साल **5.3%** की गिरावट आई है, जिसके चलते एयरफेयर (Airfares) पिछले साल के मुकाबले **12-20%** तक महंगे हो गए हैं। हालांकि एयरलाइंस की प्रति टिकट कमाई बढ़ रही है, लेकिन फ्यूल और डॉलर की मजबूती मुनाफे पर दबाव डाल सकती है।

त्योहारी सीजन से ठीक पहले भारतीय एविएशन सेक्टर में सीटों की भारी किल्लत देखने को मिल रही है। सितंबर के आंकड़ों पर गौर करें, तो घरेलू फ्लाइट्स की क्षमता 1.58 करोड़ से घटकर 1.49 करोड़ रह गई है, जो कि 5.3% की सीधी गिरावट है। फ्लाइट्स की कुल संख्या में तो और भी ज्यादा, यानी 8.5% की कमी दर्ज की गई है, जो अब 83,515 रह गई है।

रूट के हिसाब से मची खलबली

आपूर्ति में इस कमी का सीधा असर यात्रियों की जेब पर पड़ रहा है। दिल्ली-हैदराबाद रूट पर वन-वे किराया 74% तक बढ़ गया है। वहीं, दिल्ली-गोवा रूट पर 47% और मुंबई-कोलकाता रूट पर टिकटों के दाम 43% तक महंगे हुए हैं।

मुनाफे पर क्यों है रिस्क?

भले ही कंपनियां प्रति सीट ज्यादा पैसा वसूल रही हैं, लेकिन उनका ऑपरेटिंग खर्चा (Operating Cost) कम नहीं हो रहा है। एयरलाइंस का करीब 70% खर्चा—जिसमें फ्यूल, लीज और मेंटेनेंस शामिल है—डॉलर से जुड़ा है। रुपये की कमजोरी और मिडिल ईस्ट में एनर्जी संकट के कारण एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की ऊंची कीमतें एयरलाइंस के नेट प्रॉफिट पर लगातार पानी फेर रही हैं।

निवेशकों के लिए चुनौती यह है कि अगर क्षमता कम बनी रही, तो यात्री डिमांड पर असर पड़ सकता है। आने वाले महीनों में देखना होगा कि एयरलाइंस अपनी फ्लाइट शेड्यूलिंग में क्या बदलाव करती हैं, क्योंकि यही उनके फाइनेंशियल ईयर की दूसरी छमाही का भविष्य तय करेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.